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निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयकः कांग्रेस विधायक बोले-एक कमरे में खुलेंगे विश्वविद्यालय, कैसे होगी पढ़ाई?

Tue, 21 Jul 2026 06:40 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 21 Jul 2026 06:40 PM IST
सार

निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर विधानसभा में कांग्रेस ने सरकार पर शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण का आरोप लगाया। विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालय खोलने के मानकों में ढील देकर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है।

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Private Universities Amendment Bill: Congress MLA asks—universities will open in a single room; how will studi
कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार उच्च शिक्षा का निजीकरण कर उसे उद्योग में बदलना चाहती है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा कि यह संशोधन प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला है। डॉ. अलावा ने आरोप लगाया कि सरकार निजी विश्वविद्यालयों के लिए 5 करोड़ रुपए की सुरक्षा राशि जमा करने की अनिवार्यता और 2500 वर्गमीटर भूमि की शर्त खत्म कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, अब भाजपा राज में एक कमरे में भी विश्वविद्यालय संचालित हो जाएगा।
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बिना कैंपस, हॉस्टल और लैब कैसी होगी पढ़ाई?
उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के लिए कैंपस, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, चिकित्सा सुविधा और शोध संस्थान जैसी मूलभूत सुविधाएं जरूरी होती हैं। यदि इन शर्तों को कमजोर किया जाएगा तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी। उनके मुताबिक निजी विश्वविद्यालयों को इन आवश्यक व्यवस्थाओं से छूट देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
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शिक्षा नहीं, कारोबार बना रही सरकार
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा का औद्योगीकरण कर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम है। ऐसे संशोधन से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इसका सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा।

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 एबीवीपी ने भी खोला मोर्चा
निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी विरोध जताया है। परिषद का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन उच्च शिक्षा के व्यापारीकरण को बढ़ावा देगा। एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालयों के लिए भूमि और अन्य आवश्यक मानकों में ढील देने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी तथा निजी संस्थानों को मनमानी की छूट मिल जाएगी। परिषद ने सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने और गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं छात्रहितैषी उच्च शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही स्पष्ट किया कि शिक्षा को व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा और छात्र हितों पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं होगा।

 
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