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Bhopal News: आईबी के रिटायर्ड अधिकारी को जालसाजों ने ठगा, परिचित का घरेलू सामान बेचने के नाम पर जाल में फंसाया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: भोपाल ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2026 09:58 AM IST
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सार
फरियादी द्वारा राशि भेजने के बाद जब न तो सामान मिला और न ही संपर्क हो पाया, क्योंकि मोबाइल नंबर बंद हो चुका था, तब उन्हें संदेह हुआ। उन्होंने सीधे उस वास्तविक अधिकारी से संपर्क किया, जिनके नाम का इस्तेमाल किया गया था। यहीं से पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।
अपराध
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने खुद को बेहद विश्वसनीय दिखाते हुए एक रिटायर्ड अधिकारी को अपना शिकार बना लिया। राजधानी भोपाल के शाहपुरा इलाके में रहने वाले रविंद्र डोंगे, जो इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, उनसे करीब 1.5 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। यह घटना इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि ठगों ने भरोसे का ऐसा जाल बुना कि एक अनुभवी अधिकारी भी उनके झांसे में आ गए।
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कैसे रचा गया पूरा षड्यंत्र
शाहपुरा पुलिस के अनुसार ठगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर आईबी के ही एक परिचित अधिकारी के नाम से फर्जी पोस्ट डाली। पोस्ट में दावा किया गया कि उस अधिकारी का ट्रांसफर हो गया है और वे अपना घरेलू सामान बेच रहे हैं। साथ ही एक मोबाइल नंबर भी साझा किया गया। विश्वास में आकर रिटायर्ड अध्किारी रविंद्र डोंगे ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को वही अधिकारी बताते हुए पूरा सामान 1,51,500 रुपये में देने की बात कही। परिचित का नाम सामने होने के कारण डोंगे को शक नहीं हुआ और उन्होंने तीन किश्तों में पूरी रकम बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी।
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ठगी का खुलासा कैसे हुआ
फरियादी द्वारा राशि भेजने के बाद जब न तो सामान मिला और न ही संपर्क हो पाया, क्योंकि मोबाइल नंबर बंद हो चुका था, तब उन्हें संदेह हुआ। उन्होंने सीधे उस वास्तविक अधिकारी से संपर्क किया, जिनके नाम का इस्तेमाल किया गया था। यहीं से पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। उक्त अधिकारी ने बताया कि न तो उनका कोई ट्रांसफर हुआ था और न ही उन्होंने कोई सामान बेचने का विज्ञापन दिया था। इसके बाद फरियादी ने मामले की शिकायत शाहपुरा थाना में दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। संबंधित बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई जा रही है।
इस वारदात से एक गंभीर बात का खुलासा हुआ कि साइबर ठग अब पहले से ज्यादा चालाक और संगठित हो चुके हैं। वे भरोसेमंद पहचान का सहारा लेकर लोगों को फंसाते हैं। जब एक अनुभवी रिटायर्ड अधिकारी तक इस जाल में फंस सकते हैं, तो आम नागरिकों के लिए जोखिम और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

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