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Digital Arrest: तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा, 1.43 लाख ऐंठे; भोपाल में साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला उजागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: भोपाल ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 10:05 PM IST
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सार
भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक मजदूर को आतंकवाद से जुड़े होने का डर दिखाकर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। 1.43 लाख रुपये ठग लिए गए, जबकि पुलिस की सतर्कता से शेष रकम बचा ली गई।
पीड़ित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल के छोला मंदिर थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां शातिर ठगों ने एक 45 वर्षीय मजदूर को आतंकवादियों से संबंध होने का डर दिखाकर तीन दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और उससे डेढ़ लाख रुपये ऐंठ लिए। समय रहते पुलिस को सूचना मिल जाने से पीड़ित से ठगे जाने वाले शेष डेढ़ लाख रुपये बचा लिए गए।
छोला मंदिर थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी ने बताया कि पीड़ित राजकुमार, जो मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। उसके मोबाइल फोन पर अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि राजकुमार का नाम एक गंभीर आपराधिक और आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले में सामने आया है। गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी से घबराया राजकुमार ठगों के जाल में फंसता चला गया।
डर के कारण जालसाजों की बात सुनता चला गया
ठगों ने उसे लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में रखकर तीन दिनों तक मानसिक रूप से दबाव में रखा। इस दौरान उसे किसी से बात न करने और फोन बंद न करने की हिदायत दी गई, जिसे साइबर अपराध की भाषा में डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। डर और तनाव की हालत में राजकुमार ठगों के हर निर्देश का पालन करता रहा। तीन दिन बाद ठगों ने कथित मामले को सेटल करने की बात कही और इसके बदले तीन लाख रुपये की मांग की। पहली किस्त के रूप में राजकुमार ने 1 लाख 43 हजार रुपये एक बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ठगों ने बाकी रकम जल्द भेजने का दबाव बनाना शुरू किया। इसी दौरान पीड़ित को संदेह हुआ और उसने अपने परिवार को पूरी बात बताई।
पढ़ें: शहडोल दौरे पर सीएम मोहन यादव की सौगातों की बरसात, 2300 करोड़ की सोन माइक्रो सिंचाई परियोजना की घोषणा
परिवार की सूचना पर पुलिस ने कराया मुक्त
परिवार ने तत्काल छोला मंदिर थाने में इसकी सूचना दी। मामला समझते ही पुलिस हरकत में आई। थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पीड़ित को ठगों से संपर्क तोड़ने में मदद की। साथ ही पुलिस ने संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क कर पीड़ित के खाते से होने वाले ट्रांजेक्शन को तुरंत होल्ड करवा दिया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से ठगों द्वारा की जाने वाली आगे की ठगी रुक गई। थाना प्रभारी के अनुसार, ठगी की रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने की तैयारी चल रही थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई से करीब डेढ़ लाख रुपये और बचा लिए गए। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस या जांच एजेंसी बताकर डराने वालों पर भरोसा न करें और ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
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छोला मंदिर थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी ने बताया कि पीड़ित राजकुमार, जो मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। उसके मोबाइल फोन पर अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि राजकुमार का नाम एक गंभीर आपराधिक और आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले में सामने आया है। गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी से घबराया राजकुमार ठगों के जाल में फंसता चला गया।
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डर के कारण जालसाजों की बात सुनता चला गया
ठगों ने उसे लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में रखकर तीन दिनों तक मानसिक रूप से दबाव में रखा। इस दौरान उसे किसी से बात न करने और फोन बंद न करने की हिदायत दी गई, जिसे साइबर अपराध की भाषा में डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। डर और तनाव की हालत में राजकुमार ठगों के हर निर्देश का पालन करता रहा। तीन दिन बाद ठगों ने कथित मामले को सेटल करने की बात कही और इसके बदले तीन लाख रुपये की मांग की। पहली किस्त के रूप में राजकुमार ने 1 लाख 43 हजार रुपये एक बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद ठगों ने बाकी रकम जल्द भेजने का दबाव बनाना शुरू किया। इसी दौरान पीड़ित को संदेह हुआ और उसने अपने परिवार को पूरी बात बताई।
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परिवार की सूचना पर पुलिस ने कराया मुक्त
परिवार ने तत्काल छोला मंदिर थाने में इसकी सूचना दी। मामला समझते ही पुलिस हरकत में आई। थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पीड़ित को ठगों से संपर्क तोड़ने में मदद की। साथ ही पुलिस ने संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क कर पीड़ित के खाते से होने वाले ट्रांजेक्शन को तुरंत होल्ड करवा दिया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से ठगों द्वारा की जाने वाली आगे की ठगी रुक गई। थाना प्रभारी के अनुसार, ठगी की रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने की तैयारी चल रही थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई से करीब डेढ़ लाख रुपये और बचा लिए गए। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को पुलिस या जांच एजेंसी बताकर डराने वालों पर भरोसा न करें और ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
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