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MP Assembly Session: इस्तीफे पर कटारे ने तोड़ी चुप्पी, बोले- एक सोचा-समझा कदम, कुर्सी छोड़ी है संघर्ष नहीं

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Mon, 23 Feb 2026 05:03 PM IST
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सार

उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने इस्तीफे पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि उनका फैसला किसी दबाव या नाराजगी का परिणाम नहीं है। उन्होंने बताया कि सदन में गंभीर मुद्दों पर चर्चा न होने से वे असंतुष्ट थे, इसलिए यह कदम उठाया। भाजपा में जाने की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने साफ किया कि वे कांग्रेस के साथ हैं और पद छोड़ने के बाद भी जनता के मुद्दों पर पहले से ज्यादा मजबूती से आवाज उठाते रहेंगे।

MP Assembly Session: Katare breaks silence on resignation, says- a well-thought-out step, leaving the chair is
उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के बीच उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा देने वाले अटर विधायक हेमंत कटारे ने अपने फैसले पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ किया कि पद छोड़ना उनकी मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा कदम है। उनका कहना है कि सदन में जिन गंभीर मुद्दों पर वे तैयारी के साथ आते थे, उन्हें चर्चा का मौका नहीं मिलता था। कटारे ने कहा कि भोपाल के गोंडमाल प्रकरण से लेकर भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों तक, वे तथ्यों के साथ सवाल उठाते रहे, लेकिन ठोस बहस नहीं हो सकी। उनके मुताबिक, सरकार बहस से कतराती दिखती है। यही कारण रहा कि उन्होंने अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखने के लिए अलग रास्ता चुना।
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आवाज और बुलंद होगी
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्तीफा किसी नाराजगी या दबाव का परिणाम नहीं है। उनका पत्र सीधे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजा गया, क्योंकि निर्णय लेने का अधिकार वहीं है। उन्होंने कहा, मैंने कुर्सी छोड़ी है, संघर्ष नहीं। अब मेरी आवाज पहले से ज्यादा तेज और साफ होगी।

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निजी कारण भी बने वजह
कटारे ने यह भी स्वीकार किया कि निजी जीवन और क्षेत्र को पर्याप्त समय न दे पाने का दबाव भी था। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि को जनता और परिवार दोनों के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

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भाजपा में जाने की अटकलों पर जवाब
भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि वे बचपन से कांग्रेस के सिपाही हैं और भाजपा की नीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे। अपने अंदाज में उन्होंने कहा, हम चंबल की मिट्टी से हैं, मुकाबला करना जानते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे बदले की राजनीति नहीं करते, लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सवाल पहले से ज्यादा मजबूती से उठाएंगे। , हेमंत कटारे ने संकेत दे दिए हैं कि पद भले ही छोड़ दिया हो, लेकिन विपक्ष की राजनीति में उनकी सक्रियता और आक्रामकता कम नहीं होगी।


 
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