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MP News: नक्सलवाद के खात्मे का असर, बिरसा ब्लॉक में 40 साल बाद पहुंची स्वास्थ्य टीम, 125 बच्चों की बची जान

Mon, 17 Aug 2026 06:02 PM IST
Anand Pawar Anand Pawar
Updated Mon, 17 Aug 2026 06:02 PM IST
सार

बालाघाट के नक्सल प्रभावित बिरसा विकासखंड में पहली बार स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों तक पहुंची और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 125 बच्चों का इलाज कर उन्हें स्वस्थ किया। वर्षों तक नक्सली प्रभाव के कारण यहां के आदिवासी गांव स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर रहे।

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MP News: Impact of eliminating Naxalism—health team reaches Birsa block after 40 years; 125 children's lives s
नक्सल प्रभावित रहे बिरसा विकासखंड में बच्चों का इलाज करते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित बिरसा विकासखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो बताती है कि नक्सलवाद ने आदिवासी इलाकों को किस तरह विकास की मुख्यधारा से दूर कर दिया था। नक्सल मुक्त होने के बाद पहली बार स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों तक पहुंची और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 125 बच्चों का इलाज कर उन्हें स्वस्थ किया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बिरसा विकासखंड के कुंडेकसा, अडोरी, कोरका, बोंदारी, मछुरदा, गठिया और मातला सहित कई गांवों में बड़ी संख्या में बच्चे बुखार, त्वचा संबंधी बीमारियों, उल्टी-दस्त और अन्य संक्रमण से पीड़ित पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल विशेष अभियान शुरू कर बच्चों की जांच और उपचार शुरू किया।
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बालाघाट का बिरसा क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों का केंद्र रहा है। वर्ष 1986 के बाद यहां नक्सल गतिविधियां तेजी से बढ़ीं। 1990 में इस क्षेत्र में नक्सलवाद से जुड़ा पहला मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद कई बड़ी घटनाएं हुईं, जिनमें पुलिसकर्मियों की शहादत और जनप्रतिनिधियों पर हमले शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि वर्षों तक नक्सली प्रभाव के कारण कई गांवों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी सुविधाएं नहीं पहुंच सकीं। हालात ऐसे थे कि लोग अस्पताल जाने से भी डरते थे।
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डॉक्टरों को देखकर जंगलों की ओर भाग जाते थे लोग
स्वास्थ्य विभाग की टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों का भरोसा जीतना था। अधिकारियों के अनुसार, कई परिवार डॉक्टरों को देखकर अपने बच्चों को लेकर जंगलों की ओर चले जाते थे। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने गांवों में लगातार संपर्क अभियान चलाया और लोगों को इलाज के लिए तैयार किया। 


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एक महीने में 169 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया 
जून 2026 में एक बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे इलाके में विशेष सर्वे शुरू किया। जांच के दौरान बच्चों में तेज बुखार, त्वचा पर चकत्ते, मुंह में छाले, पेट दर्द, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण पाए गए। पिछले एक महीने के दौरान 169 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 125 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं, जबकि 44 बच्चों का इलाज अभी भी जारी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी बच्चों की स्थिति सामान्य है। 

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630 मरीजों की पहचान, 461 बच्चों का घर पर ही इलाज
स्वास्थ्य विभाग ने 20 सर्वेक्षण टीमों को गांवों में तैनात किया है। इसके अलावा चार मोबाइल मेडिकल यूनिट, 10 चिकित्सा अधिकारी और चार एंबुलेंस भी लगाई गई हैं। अब तक 630 मरीजों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से 461 बच्चों का इलाज उनके घरों पर ही किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने 10 गांवों के 980 घरों में स्वास्थ्य परीक्षण के साथ कीटनाशक छिड़काव, फॉगिंग और लार्वा सर्वे भी कराया है।
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