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बरकतउल्ला के नाम पर घमासान: मसूद ने राजभवन तक पहुंचाया विरोध, बोले- नई यूनिवर्सिटी बनाएं, 38 साल पुरानी पहचान
Mon, 13 Jul 2026 05:19 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 13 Jul 2026 05:19 PM IST
सार
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय करने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। भोपाल मध्य विधायक आरिफ मसूद ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार नए नाम से अलग विश्वविद्यालय बनाए, लेकिन मौजूदा संस्थान की 38 साल पुरानी पहचान से छेड़छाड़ न करे।
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राज्यपाल से मिलने पहुंचे विधायक आरिफ मसूद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) का नाम बदलने का प्रस्ताव अब सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद ने सोमवार को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय का मौजूदा नाम बरकरार रखने की मांग की। उन्होंने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर रोक लगाने के लिए राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील की है। मसूद ने कहा कि करीब 38 साल से बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की अपनी शैक्षणिक और ऐतिहासिक पहचान है। इतने पुराने संस्थान का नाम बदलकर उसकी पहचान खत्म करना उचित नहीं है। यदि सरकार वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय के नाम से संस्था स्थापित करना चाहती है तो नया विश्वविद्यालय खोला जाए और उसे यह नाम दिया जाए।
कार्य परिषद के प्रस्ताव पर आपत्ति, टिप्पणी को बताया अपमानजनक
विधायक ने 3 जून 2026 को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद से मंजूर नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि प्रस्ताव में स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को कमतर बताने की कोशिश की गई है। मसूद के मुताबिक प्रस्ताव में यह उल्लेख किया गया कि मौलाना बरकतउल्ला का अधिकांश जीवन विदेश में बीता और भोपाल का निवासी होने के अलावा उनका कोई विशेष योगदान दिखाई नहीं देता। उन्होंने इस टिप्पणी को एक महान स्वतंत्रता सेनानी और देशभक्त का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
आजादी की लड़ाई में बरकतउल्ला का योगदान ऐतिहासिक
ज्ञापन में मौलाना बरकतउल्ला भोपाली की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका का जिक्र करते हुए मसूद ने कहा कि उन्होंने जापान में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए काम किया। वर्ष 1913 में लाला हरदयाल के साथ गदर पार्टी से जुड़े और पार्टी के समाचार पत्र में देशभक्ति से संबंधित लेख लिखे। उन्होंने कहा कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1 दिसंबर 1915 को काबुल में गठित स्वतंत्र भारत की निर्वासित अंतरिम सरकार में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राष्ट्रपति और मौलाना बरकतउल्ला भोपाली प्रधानमंत्री बने थे। भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से उन्होंने रूस में लेनिन से भी मुलाकात की थी।
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यह भी पढ़ें-भोपाल में बनेगा 19 हजार करोड़ का डेटा सेंटर, स्पेन की कंपनी करेगी निवेश; डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर होगा मजबूत
विदेशों में भी मिला सम्मान, अमेरिका में है कब्र
मसूद ने ज्ञापन में कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली की कब्र अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में है, जहां उन्हें भारतीय राष्ट्रवादी नेता के रूप में सम्मान दिया गया है। उनकी मृत्यु के बाद जर्मनी, रूस, जापान, तुर्की, ईरान और अफगानिस्तान समेत कई देशों में श्रद्धांजलि दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
यह भी पढ़ें-भोपाल में PWD इंजीनियरिंग का नया कारनामा: रोड के बीचों-बीच छोड़ा पेड़, हादसे के डर में रहवासी, कर रहे शिकायत
राज्यपाल से नाम बदलने की प्रक्रिया रोकने की मांग
आरिफ मसूद ने राज्यपाल से मांग की कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने संबंधी प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय की पहचान बनाए रखना देश के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति सम्मान से जुड़ा विषय है। मसूद ने साफ किया कि वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय नाम से नई संस्था बनाए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मौजूदा बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलना स्वीकार्य नहीं है।
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कार्य परिषद के प्रस्ताव पर आपत्ति, टिप्पणी को बताया अपमानजनक
विधायक ने 3 जून 2026 को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद से मंजूर नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि प्रस्ताव में स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को कमतर बताने की कोशिश की गई है। मसूद के मुताबिक प्रस्ताव में यह उल्लेख किया गया कि मौलाना बरकतउल्ला का अधिकांश जीवन विदेश में बीता और भोपाल का निवासी होने के अलावा उनका कोई विशेष योगदान दिखाई नहीं देता। उन्होंने इस टिप्पणी को एक महान स्वतंत्रता सेनानी और देशभक्त का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
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आजादी की लड़ाई में बरकतउल्ला का योगदान ऐतिहासिक
ज्ञापन में मौलाना बरकतउल्ला भोपाली की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका का जिक्र करते हुए मसूद ने कहा कि उन्होंने जापान में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए काम किया। वर्ष 1913 में लाला हरदयाल के साथ गदर पार्टी से जुड़े और पार्टी के समाचार पत्र में देशभक्ति से संबंधित लेख लिखे। उन्होंने कहा कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1 दिसंबर 1915 को काबुल में गठित स्वतंत्र भारत की निर्वासित अंतरिम सरकार में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राष्ट्रपति और मौलाना बरकतउल्ला भोपाली प्रधानमंत्री बने थे। भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से उन्होंने रूस में लेनिन से भी मुलाकात की थी।
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विदेशों में भी मिला सम्मान, अमेरिका में है कब्र
मसूद ने ज्ञापन में कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली की कब्र अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में है, जहां उन्हें भारतीय राष्ट्रवादी नेता के रूप में सम्मान दिया गया है। उनकी मृत्यु के बाद जर्मनी, रूस, जापान, तुर्की, ईरान और अफगानिस्तान समेत कई देशों में श्रद्धांजलि दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
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राज्यपाल से नाम बदलने की प्रक्रिया रोकने की मांग
आरिफ मसूद ने राज्यपाल से मांग की कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने संबंधी प्रस्ताव पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय की पहचान बनाए रखना देश के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के प्रति सम्मान से जुड़ा विषय है। मसूद ने साफ किया कि वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय नाम से नई संस्था बनाए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मौजूदा बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलना स्वीकार्य नहीं है।
