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MP Board 5th 8th Result: 5वीं-8वीं रिजल्ट में नरसिंहपुर अव्वल,सतना-दमोह फिसड्डी,टॉप-बॉटम जिलों में 15% तक अंतर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 25 Mar 2026 07:37 PM IST
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सार
एमपी में 5वीं-8वीं बोर्ड रिजल्ट में नरसिंहपुर टॉप पर रहा, जबकि सतना और दमोह सबसे कमजोर जिले रहे। 5वीं में सरकारी और 8वीं में निजी स्कूल आगे रहे। कुल परिणाम बेहतर रहा, लेकिन जिलों के बीच बड़ा अंतर दिखा और भोपाल-इंदौर भी टॉप-10 से बाहर रहे।
रिजल्ट की जानकारी देते स्कूल शिक्षा मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा घोषित कक्षा 5वीं और 8वीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों ने इस बार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। जहां एक ओर नरसिंहपुर ने दोनों ही कक्षाओं में अव्वल रहकर बाज़ी मारी, वहीं सतना और दमोह जैसे जिले सबसे कमजोर साबित हुए। कुल परिणाम 2025 की तुलना में बेहतर रहा, लेकिन जिलों, वर्गों और क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर चिंता का विषय बनकर सामने आया है। मंत्रालय स्थित स्कूल शिक्षा विभाग से स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने दोपहर करीब 1 बजे सिंगल क्लिक के माध्यम से परिणाम जारी किए।
दोनों कक्षाओं में नरसिंहपुर नंबर-1
कक्षा 5वीं में नरसिंहपुर ने 99.70% के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि 8वीं में भी जिले ने 99.38% परिणाम के साथ शीर्ष स्थान बरकरार रखा। यह प्रदर्शन प्रदेश में सबसे बेहतर रहा। कक्षा 5वीं में दमोह 87.12% के साथ सबसे नीचे रहा जबकि जबलपुर 87.79%, सतना 89.35% भी निचे रहे। वहीं कक्षा 8वीं में सतना 83.79% के साथ सबसे कमजोर रहा दमोह 85.16%, जबलपुर 87.09% इसके अलावा सिवनी (88.45%), विदिशा (89.16%) और ग्वालियर (90.39%) भी निचले पायदान पर रहे। टॉप और बॉटम जिलों के बीच 6% से 15% तक का भारी अंतर सामने आया, जो शिक्षा की गुणवत्ता में असमानता को दर्शाता है।
5वीं में सरकारी स्कूलों का दबदबा
कक्षा 5वीं में कुल 12,76,404 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें से 12,14,344 पास हुए। कुल परिणाम 95.14% रहा।सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 95.40% रहा, जबकि निजी स्कूल 94.79% पर रहे। कक्षा 8वीं में कुल 10,92,580 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें से 10,25,157 पास हुए। कुल परिणाम 93.83% दर्ज किया गया। निजी स्कूलों ने 95.20% के साथ बढ़त बनाई, जबकि सरकारी स्कूल 93.03% पर रहे।
बड़े शहरों की चमक फीकी
राजधानी भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहर भी इस बार खास प्रदर्शन नहीं कर सके। इंदौर 5वीं में 26वें स्थान पर रहा, जबकि भोपाल 34वें स्थान पर पहुंच गया। दोनों ही शहर 5वीं और 8वीं में टॉप-10 से बाहर रहे, जो चौंकाने वाला है।
ग्रामीण छात्रों का दबदबा कायम
पास हुए कुल 23,68,984 विद्यार्थियों में से 16,78,567 ग्रामीण, 6,90,417 शहरी रहे। परिणामों में ग्रामीण छात्रों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जो बदलते शैक्षणिक ट्रेंड को दर्शाता है।
लड़कियों ने फिर मारी बाज़ी
5वीं: बालिकाएं 96.19%, बालक 94.15%
8वीं: बालिकाएं 94.98%, बालक 92.74%
दिव्यांग छात्रों का मजबूत प्रदर्शन
कक्षा 5वीं में 7,634 में से 6,948 छात्र पास हुए (91.01%)।
कक्षा 8वीं में दिव्यांग छात्रों का पास प्रतिशत 88.91% रहा।
ए प्लस और ए ग्रेड में बढ़ोतरी
5वीं: 43,184 छात्रों ने ए प्लस, 3,05,353 ने ए ग्रेड
8वीं: 82,092 ए प्लस, 3,26,457 ए ग्रेड
यह भी पढ़ें-5वीं-8वीं में छोटे जिलों का परचम,बड़े शहरों की रफ्तार पड़ी धीमी,राजधानी टॉप से बाहर
माध्यमवार और वर्गवार ट्रेंड
8वीं में अंग्रेजी (96.11%), उर्दू (97.76%) और मराठी (100%) माध्यम का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि हिंदी माध्यम (93.14%) औसत से कम रहा। 5वीं में हिंदी 95.30%, उर्दू 96.07%, मराठी 99.58% और अंग्रेजी 94.64% रहा। वर्गवार देखें तो 5वीं में एसटी वर्ग और 8वीं में जनरल वर्ग आगे रहे।
2025 से बेहतर हुआ परिणाम
5वीं: 92.70% से बढ़कर 95.14%
8वीं: 90.02% से बढ़कर 93.83%
यह भी पढ़ें-कक्षा पांच का रिजल्ट जारी, 95.14 % विद्यार्थी पास; छात्राएं रहीं अव्वल
असफल छात्रों को राहत, प्रवेशोत्सव की तैयारी
मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि असफल छात्रों को मई-जून में पूरक परीक्षा का अवसर मिलेगा, जिससे उनका साल खराब नहीं होगा। साथ ही 1 अप्रैल से प्रवेशोत्सव अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके तहत नए सत्र में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने पर फोकस रहेगा।
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दोनों कक्षाओं में नरसिंहपुर नंबर-1
कक्षा 5वीं में नरसिंहपुर ने 99.70% के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि 8वीं में भी जिले ने 99.38% परिणाम के साथ शीर्ष स्थान बरकरार रखा। यह प्रदर्शन प्रदेश में सबसे बेहतर रहा। कक्षा 5वीं में दमोह 87.12% के साथ सबसे नीचे रहा जबकि जबलपुर 87.79%, सतना 89.35% भी निचे रहे। वहीं कक्षा 8वीं में सतना 83.79% के साथ सबसे कमजोर रहा दमोह 85.16%, जबलपुर 87.09% इसके अलावा सिवनी (88.45%), विदिशा (89.16%) और ग्वालियर (90.39%) भी निचले पायदान पर रहे। टॉप और बॉटम जिलों के बीच 6% से 15% तक का भारी अंतर सामने आया, जो शिक्षा की गुणवत्ता में असमानता को दर्शाता है।
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5वीं में सरकारी स्कूलों का दबदबा
कक्षा 5वीं में कुल 12,76,404 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें से 12,14,344 पास हुए। कुल परिणाम 95.14% रहा।सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 95.40% रहा, जबकि निजी स्कूल 94.79% पर रहे। कक्षा 8वीं में कुल 10,92,580 विद्यार्थी शामिल हुए, जिनमें से 10,25,157 पास हुए। कुल परिणाम 93.83% दर्ज किया गया। निजी स्कूलों ने 95.20% के साथ बढ़त बनाई, जबकि सरकारी स्कूल 93.03% पर रहे।
बड़े शहरों की चमक फीकी
राजधानी भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहर भी इस बार खास प्रदर्शन नहीं कर सके। इंदौर 5वीं में 26वें स्थान पर रहा, जबकि भोपाल 34वें स्थान पर पहुंच गया। दोनों ही शहर 5वीं और 8वीं में टॉप-10 से बाहर रहे, जो चौंकाने वाला है।
ग्रामीण छात्रों का दबदबा कायम
पास हुए कुल 23,68,984 विद्यार्थियों में से 16,78,567 ग्रामीण, 6,90,417 शहरी रहे। परिणामों में ग्रामीण छात्रों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जो बदलते शैक्षणिक ट्रेंड को दर्शाता है।
लड़कियों ने फिर मारी बाज़ी
5वीं: बालिकाएं 96.19%, बालक 94.15%
8वीं: बालिकाएं 94.98%, बालक 92.74%
दिव्यांग छात्रों का मजबूत प्रदर्शन
कक्षा 5वीं में 7,634 में से 6,948 छात्र पास हुए (91.01%)।
कक्षा 8वीं में दिव्यांग छात्रों का पास प्रतिशत 88.91% रहा।
ए प्लस और ए ग्रेड में बढ़ोतरी
5वीं: 43,184 छात्रों ने ए प्लस, 3,05,353 ने ए ग्रेड
8वीं: 82,092 ए प्लस, 3,26,457 ए ग्रेड
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माध्यमवार और वर्गवार ट्रेंड
8वीं में अंग्रेजी (96.11%), उर्दू (97.76%) और मराठी (100%) माध्यम का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि हिंदी माध्यम (93.14%) औसत से कम रहा। 5वीं में हिंदी 95.30%, उर्दू 96.07%, मराठी 99.58% और अंग्रेजी 94.64% रहा। वर्गवार देखें तो 5वीं में एसटी वर्ग और 8वीं में जनरल वर्ग आगे रहे।
2025 से बेहतर हुआ परिणाम
5वीं: 92.70% से बढ़कर 95.14%
8वीं: 90.02% से बढ़कर 93.83%
यह भी पढ़ें-कक्षा पांच का रिजल्ट जारी, 95.14 % विद्यार्थी पास; छात्राएं रहीं अव्वल
असफल छात्रों को राहत, प्रवेशोत्सव की तैयारी
मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि असफल छात्रों को मई-जून में पूरक परीक्षा का अवसर मिलेगा, जिससे उनका साल खराब नहीं होगा। साथ ही 1 अप्रैल से प्रवेशोत्सव अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके तहत नए सत्र में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने पर फोकस रहेगा।

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