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देवास सहकारी समिति घोटाला: किसानों के नाम पर आठ करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी, कई अधिकारियों पर केस दर्ज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 13 Feb 2026 08:11 AM IST
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सार
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने देवास जिले की राजोदा प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्था और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों पर 8 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। जांच में किसानों के नाम पर फर्जी ऋण, बीमा क्लेम और खातों से अवैध निकासी का खुलासा हुआ है।
EOW जबलपुर
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विस्तार
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने देवास जिले की राजोदा प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्था और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के खिलाफ आठ करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 से 2019 के बीच किसानों की जानकारी के बिना उनकी पात्रता से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए और विभिन्न शासकीय योजनाओं का गलत लाभ उठाया गया। ईओडब्ल्यू उज्जैन इकाई द्वारा शिकायत की जांच में पाया गया कि किसानों की वास्तविक भूमि से करीब 400 हेक्टेयर अधिक भूमि दर्शाकर 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त ऋण मंजूर किया गया। इतना ही नहीं, बिना साख सीमा स्वीकृत किए तीन करोड़ रुपये से अधिक का ऋण भी बांटा गया।
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जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 300 किसानों की फसल का एक ही सीजन में एक से अधिक बार बीमा कराया गया। इससे 65 लाख रुपये से अधिक का बीमा क्लेम लिया गया। कई मामलों में किसानों के आवेदन पत्रों में आरोपियों के मोबाइल नंबर दर्ज पाए गए। समिति के तत्कालीन सचिव महेश जैन पर आरोप है कि उन्होंने किसानों के खातों से निकासी पर्चियों पर खुद हस्ताक्षर कर 1 करोड़ 12 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली। ऑडिट में समिति की कैशबुक में 20 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता भी पाई गई। इस मामले में महेश जैन (तत्कालीन सचिव), दिलीप नागर (तत्कालीन पर्यवेक्षक), अनिल दुबे (तत्कालीन शाखा प्रबंधक), रामकन्या बाई (अध्यक्ष) सहित अन्य के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 300 किसानों की फसल का एक ही सीजन में एक से अधिक बार बीमा कराया गया। इससे 65 लाख रुपये से अधिक का बीमा क्लेम लिया गया। कई मामलों में किसानों के आवेदन पत्रों में आरोपियों के मोबाइल नंबर दर्ज पाए गए। समिति के तत्कालीन सचिव महेश जैन पर आरोप है कि उन्होंने किसानों के खातों से निकासी पर्चियों पर खुद हस्ताक्षर कर 1 करोड़ 12 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली। ऑडिट में समिति की कैशबुक में 20 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता भी पाई गई। इस मामले में महेश जैन (तत्कालीन सचिव), दिलीप नागर (तत्कालीन पर्यवेक्षक), अनिल दुबे (तत्कालीन शाखा प्रबंधक), रामकन्या बाई (अध्यक्ष) सहित अन्य के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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