{"_id":"6a7fc54993d7c03aaf06babd","slug":"independence-day-2026-even-after-the-country-had-gained-independence-the-village-of-boras-in-the-princely-st-2026-08-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Independence Day 2026: जब देश आजाद हो चुका था, तब तिरंगे के लिए लड़ रहा था भोपाल रियासत का बोरास गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Independence Day 2026: जब देश आजाद हो चुका था, तब तिरंगे के लिए लड़ रहा था भोपाल रियासत का बोरास गांव
Sat, 15 Aug 2026 07:18 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 15 Aug 2026 07:18 AM IST
सार
15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया था, लेकिन भोपाल रियासत भारतीय संघ का हिस्सा नहीं बनी थी। ऐसे समय में भोपाल के पास स्थित एक छोटे से गांव बोरास में तिरंगा फहराने को लेकर हुआ संघर्ष इतिहास का अहम अध्याय बन गया।
विज्ञापन
बोरास गांव स्थित शहीद स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आजादी की कहानी सिर्फ 15 अगस्त 1947 तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों में आजादी के बाद भी लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और भारतीय संघ में शामिल होने के लिए आंदोलन जारी रहे। भोपाल रियासत के बोरास गांव की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष की याद दिलाती है। भोपाल रियासत उस समय भारतीय संघ में शामिल नहीं हुई थी। रियासत के कई हिस्सों में इसे भारत में मिलाने की मांग उठ रही थी। इसी दौरान नर्मदा किनारे स्थित बोरास गांव आंदोलन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा।
ये भी पढ़ें- Independence Day Special: भोपाल की आजादी की अनकही कहानी, 15 अगस्त के बाद भी 2 साल चला तिरंगे और विलय का संघर्ष
भोपाल रियासत की अलग थी स्थिति
15 अगस्त 1947 को जब देश स्वतंत्र हुआ, तब भोपाल रियासत की स्थिति अन्य रियासतों से अलग थी। भोपाल, रायसेन और सीहोर सहित कई क्षेत्र इस रियासत का हिस्सा थे। उस समय रियासत के भविष्य को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक परिस्थितियां बनी हुई थीं। इसी वजह से भोपाल में भारतीय संघ में शामिल होने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसके समर्थन में अभियान चलाया। रायसेन जिले की उदयपुरा तहसील के बोरास गांव में नर्मदा किनारे तिरंगा फहराने का कार्यक्रम तय हुआ। यह सिर्फ झंडा फहराने का नहीं, बल्कि भारत में भोपाल के विलय की घोषणा का प्रतीक बनने वाला था। 14 जनवरी 1949 को जैसे ही तिरंगा फहराने की तैयारी हुई, इसकी जानकारी नवाब हमीदुल्लाह खां को लग गई। उन्होंने तत्कालीन थानेदार जफर अली को भेजा, जहां नवाब शासन की पुलिस ने बिना बताए युवाओं पर फायरिंग शुरू कर दी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- MP News: स्वतंत्रता दिवस पर सीएम का युवाओं पर फोकस, रोजगार और शिक्षा को लेकर हो सकते हैं बड़े ऐलान
चार शहादतों के बाद बदला माहौल
इस गोलीबारी में चार युवाओं ने मौके पर ही प्राण त्याग दिए। इन शहीद होने वालों में 25 वर्ष के धनसिंह, 30 वर्ष के मंगल सिंह, 25 वर्ष के विशाल सिंह और 16 वर्षीय किशोर छोटेलाल शामिल थे। उनकी शहादत ने पूरे प्रदेश में आंदोलन को तेज कर दिया। यह घटना भोपाल के विलय के लिए निर्णायक मोड़ बनी। बोरास की घटना ने देशभर में हलचल मचा दी। देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने गुस्से में केंद्र के सचिव वीपी मेनन को भोपाल भेजा और 1 जून 1949 को भोपाल का भारत में विलय सुनिश्चित कराया। इसके बाद यहां पहली बार तिरंगा लहराया गया।
ये भी पढ़ें- MP News: रोशनी से जगमगाया भोपाल, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रंग-बिरंगी रोशनी में नहाए सरकारी भवन
आज भी जिंदा है शहादत की याद
बोरास गांव में आज भी शहीदों की याद को संजोकर रखा गया है। नर्मदा किनारे बने स्मारक पर हर वर्ष लोगों की भीड़ जुटती है। मकर संक्रांति के अवसर पर यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं और शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह गांव आज भी इस बात का प्रमाण है कि आजादी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष और बलिदान की कहानी है। बोरास की शहादत यह भी बताती है कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, सम्मान और असंख्य बलिदानों का प्रतीक है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Independence Day Special: भोपाल की आजादी की अनकही कहानी, 15 अगस्त के बाद भी 2 साल चला तिरंगे और विलय का संघर्ष
विज्ञापन
भोपाल रियासत की अलग थी स्थिति
15 अगस्त 1947 को जब देश स्वतंत्र हुआ, तब भोपाल रियासत की स्थिति अन्य रियासतों से अलग थी। भोपाल, रायसेन और सीहोर सहित कई क्षेत्र इस रियासत का हिस्सा थे। उस समय रियासत के भविष्य को लेकर अलग-अलग तरह की राजनीतिक परिस्थितियां बनी हुई थीं। इसी वजह से भोपाल में भारतीय संघ में शामिल होने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसके समर्थन में अभियान चलाया। रायसेन जिले की उदयपुरा तहसील के बोरास गांव में नर्मदा किनारे तिरंगा फहराने का कार्यक्रम तय हुआ। यह सिर्फ झंडा फहराने का नहीं, बल्कि भारत में भोपाल के विलय की घोषणा का प्रतीक बनने वाला था। 14 जनवरी 1949 को जैसे ही तिरंगा फहराने की तैयारी हुई, इसकी जानकारी नवाब हमीदुल्लाह खां को लग गई। उन्होंने तत्कालीन थानेदार जफर अली को भेजा, जहां नवाब शासन की पुलिस ने बिना बताए युवाओं पर फायरिंग शुरू कर दी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- MP News: स्वतंत्रता दिवस पर सीएम का युवाओं पर फोकस, रोजगार और शिक्षा को लेकर हो सकते हैं बड़े ऐलान
चार शहादतों के बाद बदला माहौल
इस गोलीबारी में चार युवाओं ने मौके पर ही प्राण त्याग दिए। इन शहीद होने वालों में 25 वर्ष के धनसिंह, 30 वर्ष के मंगल सिंह, 25 वर्ष के विशाल सिंह और 16 वर्षीय किशोर छोटेलाल शामिल थे। उनकी शहादत ने पूरे प्रदेश में आंदोलन को तेज कर दिया। यह घटना भोपाल के विलय के लिए निर्णायक मोड़ बनी। बोरास की घटना ने देशभर में हलचल मचा दी। देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने गुस्से में केंद्र के सचिव वीपी मेनन को भोपाल भेजा और 1 जून 1949 को भोपाल का भारत में विलय सुनिश्चित कराया। इसके बाद यहां पहली बार तिरंगा लहराया गया।
ये भी पढ़ें- MP News: रोशनी से जगमगाया भोपाल, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रंग-बिरंगी रोशनी में नहाए सरकारी भवन
आज भी जिंदा है शहादत की याद
बोरास गांव में आज भी शहीदों की याद को संजोकर रखा गया है। नर्मदा किनारे बने स्मारक पर हर वर्ष लोगों की भीड़ जुटती है। मकर संक्रांति के अवसर पर यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं और शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह गांव आज भी इस बात का प्रमाण है कि आजादी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष और बलिदान की कहानी है। बोरास की शहादत यह भी बताती है कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, सम्मान और असंख्य बलिदानों का प्रतीक है।
