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लाइफस्टाइल बढ़ा रही बांझपन: भोपाल में होम्योपैथिक इलाज से गूंज रही किलकारी,महंगे IVF और निजी अस्पतालों से राहत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 14 May 2026 07:05 PM IST
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सार
भोपाल में बदलती लाइफस्टाइल और तनाव के कारण बांझपन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल की होम्योपैथिक विंग में अब कई दंपत्तियों को होम्योपैथिक इलाज से राहत मिल रही है। होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर के मुताबिक जंक फूड, मोटापा, तनाव, पीसीओएस, धूम्रपान और खराब दिनचर्या महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है।
होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रीति तैलंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तेजी से बदलती लाइफस्टाइल, भागदौड़ भरी जिंदगी और मानसिक तनाव अब लोगों की पारिवारिक खुशियों पर भी असर डाल रहे हैं। राजधानी भोपाल में बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। खासकर युवा दंपत्तियों में गर्भधारण की समस्या तेजी से सामने आ रही है। ऐसे में राजधानी भोपाल के जिला अस्पताल की होम्योपैथिक विंग में होम्योपैथी पद्धति से सूनी गोद भरने का काम शुरू किया है। कई ऐसे केस सॉल्व किए हैं जिन्हें एलोपैथ में भी सफलता नहीं मिली थी। ऐसे में अब कई लोग महंगे आईवीएफ सेंटर और निजी अस्पतालों की बजाय होम्योपैथिक इलाज का सहारा ले रहे हैं। भोपाल जिला अस्पताल की होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रीति तैलंग का कहना है कि गलत खानपान, जंक फूड, मोटापा, तनाव और खराब दिनचर्या महिलाओं और पुरुषों दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही है। महिलाओं में पीसीओएस की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे मासिक धर्म अनियमित हो जाते हैं और गर्भधारण में परेशानी आती है।
पुरुषों में भी बढ़ रही समस्या
डॉ. तैलंग के मुताबिक सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी तेजी से इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं। धूम्रपान, शराब सेवन, देर रात तक जागना, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग और शरीर में विटामिन डी व बी-12 की कमी पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि कई दंपत्ति वर्षों तक निजी अस्पतालों और महंगे आईवीएफ उपचार में लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी निराश हो जाते हैं। ऐसे कई मामलों में होम्योपैथिक इलाज से सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
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मरीज की पूरी स्थिति देखकर होता है इलाज
डॉ. तैलंग ने बताया कि होम्योपैथी में केवल बीमारी नहीं, बल्कि मरीज की मानसिक स्थिति, तनाव, शारीरिक लक्षण और बीमारी की जड़ को समझकर इलाज किया जाता है। केस हिस्ट्री के आधार पर पल्सेटिला, सीपिया और कैलकेरिया कार्ब जैसी दवाइयों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे दंपत्तियों को भी संतान सुख मिला, जिनके आईवीएफ प्रयास असफल हो चुके थे। एक मामले में तो संतान न होने के कारण पति-पत्नी की पिछली शादियां टूट चुकी थीं, लेकिन नियमित होम्योपैथिक उपचार के 6 से 8 महीने बाद उन्हें सफलता मिली।
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सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज से राहत
डॉ. तैलंग ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में होम्योपैथिक जांच और दवाइयां नि:शुल्क उपलब्ध हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को काफी राहत मिल रही है। उन्होंने लोगों से तनाव कम करने, नियमित दवा लेने और जीवनशैली सुधारने की अपील की है।
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पुरुषों में भी बढ़ रही समस्या
डॉ. तैलंग के मुताबिक सिर्फ महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी तेजी से इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं। धूम्रपान, शराब सेवन, देर रात तक जागना, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग और शरीर में विटामिन डी व बी-12 की कमी पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि कई दंपत्ति वर्षों तक निजी अस्पतालों और महंगे आईवीएफ उपचार में लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी निराश हो जाते हैं। ऐसे कई मामलों में होम्योपैथिक इलाज से सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
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मरीज की पूरी स्थिति देखकर होता है इलाज
डॉ. तैलंग ने बताया कि होम्योपैथी में केवल बीमारी नहीं, बल्कि मरीज की मानसिक स्थिति, तनाव, शारीरिक लक्षण और बीमारी की जड़ को समझकर इलाज किया जाता है। केस हिस्ट्री के आधार पर पल्सेटिला, सीपिया और कैलकेरिया कार्ब जैसी दवाइयों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे दंपत्तियों को भी संतान सुख मिला, जिनके आईवीएफ प्रयास असफल हो चुके थे। एक मामले में तो संतान न होने के कारण पति-पत्नी की पिछली शादियां टूट चुकी थीं, लेकिन नियमित होम्योपैथिक उपचार के 6 से 8 महीने बाद उन्हें सफलता मिली।
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सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज से राहत
डॉ. तैलंग ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में होम्योपैथिक जांच और दवाइयां नि:शुल्क उपलब्ध हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को काफी राहत मिल रही है। उन्होंने लोगों से तनाव कम करने, नियमित दवा लेने और जीवनशैली सुधारने की अपील की है।

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