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शिक्षकों को बड़ा झटका: पात्रता परीक्षा पास करना होगा अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई सिर्फ एक साल की मोहलत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Fri, 29 May 2026 08:05 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश समेत देशभर के कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी है। डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा पास करनी होगी। अदालत ने बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता बताते हुए सभी समीक्षा याचिकाएं खारिज कर दीं।
डीपीआई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों को अब शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी ही होगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को समीक्षा याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए शिक्षकों का पात्रता परीक्षा पास होना आवश्यक है और इसमें किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में कार्यरत ऐसे शिक्षकों पर भी लागू होगा जिन्हें अब तक पात्रता परीक्षा से छूट मिली हुई थी। न्यायालय ने माना कि शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता और विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है।
एक साल की अतिरिक्त राहत, अब 2028 तक मौका
हालांकि शिक्षकों को राहत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने पात्रता परीक्षा पास करने की समय-सीमा बढ़ा दी है। पहले यह अवधि दो वर्ष तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया गया है। इसके अनुसार शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
बच्चों की शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया है, लेकिन बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता को सबसे ऊपर रखा गया है। इसी वजह से सीमित राहत दी गई है, लेकिन पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता बरकरार रहेगी।
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साल में दो बार होगी परीक्षा
न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित की जाए, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकें। साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि भविष्य में समय-सीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
यह भी पढ़ें-नौतपा का बदला मिजाज, दिन में आग उगल रहा सूरज, शाम में गिरे ओले; तपिश के बीच मिली राहत
पुराना फैसला बरकरार
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश को कायम रखते हुए कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा केवल नौकरी की औपचारिक शर्त नहीं है, बल्कि यह बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की संवैधानिक आवश्यकता है।
यह भी पढ़ें-भोपाल की रैंकिंग बचाने की जंग, अब बैरसिया और आदमपुर बने सबसे बड़े इम्तिहान
फैसले से शिक्षक संगठनों में नाराजगी
फैसले के बाद शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्त लागू करना उचित नहीं है। कई संगठनों ने फैसले का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।
एक साल की अतिरिक्त राहत, अब 2028 तक मौका
हालांकि शिक्षकों को राहत देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने पात्रता परीक्षा पास करने की समय-सीमा बढ़ा दी है। पहले यह अवधि दो वर्ष तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया गया है। इसके अनुसार शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।
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बच्चों की शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया है, लेकिन बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता को सबसे ऊपर रखा गया है। इसी वजह से सीमित राहत दी गई है, लेकिन पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता बरकरार रहेगी।
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न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षक पात्रता परीक्षा वर्ष में कम से कम दो बार आयोजित की जाए, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकें। साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि भविष्य में समय-सीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
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