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35 साल का इंतजार खत्म: भोपाल में 20 करोड़ की जमीन से हटा अवैध कब्जा, बुजुर्ग महिला को मिला हक
Wed, 19 Aug 2026 02:42 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Wed, 19 Aug 2026 02:42 PM IST
सार
भोपाल के निशातपुरा में 35 साल पुराने भूमि विवाद का प्रशासन ने समाधान करते हुए करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। प्रशासन के अनुसार, 65 वर्षीय उपासना जौहरी लंबे समय से अपनी जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही थीं।
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जटिल भूमि विवाद का मामला सुलझा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
भोपाल में तीन दशक से अधिक समय से चले आ रहे जटिल भूमि विवाद में जिलाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने सख्त रुख अपनाते हुए 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को न्याय दिलाया है। जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए निशातपुरा में लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य की कीमती जमीन को अवैध कब्जों से पूरी तरह मुक्त कराया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस बेशकीमती भूमि पर कुछ लोगों ने बिना किसी अनुमति के कई पक्के मकानों का निर्माण कर लिया था। प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए इन अवैध ढांचों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
35 साल बाद पीड़िता को मिला न्याय
जिला प्रशासन के अनुसार, पीड़ित महिला उपासना जौहरी 35 वर्षों से अपनी मालिकाना हक वाली भूमि को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही थीं। महिला ने प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व अदालत के समक्ष लगातार याचिकाएं दाखिल की थीं। हाल ही में जिलाधिकारी ने इस पुराने मामले की फाइल खोलकर दस्तावेजों की नए सिरे से समीक्षा करने का आदेश दिया। राजस्व विभाग की जांच टीम ने सभी दस्तावेजों का सूक्ष्म निरीक्षण किया और पाया कि महिला का दावा प्रामाणिक और कानूनी रूप से सही है। इसके बाद जिलाधिकारी ने बिना किसी देरी के बेदखली की कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए।
अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर
जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने निशातपुरा पहुंचकर इस बड़ी बेदखली कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच अवैध मकानों को गिराने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 20 करोड़ रुपये की इस संपत्ति पर अवैध रूप से बने पक्के मकानों को बुलडोजर के जरिए पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो गई।
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ये भी पढ़ें- अधिकारी भी हैरान: कलेक्ट्रेट में डॉगी मास्क पहनकर पहुंचा युवक, खंडवा नगर निगम पर बधियाकरण में घोटाले का आरोप
प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई
प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि जमीन पर काबिज लोगों को पूर्व में भी नोटिस जारी किए गए थे और उन्हें अपने पक्ष में वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। हालांकि, काबिज लोग कोई भी प्रामाणिक दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह विफल रहे। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन स्पष्ट रूप से पीड़ित महिला के नाम दर्ज पाई गई। अधिकारियों ने नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अवैध कब्जा हटाने की यह बड़ी कार्रवाई की। जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद अधिकारियों ने स्थल पर ही इसे महिला के सुपुर्द कर दिया। इसके साथ ही उनका 35 वर्षों से चला आ रहा लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया।
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35 साल बाद पीड़िता को मिला न्याय
जिला प्रशासन के अनुसार, पीड़ित महिला उपासना जौहरी 35 वर्षों से अपनी मालिकाना हक वाली भूमि को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही थीं। महिला ने प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व अदालत के समक्ष लगातार याचिकाएं दाखिल की थीं। हाल ही में जिलाधिकारी ने इस पुराने मामले की फाइल खोलकर दस्तावेजों की नए सिरे से समीक्षा करने का आदेश दिया। राजस्व विभाग की जांच टीम ने सभी दस्तावेजों का सूक्ष्म निरीक्षण किया और पाया कि महिला का दावा प्रामाणिक और कानूनी रूप से सही है। इसके बाद जिलाधिकारी ने बिना किसी देरी के बेदखली की कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए।
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अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर
जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने निशातपुरा पहुंचकर इस बड़ी बेदखली कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच अवैध मकानों को गिराने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि लगभग 20 करोड़ रुपये की इस संपत्ति पर अवैध रूप से बने पक्के मकानों को बुलडोजर के जरिए पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो गई।
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प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई
प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि जमीन पर काबिज लोगों को पूर्व में भी नोटिस जारी किए गए थे और उन्हें अपने पक्ष में वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था। हालांकि, काबिज लोग कोई भी प्रामाणिक दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह विफल रहे। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन स्पष्ट रूप से पीड़ित महिला के नाम दर्ज पाई गई। अधिकारियों ने नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अवैध कब्जा हटाने की यह बड़ी कार्रवाई की। जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद अधिकारियों ने स्थल पर ही इसे महिला के सुपुर्द कर दिया। इसके साथ ही उनका 35 वर्षों से चला आ रहा लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया।
