{"_id":"6a4f662baa4396bf69071425","slug":"sardar-sarovar-agreement-congress-poses-tough-questions-to-the-government-whose-accounts-received-the-7-669-2026-07-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरदार सरोवर समझौता: कांग्रेस के सरकार से तीखे सवाल, एमपी के 7669 करोड़ किसके खाते में गए? श्वेत पत्र की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरदार सरोवर समझौता: कांग्रेस के सरकार से तीखे सवाल, एमपी के 7669 करोड़ किसके खाते में गए? श्वेत पत्र की मांग
Thu, 09 Jul 2026 02:45 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 09 Jul 2026 02:45 PM IST
सार
सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वन टाइम सेटलमेंट के बाद प्रदेश कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए मध्य प्रदेश के 7,669 करोड़ रुपए के दावे पर जवाब मांगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार समझौते को उपलब्धि बता रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर रही कि राज्य के दावे का क्या हुआ।
विज्ञापन
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरदार सरोवर परियोजना को लेकर चार राज्यों के बीच वर्षों पुराने वित्तीय विवाद का समाधान होने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सवाल उठाया कि जिस 7,669 करोड़ रुपए के दावे को मध्य प्रदेश वर्षों से अपना अधिकार बता रहा था, वह समझौते के बाद आखिर कहां चला गया। इस दौरान पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार समझौते को बड़ी उपलब्धि बताकर प्रचार कर रही है, लेकिन यह नहीं बता रही कि मध्य प्रदेश के दावे का क्या हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, मुख्यमंत्री जी, आप राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं कि आपकी हर बात को बिना सवाल किए सच मान लिया जाए।
सबसे ज्यादा नुकसान एमपी ने उठाया
पटवारी ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से सबसे अधिक जमीन, जंगल और आदिवासी परिवार मध्य प्रदेश में प्रभावित हुए। पुनर्वास का सबसे बड़ा बोझ भी राज्य ने उठाया। इसी आधार पर मध्य प्रदेश ने 7,669 करोड़ रुपए का दावा किया था। अब सरकार को बताना चाहिए कि इस दावे का निपटारा किस आधार पर किया गया।
यह भी पढ़ें-एमपी में सामान्य से 10% ज्यादा वर्षा, आज कई जिलों में भारी बारिश के आसार, भिंड में रेड अलर्ट
विज्ञापन
सरकार से पांच सीधे सवाल
कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि क्या इस फैसले पर मंत्रिमंडल की मंजूरी ली गई, क्या विधानसभा को विश्वास में लिया गया, समझौते की शर्तें सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रहीं और यदि दावा सही था तो उसे छोड़ा क्यों गया।
श्वेत पत्र जारी करने की मांग
पटवारी ने पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार सभी दस्तावेज सार्वजनिक करे, ताकि प्रदेश की जनता जान सके कि मध्य प्रदेश के हितों की रक्षा किस तरह की गई।
यह भी पढ़ें-प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में ढोल पिटवाने पर विवाद, अफसर पर कार्रवाई की मांग
क्या है मामला?
सरदार सरोवर बांध की लागत और वित्तीय दायित्वों को लेकर मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच करीब तीन दशक से विवाद चल रहा था। हाल ही में नई दिल्ली में चारों राज्यों ने केंद्र की मौजूदगी में वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर कर सभी पुराने दावों और देनदारियों को समाप्त करने पर सहमति जताई। इसके बाद कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के दावे को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा नुकसान एमपी ने उठाया
पटवारी ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से सबसे अधिक जमीन, जंगल और आदिवासी परिवार मध्य प्रदेश में प्रभावित हुए। पुनर्वास का सबसे बड़ा बोझ भी राज्य ने उठाया। इसी आधार पर मध्य प्रदेश ने 7,669 करोड़ रुपए का दावा किया था। अब सरकार को बताना चाहिए कि इस दावे का निपटारा किस आधार पर किया गया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें-एमपी में सामान्य से 10% ज्यादा वर्षा, आज कई जिलों में भारी बारिश के आसार, भिंड में रेड अलर्ट
विज्ञापन
सरकार से पांच सीधे सवाल
कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि क्या इस फैसले पर मंत्रिमंडल की मंजूरी ली गई, क्या विधानसभा को विश्वास में लिया गया, समझौते की शर्तें सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रहीं और यदि दावा सही था तो उसे छोड़ा क्यों गया।
श्वेत पत्र जारी करने की मांग
पटवारी ने पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार सभी दस्तावेज सार्वजनिक करे, ताकि प्रदेश की जनता जान सके कि मध्य प्रदेश के हितों की रक्षा किस तरह की गई।
यह भी पढ़ें-प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में ढोल पिटवाने पर विवाद, अफसर पर कार्रवाई की मांग
क्या है मामला?
सरदार सरोवर बांध की लागत और वित्तीय दायित्वों को लेकर मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच करीब तीन दशक से विवाद चल रहा था। हाल ही में नई दिल्ली में चारों राज्यों ने केंद्र की मौजूदगी में वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर कर सभी पुराने दावों और देनदारियों को समाप्त करने पर सहमति जताई। इसके बाद कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के दावे को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।
