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भोपाल में 154 करोड़ के अंबेडकर फ्लाईओवर की खुली पोल: सालभर में ही उखड़ने लगी सड़क, डामर हटा तो बाहर निकले सरिए
Tue, 11 Aug 2026 05:23 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 11 Aug 2026 05:23 PM IST
सार
भोपाल के 154 करोड़ के अंबेडकर फ्लाईओवर की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। बारिश के बाद सड़क की डामर परत उखड़ी, कई जगह सरिए बाहर निकल आए। पुल पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, ऐसे में हादसे का खतरा बढ़ गया है। अब सवाल है कि करोड़ों की लागत से बने फ्लाईओवर की सड़क सालभर में ही क्यों उखड़ने लगी और जिम्मेदार एजेंसियों ने समय रहते इसकी मरम्मत या तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई?
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अंबेडकर फ्लाईओवर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए डॉ. अंबेडकर फ्लाईओवर की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार हो रही बारिश के बाद फ्लाईओवर की सड़क कई जगह से उखड़ गई है। डामर की परत हटने के बाद नीचे लगे सरिए तक दिखाई देने लगे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि जिस पुल पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं, वहां सड़क की यह हालत हादसे का खतरा बढ़ा रही है। करीब 154 करोड़ रुपए की लागत से तैयार डॉ. अंबेडकर फ्लाईओवर निर्माण के बाद से ही अलग-अलग कारणों से चर्चा में रहा है। लोकार्पण के बाद सीमेंट-कंक्रीट की सतह पर खुरदरापन और वाहन चलने के दौरान कंपन जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद कुछ हिस्सों में डामर उखड़ने की समस्या भी सामने आई। अब लगातार बारिश के बीच कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से सरिए बाहर नजर आने लगे हैं।
बारिश बनी बहाना या निर्माण में ही रह गई कमी?
फ्लाईओवर की मौजूदा स्थिति ने सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर खड़ा किया है। अगर करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए पुल की सड़क बारिश के शुरुआती दौर में ही जगह-जगह उखड़ने लगे और सरिए बाहर आने लगें, तो जिम्मेदार एजेंसियों की निगरानी और गुणवत्ता जांच पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सड़क की खराब स्थिति सामने आने के बाद कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया फ्लाईओवर पर पहुंचे। उन्होंने मौके का वीडियो जारी करते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सड़क की यह स्थिति भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की ओर इशारा करती है।
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शहर की दूसरी सड़कें भी बारिश में बेहाल
सिर्फ अंबेडकर फ्लाईओवर ही नहीं, बल्कि लगातार बारिश के बाद भोपाल की कई प्रमुख और आंतरिक सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई स्थानों पर डामर की परत उखड़ने से गड्ढे बन गए हैं। पानी भरने के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं दे रही, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ गया है।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश की दीप्ति गौड़ मुखर्जी बनीं देश की नई उच्च शिक्षा सचिव, जानिए क्यों है यह नियुक्ति खास
रोज गुजरते हैं हजारों वाहन, जिम्मेदारी किसकी?
अंबेडकर फ्लाईओवर राजधानी के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। इस पर रोजाना हजारों आम वाहन चालकों के साथ वीआईपी और अधिकारियों के वाहन भी गुजरते हैं। ऐसे में पुल की सड़क से सरिए बाहर निकलना सिर्फ निर्माण गुणवत्ता का सवाल नहीं, बल्कि वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला भी है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपए की लागत से बने इस फ्लाईओवर की सड़क इतनी जल्दी क्यों उखड़ रही है? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ था? बारिश से पहले पुल की तकनीकी जांच क्यों नहीं की गई? और सबसे अहम अगर सड़क की हालत पहले से खराब थी, तो समय रहते स्थायी सुधार क्यों नहीं कराया गया?
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बारिश बनी बहाना या निर्माण में ही रह गई कमी?
फ्लाईओवर की मौजूदा स्थिति ने सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर खड़ा किया है। अगर करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए पुल की सड़क बारिश के शुरुआती दौर में ही जगह-जगह उखड़ने लगे और सरिए बाहर आने लगें, तो जिम्मेदार एजेंसियों की निगरानी और गुणवत्ता जांच पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सड़क की खराब स्थिति सामने आने के बाद कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया फ्लाईओवर पर पहुंचे। उन्होंने मौके का वीडियो जारी करते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद सड़क की यह स्थिति भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की ओर इशारा करती है।
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शहर की दूसरी सड़कें भी बारिश में बेहाल
सिर्फ अंबेडकर फ्लाईओवर ही नहीं, बल्कि लगातार बारिश के बाद भोपाल की कई प्रमुख और आंतरिक सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई स्थानों पर डामर की परत उखड़ने से गड्ढे बन गए हैं। पानी भरने के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं दे रही, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ गया है।
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रोज गुजरते हैं हजारों वाहन, जिम्मेदारी किसकी?
अंबेडकर फ्लाईओवर राजधानी के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। इस पर रोजाना हजारों आम वाहन चालकों के साथ वीआईपी और अधिकारियों के वाहन भी गुजरते हैं। ऐसे में पुल की सड़क से सरिए बाहर निकलना सिर्फ निर्माण गुणवत्ता का सवाल नहीं, बल्कि वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला भी है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपए की लागत से बने इस फ्लाईओवर की सड़क इतनी जल्दी क्यों उखड़ रही है? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ था? बारिश से पहले पुल की तकनीकी जांच क्यों नहीं की गई? और सबसे अहम अगर सड़क की हालत पहले से खराब थी, तो समय रहते स्थायी सुधार क्यों नहीं कराया गया?
