सोशल साइट एक्स और फोन से दूरी: अयोध्या पदयात्रा से पहले दिग्विजय सिंह का फैसला, धर्म यात्रा पर करेंगे फोकस
अयोध्या तक प्रस्तावित पदयात्रा से पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया और निजी मोबाइल से दूरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने अपना एक्स अकाउंट कार्यालय के जिम्मे और निजी मोबाइल नंबर अपने सचिव को सौंप दिया है। दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करेंगे।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अयोध्या पदयात्रा से पहले बड़ा फैसला लेते हुए सोशल मीडिया और निजी मोबाइल से दूरी बना ली है। उन्होंने अपना आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट कार्यालय के जिम्मे कर दिया है, जबकि निजी मोबाइल नंबर भी अपने सचिव सचिन वत्स को सौंप दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पदयात्रा के दौरान वे सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे और न ही किसी राजनीतिक मुद्दे पर प्रतिक्रिया देंगे। दिग्विजय सिंह का एक्स अकाउंट अब उनके व्यक्तिगत नाम की जगह ऑफिस ऑफ दिग्विजय सिंह के नाम से संचालित होगा। वहीं फेसबुक पर उन्होंने जानकारी दी कि अब उनके निजी मोबाइल नंबर का उपयोग सचिव सचिन वत्स करेंगे और जरूरी संदेशों से उन्हें अवगत कराते रहेंगे।
20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा
दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तक करीब एक हजार किलोमीटर की पदयात्रा शुरू करेंगे। पहले यह यात्रा 2 अक्टूबर से प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे विजयदशमी के दिन से शुरू करने का निर्णय लिया गया।
अब राजनीति नहीं, धर्म की बात करूंगा
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे 80 वर्ष के हो चुके हैं और पार्टी से कह चुके हैं कि अब नए लोगों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि अब वे केवल धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दों पर काम करेंगे। उन्होंने साफ किया कि यह पदयात्रा किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं होगी। यात्रा के दौरान वे राजनीतिक बयानबाजी से दूर रहेंगे और सोशल मीडिया पर भी किसी तरह की राजनीतिक टिप्पणी नहीं करेंगे।
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राम मंदिर चढ़ावे का हिसाब मांगेंगे
दिग्विजय सिंह का कहना है कि उन्होंने स्वयं राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का दान दिया था। उनका आरोप है कि मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और चढ़ावे के उपयोग को लेकर सवाल हैं। इसी मुद्दे पर वे कानूनी सलाह लेकर अयोध्या की अदालत में याचिका दायर करेंगे और चढ़ावे का पूरा हिसाब मांगेंगे।
