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नर्सिंग छात्रों का गुस्सा फूटा: अधिकारियों पर स्याही फेंकी, बोले-नोट ले लो लेकिन परीक्षा कराओ,रिजल्ट जारी करो

Tue, 11 Aug 2026 07:33 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 11 Aug 2026 07:33 PM IST
सार

छह साल से नर्सिंग परीक्षा और परिणाम अटके होने से छात्रों का आक्रोश बढ़ गया। भोपाल में चौथे दिन प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों पर स्याही फेंकी गई। छात्रों ने लंबित परीक्षा-परिणाम, छात्रवृत्ति और पंजीयन की समस्या दूर करने के साथ कथित भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग की। समाधान नहीं होने पर 12 अगस्त से भूख हड़ताल और बाद में विधानसभा घेराव की चेतावनी दी गई।

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Nursing students' anger erupts: Ink thrown at officials; demands raised to hold exams and release results.
नर्सिंंग विद्यार्थियों का धरना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 नर्सिंग परीक्षा और परिणाम में देरी से परेशान छात्रों का गुस्सा मंगलवार को नर्सिंग काउंसिल भोपाल में फूट पड़ा। 6 साल से परीक्षा और परिणाम का इंतजार कर रहे छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों पर स्याही फेंक दी। छात्रों ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें अब आश्वासन नहीं, बल्कि परीक्षा और परिणाम चाहिए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यहां तक कहा कि नोट ले लो, लेकिन पेपर करवा दो और रिजल्ट जारी कर दो। एनएसओ छात्र संगठन का नर्सिंग काउंसिल भोपाल में चौथे दिन भी धरना जारी रहा। संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम चिकित्सा शिक्षा संचालक बीनू कुशवाहा को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा, लंबित परिणाम, पंजीयन और छात्रवृत्ति सहित कई मांगें रखीं।
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छह साल से अटका भविष्य, छात्रों में बढ़ता आक्रोश
संगठन का कहना है कि वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में प्रदेश के कई नर्सिंग कॉलेजों में छात्रों ने प्रवेश लिया था। बाद में इन कॉलेजों पर उच्च न्यायालय में फर्जीवाड़े से जुड़े मामले सामने आए और बड़ी संख्या में कॉलेज अपात्र घोषित किए गए। इसका सीधा असर उनमें पढ़ रहे छात्रों पर पड़ा। छात्रों का आरोप है कि छह-सात साल बीतने के बाद भी कई विद्यार्थियों की अंतिम वर्ष की परीक्षा नहीं हुई है और पुराने वर्षों के परिणाम भी लंबित हैं। इससे हजारों विद्यार्थियों की डिग्री और भविष्य अधर में है।
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छात्रवृत्ति भी छह साल से अटकी
छात्रों ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को करीब छह साल से छात्रवृत्ति नहीं मिली है। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति देने की मांग संगठन ने की है। संगठन के संस्थापक गोपाल पाराशर ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा संचालक ने उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और जल्द उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लेकिन संगठन का कहना है कि जब तक छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों की प्रमुख मांगों में सभी लंबित परिणाम जारी करना, आगामी परीक्षाएं कराना, पंजीयन और छात्रवृत्ति की समस्या दूर करना तथा नर्सिंग शिक्षा में कथित भ्रष्टाचार खत्म करना शामिल है।
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फर्जी निरीक्षण और मान्यता देने वालों पर कार्रवाई की मांग
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर नर्सिंग कॉलेजों के कथित फर्जी निरीक्षण और मान्यता देने के आरोप हैं, उनके खिलाफ अब तक एफआईआर और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की मांग भी की है, ताकि कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता और व्यवस्था की निगरानी हो सके।

नर्सिंग कॉलेजों को फिर जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी से जोड़ने की मांग
छात्र संगठन ने नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों से हटाकर फिर मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर से जोड़ने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी है और क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों के बजाय मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़ने पर विद्यार्थियों की डिग्री को बेहतर मान्यता मिलेगी।


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कल से भूख हड़ताल, विधानसभा घेराव की चेतावनी
एनएसओ छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो 12 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो विधानसभा का घेराव करने की चेतावनी दी गई है। संगठन ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।


 
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