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भोपाल के रहवासी इलाकों में कारोबार पर सख्ती शुरू: अब 24 घंटे का अल्टीमेटम, जानें किसे राहत, किस पर लगेगा ताला
Mon, 17 Aug 2026 05:36 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 17 Aug 2026 05:36 PM IST
सार
भोपाल में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम ने सख्ती बढ़ा दी है। अब तक 5778 नोटिस जारी किए जा चुके हैं और समय सीमा पूरी होने पर 24 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम दिया जा रहा है। पालन नहीं करने पर प्रतिष्ठान सील होंगे। 62 हजार से ज्यादा संपत्तियां जांच के दायरे में हैं। याचिकाकर्ता ने छोटे कार्यालय-क्लिनिक को राहत देने और बड़े व्यावसायिक परिसरों पर पहले कार्रवाई की मांग की है।
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नगर निगम का नोटिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर भोपाल नगर निगम ने कार्रवाई का अगला चरण शुरू कर दिया है। अब तक 5778 भवनों और प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए जा चुके हैं। 5 से 9 अगस्त के बीच मिले नोटिस की 10 दिन की समय-सीमा पूरी होने के बाद संबंधित लोगों को अब 24 घंटे का अंतिम मौका दिया जा रहा है। इसके बाद भी व्यावसायिक गतिविधि जारी मिली तो प्रतिष्ठान सील किया जा सकता है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस तरह के कारोबार पर ताला लगेगा और किन गतिविधियों को नियमों के तहत राहत मिल सकती है?
छोटे कार्यालय और क्लिनिक बनाम पूरी तरह व्यावसायिक इमारत
मामले के याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि छोटे व्यापारियों, घर के सीमित हिस्से में चल रहे छोटे कार्यालय या क्लिनिक को बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक मिश्रित भूमि उपयोग की व्यवस्था में यदि कोई व्यक्ति अपने आवासीय भवन के सीमित हिस्से में छोटा कार्यालय संचालित करता है और बाकी हिस्सा आवास के रूप में इस्तेमाल होता है, तो उसकी स्थिति अलग हो सकती है। वहीं आवासीय भूखंड पर पूरा भवन मॉल, शोरूम या बड़े व्यावसायिक परिसर के रूप में संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
किन पर कार्रवाई का खतरा ज्यादा?
नगर निगम के मौजूदा अभियान में उन भवनों को निशाने पर लिया जा रहा है, जहां रहवासी अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं या स्वीकृत अनुमति के विपरीत निर्माण किया गया है। ऐसे मामलों में नोटिस के बाद निर्धारित समय में स्थिति नहीं सुधारी गई तो सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है। यानी सिर्फ दुकान होने के आधार पर हर मामले में एक जैसी कार्रवाई नहीं होगी। भवन की स्वीकृति, भूमि उपयोग और वहां चल रही गतिविधि की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
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62 हजार से ज्यादा संपत्तियां निगम की सूची में
नगर निगम के सर्वे में 62 हजार से ज्यादा ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जहां रहवासी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की आशंका है। 5 अगस्त से पहले 1018 नोटिस दिए गए थे। इसके बाद 5 से 12 अगस्त के बीच 1163, 13 अगस्त को 1135 और 14 अगस्त को 1478 नोटिस जारी किए गए। 16 अगस्त तक कुल संख्या 5778 पहुंच गई।
नरेला और गोविंदपुरा सबसे आगे
विधानसभा क्षेत्रवार देखें तो नरेला में सबसे ज्यादा 1470 नोटिस दिए गए हैं। गोविंदपुरा में 1250, मध्य में 1093, हुजूर में 1032, दक्षिण-पश्चिम में 652 और उत्तर में 371 नोटिस जारी हुए हैं।
नोटिस पर नोटिस, कार्रवाई कब?
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पहले सर्वे और नोटिस हो चुके हैं, तो बार-बार नोटिस देने के बजाय वास्तविक कार्रवाई शुरू होनी चाहिए। उनका आरोप है कि छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई का दबाव ज्यादा है, जबकि बड़े व्यावसायिक परिसरों और कथित भू-माफिया के खिलाफ पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई जा रही। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेंगे और निगम की कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को सामने रखेंगे।
कारोबारियों में बढ़ी चिंता
निगम की सख्ती के बाद अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी सहित कई इलाकों में रहवासी भवनों में कारोबार करने वाले दुकानदारों में चिंता बढ़ी है। कई कारोबारी अब व्यावसायिक क्षेत्रों में जगह तलाश रहे हैं। वहीं रहवासी संगठनों ने भी बैठक कर कार्रवाई को लेकर अपनी रणनीति बनाई है। शनिवार को सेवाएं कॉम्प्लेक्स से औरा मॉल तक टॉर्च रैली निकालने और हस्ताक्षर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।
यह भी पढ़ें-एमपी में मानसून दिखा रहा असर, आज 14 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, 3 में ऑरेंज अलर्ट
नदी-तालाब, ग्रीन बेल्ट और अवैध निर्माण भी जांच में
निगम का सर्वे सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं है। मुख्य मार्गों और उनसे जुड़ी गलियों के अलावा नदी-तालाब किनारे, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और जलग्रहण क्षेत्र में बने भवनों की भी जांच की जा रही है। स्वीकृति के विपरीत निर्माण और अवैध मैरिज गार्डन भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। फिलहाल 5778 नोटिस वालों के लिए 24 घंटे का समय निर्णायक है। इसके बाद निगम की कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित रहती है या सीलिंग तक पहुंचती है, इस पर शहर की नजर है।
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छोटे कार्यालय और क्लिनिक बनाम पूरी तरह व्यावसायिक इमारत
मामले के याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि छोटे व्यापारियों, घर के सीमित हिस्से में चल रहे छोटे कार्यालय या क्लिनिक को बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक मिश्रित भूमि उपयोग की व्यवस्था में यदि कोई व्यक्ति अपने आवासीय भवन के सीमित हिस्से में छोटा कार्यालय संचालित करता है और बाकी हिस्सा आवास के रूप में इस्तेमाल होता है, तो उसकी स्थिति अलग हो सकती है। वहीं आवासीय भूखंड पर पूरा भवन मॉल, शोरूम या बड़े व्यावसायिक परिसर के रूप में संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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किन पर कार्रवाई का खतरा ज्यादा?
नगर निगम के मौजूदा अभियान में उन भवनों को निशाने पर लिया जा रहा है, जहां रहवासी अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं या स्वीकृत अनुमति के विपरीत निर्माण किया गया है। ऐसे मामलों में नोटिस के बाद निर्धारित समय में स्थिति नहीं सुधारी गई तो सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है। यानी सिर्फ दुकान होने के आधार पर हर मामले में एक जैसी कार्रवाई नहीं होगी। भवन की स्वीकृति, भूमि उपयोग और वहां चल रही गतिविधि की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
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62 हजार से ज्यादा संपत्तियां निगम की सूची में
नगर निगम के सर्वे में 62 हजार से ज्यादा ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जहां रहवासी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की आशंका है। 5 अगस्त से पहले 1018 नोटिस दिए गए थे। इसके बाद 5 से 12 अगस्त के बीच 1163, 13 अगस्त को 1135 और 14 अगस्त को 1478 नोटिस जारी किए गए। 16 अगस्त तक कुल संख्या 5778 पहुंच गई।
नरेला और गोविंदपुरा सबसे आगे
विधानसभा क्षेत्रवार देखें तो नरेला में सबसे ज्यादा 1470 नोटिस दिए गए हैं। गोविंदपुरा में 1250, मध्य में 1093, हुजूर में 1032, दक्षिण-पश्चिम में 652 और उत्तर में 371 नोटिस जारी हुए हैं।
नोटिस पर नोटिस, कार्रवाई कब?
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पहले सर्वे और नोटिस हो चुके हैं, तो बार-बार नोटिस देने के बजाय वास्तविक कार्रवाई शुरू होनी चाहिए। उनका आरोप है कि छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई का दबाव ज्यादा है, जबकि बड़े व्यावसायिक परिसरों और कथित भू-माफिया के खिलाफ पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई जा रही। उन्होंने कहा कि इस मामले में वे फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेंगे और निगम की कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को सामने रखेंगे।
कारोबारियों में बढ़ी चिंता
निगम की सख्ती के बाद अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी सहित कई इलाकों में रहवासी भवनों में कारोबार करने वाले दुकानदारों में चिंता बढ़ी है। कई कारोबारी अब व्यावसायिक क्षेत्रों में जगह तलाश रहे हैं। वहीं रहवासी संगठनों ने भी बैठक कर कार्रवाई को लेकर अपनी रणनीति बनाई है। शनिवार को सेवाएं कॉम्प्लेक्स से औरा मॉल तक टॉर्च रैली निकालने और हस्ताक्षर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।
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नदी-तालाब, ग्रीन बेल्ट और अवैध निर्माण भी जांच में
निगम का सर्वे सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं है। मुख्य मार्गों और उनसे जुड़ी गलियों के अलावा नदी-तालाब किनारे, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और जलग्रहण क्षेत्र में बने भवनों की भी जांच की जा रही है। स्वीकृति के विपरीत निर्माण और अवैध मैरिज गार्डन भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। फिलहाल 5778 नोटिस वालों के लिए 24 घंटे का समय निर्णायक है। इसके बाद निगम की कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित रहती है या सीलिंग तक पहुंचती है, इस पर शहर की नजर है।
