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MP News: किसान हेल्पलाइन 155253 पर सीएम यादव के कॉल पर जवाब- हमारा अधिकारी आपसे संपर्क करेगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Thu, 30 Apr 2026 04:53 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश में किसानों को त्वरित मदद और जानकारी देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘किसान हेल्पलाइन 155253’ शुरू की है। इसके साथ ही किसान कल्याण डैशबोर्ड और अन्य योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सीएम मोहन यादव ने हेल्पलाइन पर नंबर पर कॉल किया, तो उनको जवाब मिला कि हमारा अधिकारी आपसे संपर्क करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में किसानों को बेहतर सुविधा और त्वरित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई पहल की है। राजधानी भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण प्रशिक्षण एवं कार्यशाला में उन्होंने टोल फ्री ‘सीएम किसान हेल्पलाइन 155253’ की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने स्वयं हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर उसकी कार्यप्रणाली परखी। जब मुख्यमंत्री ने कॉल सेंटर से गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली तीसरी फसल के बारे में जानकारी मांगी, तो कॉल सेंटर कर्मी ने पहले उनका नाम पूछा। मुख्यमंत्री ने खुद को किसान बताया, तो जवाब मिला कि उनका मोबाइल नंबर दर्ज कर लिया गया है और संबंधित अधिकारी उनसे संपर्क करेगा।
वहीं, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड और पैक्स समितियों में सदस्यता बढ़ाने के महा-अभियान का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने खुद हेल्पलाइन से जुड़कर कृषि से संबंधित जानकारी ली और कहा कि यह पहल किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के तहत प्रदेश के 16 विभाग मिलकर किसानों के हित में काम कर रहे हैं। उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे विभागों को एक साथ जोड़कर सरकार किसानों की आय बढ़ाने और सुविधाएं बेहतर करने की दिशा में प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के दम पर कई कठिन कामों को भी पूरा किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र में बेहतर काम हुआ है और अब किसानों को दूध के अच्छे दाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में “दूध क्रांति” की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
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फसल के साथ एग्री वेस्ट से भी हो रही कमाई
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि किसान अब फसल के साथ-साथ कृषि अपशिष्ट (एग्री वेस्ट) से भी कमाई कर रहे हैं। गेहूं, धान और मक्का के अवशेष से भूसा बनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से किसानों तक नई तकनीक पहुंचेगी, जिससे लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
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किसान अब साल में दो की जगह तीन फसल भी ले रहे
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर थी, लेकिन अब सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से स्थिति बदली है। नहरों और बिजली के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंच रहा है, जिससे किसान अब साल में दो के बजाय तीन फसलें भी लेने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के लिए समर्थन मूल्य के साथ बोनस जैसी योजनाएं भी लागू कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी जोड़ो परियोजनाओं से प्रदेश को बड़ा लाभ मिल रहा है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी परियोजनाओं से कई क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी और खेती को मजबूती मिलेगी।
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हर जिले में आयोजित हो रहे कृषि मेले
कार्यक्रम में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा कि राज्य सरकार ने पूरे वर्ष को कृषक कल्याण के लिए समर्पित किया है और हर जिले में कृषि मेले आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं, कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यशाला में प्रदेशभर से 16 विभागों के 1600 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है, ताकि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
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वहीं, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड और पैक्स समितियों में सदस्यता बढ़ाने के महा-अभियान का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने खुद हेल्पलाइन से जुड़कर कृषि से संबंधित जानकारी ली और कहा कि यह पहल किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के तहत प्रदेश के 16 विभाग मिलकर किसानों के हित में काम कर रहे हैं। उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे विभागों को एक साथ जोड़कर सरकार किसानों की आय बढ़ाने और सुविधाएं बेहतर करने की दिशा में प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के दम पर कई कठिन कामों को भी पूरा किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र में बेहतर काम हुआ है और अब किसानों को दूध के अच्छे दाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में “दूध क्रांति” की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
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फसल के साथ एग्री वेस्ट से भी हो रही कमाई
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि किसान अब फसल के साथ-साथ कृषि अपशिष्ट (एग्री वेस्ट) से भी कमाई कर रहे हैं। गेहूं, धान और मक्का के अवशेष से भूसा बनाकर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से किसानों तक नई तकनीक पहुंचेगी, जिससे लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
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किसान अब साल में दो की जगह तीन फसल भी ले रहे
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर थी, लेकिन अब सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से स्थिति बदली है। नहरों और बिजली के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंच रहा है, जिससे किसान अब साल में दो के बजाय तीन फसलें भी लेने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के लिए समर्थन मूल्य के साथ बोनस जैसी योजनाएं भी लागू कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी जोड़ो परियोजनाओं से प्रदेश को बड़ा लाभ मिल रहा है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी परियोजनाओं से कई क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी और खेती को मजबूती मिलेगी।
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हर जिले में आयोजित हो रहे कृषि मेले
कार्यक्रम में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा कि राज्य सरकार ने पूरे वर्ष को कृषक कल्याण के लिए समर्पित किया है और हर जिले में कृषि मेले आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं, कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यशाला में प्रदेशभर से 16 विभागों के 1600 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है, ताकि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

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