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MP News: बसों की सुरक्षा जांच में ढिलाई, पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद भी जिलों से नहीं पहुंची पूरी रिपोर्ट
Wed, 01 Jul 2026 08:18 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 01 Jul 2026 08:18 PM IST
सार
प्रदेश में बसों की सुरक्षा जांच को लेकर पुलिस मुख्यालय की मुहिम धीमी पड़ गई है। एक महीने बाद भी अधिकांश जिलों से पूरी रिपोर्ट नहीं मिलने पर पीएचक्यू को दोबारा रिमाइंडर जारी करना पड़ा।
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photo पुलिस मुख्यालय
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विस्तार
प्रदेश में लगातार सामने आ रहे बस हादसों के बाद यात्री सुरक्षा को लेकर शुरू की गई पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) की पहल अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों से यात्री बसों में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा था, लेकिन करीब एक महीने बाद भी अधिकांश जिलों से पूरी जानकारी मुख्यालय तक नहीं पहुंच सकी है। इसके चलते मुख्यालय को एक बार फिर सभी जिलों को रिमाइंडर जारी करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, हाल में हुई सड़क दुर्घटनाओं के बाद पुलिस मुख्यालय ने प्रदेशभर में संचालित यात्री बसों की सुरक्षा व्यवस्था का वास्तविक आकलन कराने का निर्णय लिया था। इसके तहत प्रत्येक जिले को बसों का भौतिक निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे।
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इमरजेंसी गेट से लेकर सीटों की स्थिति तक मांगा गया विवरण
मुख्यालय ने जिला पुलिस अधिकारियों से कहा था कि बसों में इमरजेंसी गेट की उपलब्धता, उसकी उपयोगिता, स्वीकृत क्षमता के अनुरूप सीटों की संख्या तथा सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच कर रिपोर्ट भेजी जाए। यदि इमरजेंसी गेट के सामने अतिरिक्त सीटें लगाकर रास्ता बाधित किया गया हो या किसी तरह का अतिक्रमण हो तो उसका भी उल्लेख किया जाए।
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वीडियो रिकॉर्डिंग भी थी अनिवार्य
रिपोर्ट को अधिक प्रमाणिक बनाने के लिए प्रत्येक बस का वीडियो तैयार करने के निर्देश भी दिए गए थे। वीडियो में बस का अंदरूनी हिस्सा, सीटों की संख्या, इमरजेंसी गेट की स्थिति और अन्य सुरक्षा इंतजाम स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड कर मुख्यालय को भेजने के लिए कहा गया था।
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अधूरी जानकारी से अटकी समीक्षा
बताया जा रहा है कि कई जिलों से या तो जानकारी अधूरी भेजी गई या निर्धारित प्रारूप का पालन नहीं किया गया। कुछ जिलों से अब तक रिपोर्ट ही प्राप्त नहीं हुई। इसके कारण प्रदेश स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समग्र समीक्षा पूरी नहीं हो सकी। अब दोबारा निर्धारित प्रोफार्मा में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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दोबारा निर्धारित प्रोफार्मा में मांगी जानकारी
पीटीआरआई के एडीजी शाहिद अबसार ने बताया कि पहले जिलों से जानकारी निर्धारित प्रोफार्मा के अनुसार नहीं भेजी थी। अब उनको दोबारा पत्र भेजा गया है और निर्धारित प्रोफार्मा में जानकरी देने को कहा गया है।
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इमरजेंसी गेट से लेकर सीटों की स्थिति तक मांगा गया विवरण
मुख्यालय ने जिला पुलिस अधिकारियों से कहा था कि बसों में इमरजेंसी गेट की उपलब्धता, उसकी उपयोगिता, स्वीकृत क्षमता के अनुरूप सीटों की संख्या तथा सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच कर रिपोर्ट भेजी जाए। यदि इमरजेंसी गेट के सामने अतिरिक्त सीटें लगाकर रास्ता बाधित किया गया हो या किसी तरह का अतिक्रमण हो तो उसका भी उल्लेख किया जाए।
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वीडियो रिकॉर्डिंग भी थी अनिवार्य
रिपोर्ट को अधिक प्रमाणिक बनाने के लिए प्रत्येक बस का वीडियो तैयार करने के निर्देश भी दिए गए थे। वीडियो में बस का अंदरूनी हिस्सा, सीटों की संख्या, इमरजेंसी गेट की स्थिति और अन्य सुरक्षा इंतजाम स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड कर मुख्यालय को भेजने के लिए कहा गया था।
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अधूरी जानकारी से अटकी समीक्षा
बताया जा रहा है कि कई जिलों से या तो जानकारी अधूरी भेजी गई या निर्धारित प्रारूप का पालन नहीं किया गया। कुछ जिलों से अब तक रिपोर्ट ही प्राप्त नहीं हुई। इसके कारण प्रदेश स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समग्र समीक्षा पूरी नहीं हो सकी। अब दोबारा निर्धारित प्रोफार्मा में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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दोबारा निर्धारित प्रोफार्मा में मांगी जानकारी
पीटीआरआई के एडीजी शाहिद अबसार ने बताया कि पहले जिलों से जानकारी निर्धारित प्रोफार्मा के अनुसार नहीं भेजी थी। अब उनको दोबारा पत्र भेजा गया है और निर्धारित प्रोफार्मा में जानकरी देने को कहा गया है।
