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MP विस:आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन समेत 6 विधेयक पारित,स्वास्थ्य, शिक्षा,पंचायत व्यवस्था में होंगे बदलाव
Wed, 22 Jul 2026 11:11 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 22 Jul 2026 11:11 PM IST
सार
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा के बाद छह महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। इनमें स्वास्थ्य शिक्षा, निजी विश्वविद्यालय, पंचायत व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और जीएसटी से जुड़े संशोधन शामिल हैं।
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मध्य प्रदेश विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 समेत छह महत्वपूर्ण विधेयक चर्चा के बाद पारित हो गए। सरकार ने इन विधेयकों को प्रदेश में स्वास्थ्य शिक्षा, उच्च शिक्षा, पंचायत व्यवस्था, कर प्रणाली और कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम बताया।
आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय व्यवस्था होगी और मजबूत
आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2003 में प्रदेश में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 33 हो गए हैं। इसी तरह एमबीबीएस सीटें 760 से बढ़कर 5,550 और पीजी सीटें 140 से बढ़कर 2,862 हो गई हैं। सरकार का लक्ष्य भविष्य में एमबीबीएस सीटों को 10 हजार और पीजी सीटों को 5 हजार तक पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों और विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा रहा है। संशोधन के तहत विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति के स्थान पर कुलगुरु और प्रति कुलगुरु पदनाम अपनाए जाएंगे। साथ ही कुलगुरु चयन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ इस पद के लिए पात्र होंगे।
ये भी पढ़ें- MP News: मध्य प्रदेश को मिले नए मुख्य सचिव, 1991 बैच के IAS अशोक बर्णवाल संभालेंगे प्रशासनिक कमान
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इन विधेयकों को भी मिली मंजूरी
मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026
इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबी बहस हुई। सरकार ने निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए 25 एकड़ भूमि और 5 करोड़ रुपये की एंडोमेंट फंड (एफडी) की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य पर चिंता जताई। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि संशोधन के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
ये भी पढ़ें- MP विधानसभा: 'कीड़ा' टिप्पणी पर घमासान, रिकॉर्ड देखने के बाद स्पीकर बोले- विजयवर्गीय ने यह शब्द नहीं कहा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक-2026
सदन ने इस विधेयक को भी पारित किया। इसमें कुछ मामलों में न्यायालय की निगरानी में समझौते समेत अन्य अन्य मामलों कुछ प्रावधान जोड़े गए जो बीएनएस में शामिल नहीं थे।
ये भी पढ़ें- MP: भोपाल का अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनेगा विश्वस्तरीय,मंत्री सारंग ने दिए काम तेज करने के निर्देश
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक-2026
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाना है। सरकार पहले उन गांवों में पंचायत भवन और सामुदायिक भवन बनाएगी, जहां ये सुविधाएं अभी उपलब्ध नहीं हैं।
ये भी पढ़ें- MP News: कर्मचारियों के मूल दस्तावेज नहीं रख सकेंगे नियोक्ता, 'राइट टू डिस्कनेक्ट' का अधिकार मिलेगा
मध्य प्रदेश माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संशोधन विधेयक-2026
यह विधेयक भी सदन से पारित हो गया। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी कानून में किए गए बदलावों के अनुरूप राज्य के कानून को अद्यतन करना है।
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मध्य प्रदेश निरसन विधेयक-2026
इस विधेयक के माध्यम से ऐसे पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया जाएगा, जिनका अब कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं रह गया है।
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आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय व्यवस्था होगी और मजबूत
आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2003 में प्रदेश में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 33 हो गए हैं। इसी तरह एमबीबीएस सीटें 760 से बढ़कर 5,550 और पीजी सीटें 140 से बढ़कर 2,862 हो गई हैं। सरकार का लक्ष्य भविष्य में एमबीबीएस सीटों को 10 हजार और पीजी सीटों को 5 हजार तक पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों और विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा रहा है। संशोधन के तहत विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति के स्थान पर कुलगुरु और प्रति कुलगुरु पदनाम अपनाए जाएंगे। साथ ही कुलगुरु चयन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ इस पद के लिए पात्र होंगे।
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मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक-2026
इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबी बहस हुई। सरकार ने निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए 25 एकड़ भूमि और 5 करोड़ रुपये की एंडोमेंट फंड (एफडी) की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य पर चिंता जताई। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि संशोधन के बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
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यह विधेयक भी सदन से पारित हो गया। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी कानून में किए गए बदलावों के अनुरूप राज्य के कानून को अद्यतन करना है।
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इस विधेयक के माध्यम से ऐसे पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया जाएगा, जिनका अब कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं रह गया है।
