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MP News: भोपाल के मॉडल स्कूल में 1.55 करोड़ का फर्जीवाड़ा, EOW ने तीन पूर्व प्राचार्यों समेत 7 पर दर्ज की FIR
Wed, 27 May 2026 06:56 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 27 May 2026 06:56 PM IST
सार
भोपाल के मॉडल आवासीय विद्यालय में मेस भुगतान के नाम पर 1.55 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। ईओडब्ल्यू ने तीन पूर्व प्राचार्यों समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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ईओडब्ल्यू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल के शासकीय मॉडल आवासीय विद्यालय, मुगलिया छाप में मेस भुगतान के नाम पर करीब 1.55 करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने जांच के बाद इस मामले में तीन पूर्व प्राचार्यों, एक लेखापाल और निजी ठेकेदारों सहित सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले की शिकायत अयोध्या नगर निवासी सौरभ गुप्ता ने की थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर स्थित मॉडल स्कूलों में मेस संचालन के लिए टेंडर जारी किया गया था। भोपाल और इंदौर स्कूलों का ठेका “कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड” कंपनी को मिला था। कंपनी विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराती थी और भुगतान उसके अधिकृत बैंक खाते में किया जाता था।
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फर्जी फर्म तैयार कर की धोखाधड़ी
ईओडब्ल्यू जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2023 में कंपनी में सुपरवाइजर रहे गौरव शर्मा ने एक सुनियोजित साजिश रची। उसने असली कंपनी के नाम से “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर “कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस” नाम से फर्जी फर्म तैयार करवाई। यह फर्म उसके परिचित हर्ष मरजानी के नाम पर बनाई गई और उसका बैंक खाता इंदौर में खुलवाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल की तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा ने बिना सक्षम अधिकारियों की अनुमति के कंपनी का बैंक खाता बदल दिया। अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत फाइलों में असली कंपनी का नाम दर्ज किया जाता था, लेकिन चेक जारी करते समय जानबूझकर “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर भुगतान फर्जी फर्म के खाते में ट्रांसफर किया जाता रहा।
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चेकों पर हस्ताक्षर कर फर्जी खातों में भेजी राशि
ईओडब्ल्यू के अनुसार इस पूरे मामले में तत्कालीन प्राचार्य विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया और वीरेंद्र दुबे की भी भूमिका सामने आई है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने फर्जी चेकों पर हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये फर्जी खाते में स्थानांतरित होने दिए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि फरवरी 2025 में नए प्राचार्य दीप राजावत ने गड़बड़ी पकड़ ली थी। उन्होंने चेक पर स्वयं “प्रा. लि.” जोड़कर असली कंपनी को भुगतान कराया था। लेकिन उनके तबादले के बाद फिर से फर्जी भुगतान शुरू हो गए। ईओडब्ल्यू ने गौरव शर्मा, हर्ष मरजानी, कुलदीप शुक्ला, लीना विश्वकर्मा और तीनों पूर्व प्राचार्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस 2023) की विभिन्न धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी अब मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई और आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।
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फर्जी फर्म तैयार कर की धोखाधड़ी
ईओडब्ल्यू जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2023 में कंपनी में सुपरवाइजर रहे गौरव शर्मा ने एक सुनियोजित साजिश रची। उसने असली कंपनी के नाम से “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर “कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस” नाम से फर्जी फर्म तैयार करवाई। यह फर्म उसके परिचित हर्ष मरजानी के नाम पर बनाई गई और उसका बैंक खाता इंदौर में खुलवाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल की तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा ने बिना सक्षम अधिकारियों की अनुमति के कंपनी का बैंक खाता बदल दिया। अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत फाइलों में असली कंपनी का नाम दर्ज किया जाता था, लेकिन चेक जारी करते समय जानबूझकर “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर भुगतान फर्जी फर्म के खाते में ट्रांसफर किया जाता रहा।
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चेकों पर हस्ताक्षर कर फर्जी खातों में भेजी राशि
ईओडब्ल्यू के अनुसार इस पूरे मामले में तत्कालीन प्राचार्य विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया और वीरेंद्र दुबे की भी भूमिका सामने आई है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने फर्जी चेकों पर हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये फर्जी खाते में स्थानांतरित होने दिए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि फरवरी 2025 में नए प्राचार्य दीप राजावत ने गड़बड़ी पकड़ ली थी। उन्होंने चेक पर स्वयं “प्रा. लि.” जोड़कर असली कंपनी को भुगतान कराया था। लेकिन उनके तबादले के बाद फिर से फर्जी भुगतान शुरू हो गए। ईओडब्ल्यू ने गौरव शर्मा, हर्ष मरजानी, कुलदीप शुक्ला, लीना विश्वकर्मा और तीनों पूर्व प्राचार्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस 2023) की विभिन्न धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी अब मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई और आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।
