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चक्रवात अर्नब ने बदला एमपी का मौसम: आज 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, करवा चौथ पर बादल डालेंगे खलल?
Thu, 29 Oct 2026 07:07 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 29 Oct 2026 07:07 AM IST
सार
चक्रवात अर्नब के असर से गुरुवार को मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों में भारी बारिश की संभावना है। मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है, जबकि भोपाल-ग्वालियर समेत कई शहरों में हल्की बारिश और गरज-चमक हो सकती है। करवा चौथ पर चंद्र दर्शन के लिए मौसम की स्थिति अहम रहेगी।
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मौसम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का सिलसिला थम नहीं रहा है। चक्रवात अर्नब के प्रभाव से गुरुवार को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मौसम ज्यादा बिगड़ने के आसार हैं। मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि रीवा, सतना, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी है। भोपाल और ग्वालियर समेत कई शहरों में भी बादल छाने, हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना है। आज करवा चौथ का व्रत भी है। ऐसे में दिनभर बादल और बारिश का असर रहने पर व्रत रखने वाली महिलाओं को रात में चंद्र दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, किसी शहर में चांद दिखाई देगा या नहीं, यह शाम के समय स्थानीय मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।
पूर्वी एमपी में ज्यादा असर, कई जिलों में भारी बारिश के आसार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के पूर्वी जिलों में बारिश की गतिविधियां तेज रह सकती हैं। मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अति भारी बारिश की आशंका है। रीवा, सतना, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में भी भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर करीब चार इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड और श्योपुर सहित कई जिलों में हल्की बारिश, तेज हवा और गरज-चमक का असर रह सकता है। जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम बदलने के आसार हैं।
इसके उलट नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, इंदौर, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है।
बुधवार को कई शहरों में हुई बारिश
बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाने के साथ बारिश दर्ज की गई। सतना, कटनी और छतरपुर सहित अलग-अलग जिलों में रुक-रुककर पानी गिरा। मझगवां और चित्रकूट क्षेत्र में बारिश का दौर जारी रहा, जबकि अनूपपुर जिला मुख्यालय में शाम को हल्की बारिश हुई। खजुराहो में भी शाम के समय ठंडी हवाओं के साथ बादल छाए और रिमझिम बारिश हुई। भोपाल में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। लगातार बदलते मौसम का असर खेती पर भी पड़ सकता है। कटनी में बारिश के कारण धान की फसल को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। खेतों में पककर तैयार फसलों के लिए इस समय बारिश की मात्रा और उसकी अवधि महत्वपूर्ण होगी।
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रात में बढ़ी ठंडक, दिन के तापमान में भी गिरावट
बारिश और बादलों के कारण प्रदेश के कुछ इलाकों में दिन का तापमान एक डिग्री तक नीचे आया है। वहीं, रात में ठंडक बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शाजापुर के गिरवर में न्यूनतम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पचमढ़ी में यह 15.2 डिग्री, धार में 15.4 डिग्री, आगर-मालवा में 15.9 डिग्री और नीमच के मरुखेड़ा व छतरपुर के नौगांव में 16 डिग्री सेल्सियस रहा। दूसरी ओर, खजुराहो, खंडवा, रतलाम, खरगोन और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 33.2 से 34.2 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। यानी प्रदेश में कहीं बारिश और ठंडी हवाओं का असर है, तो कहीं दिन में गर्मी अब भी बनी हुई है।
3 अक्टूबर को लौट चुका मानसून, फिर क्यों बरस रहे बादल?
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो गई थी। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का दौर जारी है। मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से पिछले सप्ताह पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश हुई। बीच में कुछ दिन मौसम शांत रहा, लेकिन मंगलवार और बुधवार को फिर कई इलाकों में पानी गिरा। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी परिस्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी इसी तरह का बदलाव नजर आ रहा है। महीने की शुरुआत में जहां धूप और गर्मी का असर था, वहीं रातें ठंडी होने लगी हैं और कई जिलों में बारिश भी हो रही है।
यह भी पढ़ें-हरदीप पुरी के टिकट पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरा: उमंग सिंघार ने पूछा- आखिर मध्यप्रदेश की सीट ही क्यों चुनी?
इस बार सामान्य से चार प्रतिशत कम हुई बारिश
जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब चार प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
पूर्वी मध्य प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब चार प्रतिशत अधिक रही, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हुआ, जबकि 30 जिलों में कमी दर्ज की गई। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में यह कमी काफी अधिक रही। जून में कम बारिश और मानसून के बीच-बीच में कमजोर पड़ने के कारण पूरे सीजन का औसत प्रभावित हुआ। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश की स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। यही वजह है कि सितंबर के अंत तक मानसून की विदाई के बावजूद प्रदेश में बारिश का कुल आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।
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पूर्वी एमपी में ज्यादा असर, कई जिलों में भारी बारिश के आसार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के पूर्वी जिलों में बारिश की गतिविधियां तेज रह सकती हैं। मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में अति भारी बारिश की आशंका है। रीवा, सतना, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में भी भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर करीब चार इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड और श्योपुर सहित कई जिलों में हल्की बारिश, तेज हवा और गरज-चमक का असर रह सकता है। जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम बदलने के आसार हैं।
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इसके उलट नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, इंदौर, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है।
बुधवार को कई शहरों में हुई बारिश
बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाने के साथ बारिश दर्ज की गई। सतना, कटनी और छतरपुर सहित अलग-अलग जिलों में रुक-रुककर पानी गिरा। मझगवां और चित्रकूट क्षेत्र में बारिश का दौर जारी रहा, जबकि अनूपपुर जिला मुख्यालय में शाम को हल्की बारिश हुई। खजुराहो में भी शाम के समय ठंडी हवाओं के साथ बादल छाए और रिमझिम बारिश हुई। भोपाल में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। लगातार बदलते मौसम का असर खेती पर भी पड़ सकता है। कटनी में बारिश के कारण धान की फसल को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। खेतों में पककर तैयार फसलों के लिए इस समय बारिश की मात्रा और उसकी अवधि महत्वपूर्ण होगी।
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रात में बढ़ी ठंडक, दिन के तापमान में भी गिरावट
बारिश और बादलों के कारण प्रदेश के कुछ इलाकों में दिन का तापमान एक डिग्री तक नीचे आया है। वहीं, रात में ठंडक बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, शाजापुर के गिरवर में न्यूनतम तापमान 12.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पचमढ़ी में यह 15.2 डिग्री, धार में 15.4 डिग्री, आगर-मालवा में 15.9 डिग्री और नीमच के मरुखेड़ा व छतरपुर के नौगांव में 16 डिग्री सेल्सियस रहा। दूसरी ओर, खजुराहो, खंडवा, रतलाम, खरगोन और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 33.2 से 34.2 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। यानी प्रदेश में कहीं बारिश और ठंडी हवाओं का असर है, तो कहीं दिन में गर्मी अब भी बनी हुई है।
3 अक्टूबर को लौट चुका मानसून, फिर क्यों बरस रहे बादल?
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो गई थी। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का दौर जारी है। मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से पिछले सप्ताह पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश हुई। बीच में कुछ दिन मौसम शांत रहा, लेकिन मंगलवार और बुधवार को फिर कई इलाकों में पानी गिरा। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी परिस्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी इसी तरह का बदलाव नजर आ रहा है। महीने की शुरुआत में जहां धूप और गर्मी का असर था, वहीं रातें ठंडी होने लगी हैं और कई जिलों में बारिश भी हो रही है।
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इस बार सामान्य से चार प्रतिशत कम हुई बारिश
जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब चार प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।
पूर्वी मध्य प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब चार प्रतिशत अधिक रही, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि, पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हुआ, जबकि 30 जिलों में कमी दर्ज की गई। पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में यह कमी काफी अधिक रही। जून में कम बारिश और मानसून के बीच-बीच में कमजोर पड़ने के कारण पूरे सीजन का औसत प्रभावित हुआ। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश की स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। यही वजह है कि सितंबर के अंत तक मानसून की विदाई के बावजूद प्रदेश में बारिश का कुल आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।
