सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Major Blow to Teachers: Passing Eligibility Test Becomes Mandatory; Supreme Court Grants Only a One-Year Exten

शिक्षकों को बड़ा झटका: पात्रता परीक्षा पास करना होगा अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई सिर्फ एक साल की मोहलत

न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 29 May 2026 08:05 PM IST
विज्ञापन
सार

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश समेत देशभर के कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी है। डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा पास करनी होगी। अदालत ने बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता बताते हुए सभी समीक्षा याचिकाएं खारिज कर दीं।

Major Blow to Teachers: Passing Eligibility Test Becomes Mandatory; Supreme Court Grants Only a One-Year Exten
डीपीआई - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

मध्यप्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों को अब शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी ही होगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को समीक्षा याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए शिक्षकों का पात्रता परीक्षा पास होना आवश्यक है और इसमें किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में कार्यरत ऐसे शिक्षकों पर भी लागू होगा जिन्हें अब तक पात्रता परीक्षा से छूट मिली हुई थी। न्यायालय ने माना कि शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता और विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है।


एक साल की अतिरिक्त राहत, अब 2028 तक मौका
हालांकि शिक्षकों को राहत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने पात्रता परीक्षा पास करने की समय-सीमा बढ़ा दी है। पहले यह अवधि दो वर्ष तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया गया है। इसके अनुसार शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


बच्चों की शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया है, लेकिन बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता को सबसे ऊपर रखा गया है। इसी वजह से सीमित राहत दी गई है, लेकिन पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता बरकरार रहेगी।
विज्ञापन
Trending Videos


साल में दो बार होगी परीक्षा
न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित की जाए, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकें। साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि भविष्य में समय-सीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।

यह भी पढ़ें-नौतपा का बदला मिजाज, दिन में आग उगल रहा सूरज, शाम में गिरे ओले; तपिश के बीच मिली राहत

पुराना फैसला बरकरार
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश को कायम रखते हुए कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा केवल नौकरी की औपचारिक शर्त नहीं है, बल्कि यह बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की संवैधानिक आवश्यकता है।

यह भी पढ़ें-भोपाल की रैंकिंग बचाने की जंग, अब बैरसिया और आदमपुर बने सबसे बड़े इम्तिहान

फैसले से शिक्षक संगठनों में नाराजगी
फैसले के बाद शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्त लागू करना उचित नहीं है। कई संगठनों ने फैसले का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed