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MP News:पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का विस में CM कक्ष के बाहर धरना,भारी हंगामे के बीच UCC समेत 8 विधेयक पारित

Tue, 21 Jul 2026 09:00 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Tue, 21 Jul 2026 09:00 PM IST
सार

मध्य प्रदेश विधानसभा में यूसीसी विधेयक समेत कई अहम विधेयक पारित हो गए। यूसीसी पर दिनभर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जबकि पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया।

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MP News: Congress stages sit-in outside CM's chamber in the Assembly over the paper leak issue; eight bills pa
विधानसभा में कांग्रेस नेता सीएम के कक्ष के बाहर धरने पर बैठे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर दिनभर हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के विरोध और दो बार कार्यवाही स्थगित होने के बावजूद सरकार ने यूसीसी समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा लिया। वहीं, पेपर लीक मामले पर चर्चा नहीं होने से नाराज कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया।
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 सदन में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 पेश होते ही कांग्रेस ने इसे प्रवर (सेलेक्ट) समिति को भेजने की मांग की। इस बिल पर संशोधन का प्रस्ताव कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सदन को दिया था। बिल पर चर्चा शुरू होने के साथ ही नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बिल प्रवर समिति को भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देना चाहिए। इस पर सरकार को चर्चा करनी चाहिए। इस पर विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि मंत्री जी ने बात को अच्छे से घुमाया है। छह महीने में आपने काम किया है जब आपके पास आंकड़े 2200 थे। उन्होंने अल्पसंख्यक के आर्टिकल 29 में दी गई छूट का उत्तर मांगा। उन्होंने कहा कि एक विधान, एक संविधान से एक जाति को अलग रखा गया है तो मुस्लिमों को भी अलग रखना चाहिए। यह कानून लाकर एक वर्ग विशेष को टारगेट किया जा रहा है। केंद्र सरकार से पहले आपको लाना है तो समिति को भेजिये चर्चा करवाइए। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 29 का संरक्षण हम आप से चाहते हैं। आर्टिकल 29 में मुस्लिमों को सुरक्षा दी गई है। आर्टिकल 29 की रक्षा के लिए प्रवर समिति में बिल को भेजा जाना चाहिए।  नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यूसीसी से ज्यादा जरूरी ओबीसी का 27 प्रतिशत आरक्षण का मामला है। सदन में जमकर हंगामा होता रहा है। 
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विजयवर्गीय ने उठाया व्यवस्था का सवाल
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में व्यवस्था का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से विधायक सीता शरण शर्मा को बोलने का मौका दिया गया है। बाकी किसी सदस्य की बात रिकॉर्ड पर नहीं ली जानी चाहिए। सीता शरण शर्मा ने कहा कि कांग्रेस संविधान को सिर पर लेकर घूमती है संविधान मानने की बात करती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मानती है। 

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प्रवर समिति को भेजने की मांग खारिज
यूसीसी विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग अस्वीकार करने के बाद कांग्रेस सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की। हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। बाद में सरकार के बहुमत के आधार पर विधानसभा में यूसीसी विधेयक पारित करा लिया। बहस के दौरान कांग्रेस नेताओं ने संविधान, अल्पसंख्यकों के अधिकार और विधेयक की समीक्षा की आवश्यकता का मुद्दा उठाया। वहीं, सरकार ने इसे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने वाला कानून बताया।

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पेपर लीक मुद्दे पर सीएम चेंबर के बाहर धरना
दिनभर की कार्यवाही के बाद कांग्रेस ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। धरने के दौरान विधायकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों के समर्थन में कार्रवाई की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई बर्बरता के विरोध में प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी  सहित कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी और उनके साथ कथित तौर पर की गई अभद्रता भाजपा सरकार की तानाशाही का शर्मनाक चेहरा है।

दिल्ली से लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा तक हम छात्रों के सम्मान और न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। मैं विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर कांग्रेस विधायक दल के साथ धरने पर बैठा हूँ। सत्य की आवाज़ को न घसीटा जा सकता है, न गिरफ्तार किया जा सकता है। लोकतंत्र की इस लड़ाई में हम पीछे नहीं हटेंगे।

ये  विधेयक भी हुए पारित
राजमार्गों पर लगेगी यूजर फीस 
- मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026 पारित कर दिया गया। इसमें राज्य सरकार को राजमार्गों के विकास, रखरखाव और संचालन के लिए यूजर फीस तय करने और वसूलने का अधिकार मिलेंगे। 

श्रम शक्ति संहिता विधेयक 
- विधानसभा में मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) 2026 विधेयक पारित कर दिया गया है। अब संस्थान 24 घंटे सातों दिन खुले रह सकेंगे, बशर्ते हर 8 घंटे बाद ड्यूटी बदल दी जाए। कोई व्यक्ति चाहे तो सप्ताह में 4 दिन 48 घंटे की ड्यूटी कर सकता है और तीन दिन दूसरे काम भी कर सकता है।


फायर सेफ्टी प्रावधान होंगे सख्त
- नए कानून के तहत मल्टीस्टोरी भवनों के लिए हर वर्ष फायर सेफ्टी एनओसी लेना अनिवार्य होगा। फायर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जरूरत के अनुसार नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे और अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष अधिकार दिए जाएंगे।

उद्योगों को मंजूरी की प्रक्रिया होगी आसान 
- विधानसभा ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े संशोधन विधेयक को भी पारित कर दिया। इसके तहत उद्योगों को मंजूरी देने की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा। राज्य और जिला स्तर पर नोडल एजेंसियां गठित होंगी, जबकि संबंधित अधिकारियों को उद्योग प्रस्ताव से जुड़ी जानकारी 7 दिन के भीतर उपलब्ध करानी होगी।

उज्जैन में धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की स्थापना
- सरकार के अनुसार, जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी अधिनियम-2022 में संशोधन कर उज्जैन में धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इस नए विश्वविद्यालय के अंतर्गत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, नर्मदापुरम और चंबल संभाग आएंगे। उज्जैन संभाग में उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर और नीमच जिले शामिल रहेंगे।

वैट और उपकर कानून में संशोधन पारित 
- मध्य प्रदेश वैट (संशोधन) विधेयक-2026 में अपील बोर्ड के सदस्यों की अधिकतम आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 67 वर्ष करने का प्रस्ताव है। साथ ही अपील प्रक्रिया को भी आसान बनाने की व्यवस्था की गई है। वहीं मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक-2026 के माध्यम से पहले जारी अध्यादेश को कानून का रूप देने का प्रस्ताव रखा गया। दोनों ही विधेयक को विधानसभा में पारित कर दिया गया।
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