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MP News: मध्यप्रदेश में असम से आएंगे जंगली भैंस, गैंडा और कोबरा; बदले में देंगे टाइगर और मगरमच्छ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 08 Jan 2026 11:04 PM IST
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सार
मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्य जीवों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी है। इसके तहत असम से 50 जंगली भैंस, गैंडा और कोबरा मध्यप्रदेश लाए जाएंगे, जबकि मध्यप्रदेश असम को टाइगर और मगरमच्छ देगा।
सीएम डॉ. मोहन यादव और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ बैठक में वन्य जीवों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी। इसके तहत असम से अगले तीन साल में 50 जंगली भैंस, एक जोड़ा गैंडा और तीन कोबरा मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। इन्हें भोपाल के वन विहार में रखा जाएगा। इसके बदले में मध्यप्रदेश असम को एक जोड़ा टाइगर और छह मगरमच्छ देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना से मध्यप्रदेश की जैव विविधता और समृद्ध होगी और प्रदेश के जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले ही 'टाइगर स्टेट' और 'लेपर्ड स्टेट' के रूप में पहचाना जा चुका है। चीते की सफल पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों को लाने से राज्य के वन्य जीव संरक्षण में नया अध्याय जुड़ रहा है। डॉ. यादव ने कहा कि राज्य वन्य जीव संरक्षण और विलुप्त प्रजातियों को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। वन्य जीव संस्थान, देहरादून द्वारा किए गए अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र बताया गया है। अध्ययन में घास के मैदान, जल स्रोत, मानव हस्तक्षेप की न्यूनता और अन्य शाकाहारी जीवों के दबाव जैसे कारक मूल्यांकन किए गए। वर्तमान समय में देश में जंगली भैंसों की प्राकृतिक आबादी मुख्य रूप से असम राज्य तक सीमित रह गई है। छत्तीसगढ़ में भी ये हैं, किंतु इनकी संख्या अत्यंत सीमित है।
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मध्यप्रदेश सरकार ने इस योजना को सुरक्षित और चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) और भारत सरकार से अनुमतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना का उद्देश्य दीर्घकालिक संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन सुनिश्चित करना है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले ही 'टाइगर स्टेट' और 'लेपर्ड स्टेट' के रूप में पहचाना जा चुका है। चीते की सफल पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों को लाने से राज्य के वन्य जीव संरक्षण में नया अध्याय जुड़ रहा है। डॉ. यादव ने कहा कि राज्य वन्य जीव संरक्षण और विलुप्त प्रजातियों को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। वन्य जीव संस्थान, देहरादून द्वारा किए गए अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र बताया गया है। अध्ययन में घास के मैदान, जल स्रोत, मानव हस्तक्षेप की न्यूनता और अन्य शाकाहारी जीवों के दबाव जैसे कारक मूल्यांकन किए गए। वर्तमान समय में देश में जंगली भैंसों की प्राकृतिक आबादी मुख्य रूप से असम राज्य तक सीमित रह गई है। छत्तीसगढ़ में भी ये हैं, किंतु इनकी संख्या अत्यंत सीमित है।
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मध्यप्रदेश सरकार ने इस योजना को सुरक्षित और चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) और भारत सरकार से अनुमतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना का उद्देश्य दीर्घकालिक संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन सुनिश्चित करना है।
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