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MP News: सीएम डॉ. यादव बोले- डॉ. वाकणकर के परिश्रम और प्रयासों से कालगणना के केन्द्र डोंगला की हुई खोज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 09 Jan 2026 06:39 PM IST
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सार
भोपाल में आयोजित 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह एवं संगोष्ठी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुरातत्वविद् डॉ. यशोधर मठपाल को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने भारतीय पुरातत्व को केवल एक शैक्षणिक विषय न रहने देकर जन आंदोलन का रूप दिया। उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का ही परिणाम था कि उज्जैन का जन-जन अपने परिवेश को पुरातत्व की दृष्टि से देखने लगा। मुख्यमंत्री शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. वाकणकर बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने सितार वादन, चित्रकला, मूर्तिकला, काव्य और संगीत के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया। उनके परिश्रम से कालगणना के केंद्र डोंगला की खोज हुई। पृथ्वी की घूर्णन धुरी में परिवर्तन के कारण उज्जैन में स्थित शून्य देशांतर और कर्क रेखा का मिलन डोंगला में स्थानांतरित हुआ, जिसे डॉ. वाकणकर ने वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणित किया।
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समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पद्मश्री से सम्मानित पुरातत्वविद् डॉ. प्रो. यशोधर मठपाल को शॉल, श्रीफल, भू-वराह की प्रतिकृति और दो लाख रुपये का चेक भेंट कर 19वें डॉ. वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान (वर्ष 2022-23) से सम्मानित किया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय सितार वादक स्मिता नागदेव और कवि राहुल शर्मा ने डॉ. वाकणकर की कविता “इतिहास के पटल पर” की संगीतमय प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने “20वीं सदी में मध्यप्रदेश में स्वाधीनता आंदोलन 1920-1947” पुस्तक का विमोचन किया तथा पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालयों पर केंद्रित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने एक स्टॉल पर कुम्हार के चाक से शिवलिंग की प्रतिकृति बनाकर भारतीय कला और शिल्प परंपरा के प्रति सम्मान प्रकट किया।
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डॉ. वाकणकर के शोध ने वैश्चिक पहचान दिलाई
डॉ. यादव ने कहा कि भीमबेटका के शैलचित्रों पर डॉ. वाकणकर के शोध ने भारत को वैश्विक सांस्कृतिक पहचान दिलाई। उन्होंने भारत सहित यूरोप और अमेरिका में चार हजार से अधिक शैलचित्रों की खोज और अध्ययन किया। डॉ. वाकणकर को 1975 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनके सम्मान में राज्य सरकार ने रातापानी अभ्यारण्य का नामकरण भी किया है।
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14 जनवरी से महाकाल महोत्सव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार उज्जैन में 14 जनवरी से महाकाल महोत्सव की शुरुआत करने जा रही है। राज्य सरकार उज्जैन में पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर की स्मृतियों और उनके द्वारा एकत्रित पुरातत्व ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं का संरक्षण करते हुए संग्रहालय को भी वर्तमान तकनीकी व्यवस्थाओं से लैस कर रही है।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पुरातत्वविद डॉ. मठपाल को राष्ट्रीय सम्मान, पुरातत्व एवं शैल चित्र अध्ययन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। डॉ. मठपाल एक वरिष्ठ पुरातत्वविद, चित्रकार, क्यूरेटर और शैल चित्र संग्रहण विशेषज्ञ हैं। डॉ. मठपाल ने पश्चिमी घाट, हिमालय, विंध्य और कैमूर पर्वत श्रृंखलाओं में 400 से अधिक प्राचीन गुफाओं की खोज की है। मध्यप्रदेश के पुरातत्व कला और संस्कृति में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। शैल चित्र संरक्षण की वैज्ञानिक पद्धतियों के विकास में उनके योगदान ने भारत की प्रागैतिहासिक विरासत के अध्ययन और संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा प्रदान की है।
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डॉ. वाकणकर के शोध ने वैश्चिक पहचान दिलाई
डॉ. यादव ने कहा कि भीमबेटका के शैलचित्रों पर डॉ. वाकणकर के शोध ने भारत को वैश्विक सांस्कृतिक पहचान दिलाई। उन्होंने भारत सहित यूरोप और अमेरिका में चार हजार से अधिक शैलचित्रों की खोज और अध्ययन किया। डॉ. वाकणकर को 1975 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनके सम्मान में राज्य सरकार ने रातापानी अभ्यारण्य का नामकरण भी किया है।
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14 जनवरी से महाकाल महोत्सव
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