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ट्विशा मौत कांड पर महिलाओं का फूटा गुस्साः समय रहते सुन लेते माता-पिता तो बच जाती जान, निष्पक्ष जांच की मांग
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 21 May 2026 06:30 PM IST
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सार
भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले ने बड़ा रूप ले लिया है। राजधानी की महिलाओं ने इस घटना को परिवारों में संवाद की कमी, मानसिक दबाव और बेटियों की बात को गंभीरता से न लेने से जोड़ते हुए चिंता जताई। महिलाओं ने कहा कि समय रहते परिवार साथ दे तो ऐसे हादसे टाले जा सकते हैं।
डॉ. अंकिता वर्मा और फरीन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में रहने वाली ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस जहां दहेज हत्या के एंगल से जांच में जुटी है, वहीं अब इस मामले को लेकर महिलाओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। राजधानी की कई महिलाओं ने इस घटना को केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि परिवारों में बढ़ते संवादहीनता, मानसिक दबाव और सामाजिक डर का परिणाम बताया है।महिलाओं ने साफ कहा कि अगर समय रहते बेटियों की बात को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें समझौता करो कहने के बजाय समर्थन दिया जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
बेटी मदद मांग रही हो तो उसे अकेला मत छोड़िए
भोपाल की डॉ. अंकिता वर्मा ने कहा कि अक्सर लड़कियां शादी के बाद अपनी परेशानियों के संकेत परिवार को देती हैं, लेकिन कई बार उन्हें एडजस्ट करने की सलाह देकर चुप करा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब मामला बिगड़ जाता है और लड़की दुनिया छोड़ देती है, तब इंसाफ की लड़ाई का कोई मतलब नहीं रह जाता, क्योंकि खोई हुई जिंदगी वापस नहीं लाई जा सकती। डॉ. वर्मा ने माता-पिता से अपील की कि शादी के बाद भी बच्चों से लगातार संवाद बनाए रखें और उनकी भावनात्मक स्थिति को समझें।
माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी बन रही खतरा
डॉ. मुशफिक ने कहा कि आज युवाओं में मानसिक दबाव, चिंता और अकेलेपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई बार बच्चे अपनी परेशानियां परिवार से छिपाते हैं और माता-पिता भी शुरुआत में उन्हें खुद समस्या सुलझाने की सलाह देकर गंभीरता से नहीं लेते।
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उन्होंने कहा कि अगर समय रहते उचित परामर्श और भावनात्मक सहयोग मिल जाए तो कई बड़े हादसे टाले जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, लेकिन युवाओं में नशे और मानसिक तनाव की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय है।
लड़कियों को बोलने का हक और परिवार का साथ दोनों जरूरी
भोपाल निवासी फरीन ने कहा कि शादी से पहले और बाद में लड़कियों की राय और मानसिक स्थिति को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई लड़कियां समाज और परिवार की प्रतिक्रिया के डर से खुलकर अपनी बात नहीं कह पातीं। फरीन के मुताबिक, अगर बेटी किसी रिश्ते में असहज है तो परिवार को बिना झिझक उसका साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पढ़ी-लिखी महिलाओं को भी कई बार अपनी आवाज उठाने में डर लगता है, क्योंकि उन्हें यह भरोसा नहीं होता कि परिवार और समाज उनका समर्थन करेंगे।
यह भी पढ़ें-क्या पद से हटेंगी ट्विशा की सास गिरिबाला? विभाग हुआ सख्त; विवेक तन्खा ने कहा- मामला सीबीआई को देना उपयुक्त
सीबीआई जांच की उठने लगी मांग
ट्विशा शर्मा के परिजन अब इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई सवाल हैं और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम और अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
यह भी पढ़ें-गिरिबाला सिंह पर शिकंजा? सास की जमानत रद्द कराने परिजनों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा; जानें
क्या है पूरा मामला?
नोएडा निवासी 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा ने दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी अधिवक्ता समर्थ सिंह से विवाह किया था। समर्थ सिंह पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। ट्विशा मॉडलिंग की दुनिया से जुड़ी थीं और मिस पुणे का खिताब भी जीत चुकी थीं। 12 मई को बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित ससुराल में ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज किया है।फिलहाल पति समर्थ सिंह फरार हैं और पुलिस ने उन पर 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। वहीं गिरिबाला सिंह को जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। मामला अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
बेटी मदद मांग रही हो तो उसे अकेला मत छोड़िए
भोपाल की डॉ. अंकिता वर्मा ने कहा कि अक्सर लड़कियां शादी के बाद अपनी परेशानियों के संकेत परिवार को देती हैं, लेकिन कई बार उन्हें एडजस्ट करने की सलाह देकर चुप करा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब मामला बिगड़ जाता है और लड़की दुनिया छोड़ देती है, तब इंसाफ की लड़ाई का कोई मतलब नहीं रह जाता, क्योंकि खोई हुई जिंदगी वापस नहीं लाई जा सकती। डॉ. वर्मा ने माता-पिता से अपील की कि शादी के बाद भी बच्चों से लगातार संवाद बनाए रखें और उनकी भावनात्मक स्थिति को समझें।
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माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी बन रही खतरा
डॉ. मुशफिक ने कहा कि आज युवाओं में मानसिक दबाव, चिंता और अकेलेपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई बार बच्चे अपनी परेशानियां परिवार से छिपाते हैं और माता-पिता भी शुरुआत में उन्हें खुद समस्या सुलझाने की सलाह देकर गंभीरता से नहीं लेते।
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लड़कियों को बोलने का हक और परिवार का साथ दोनों जरूरी
भोपाल निवासी फरीन ने कहा कि शादी से पहले और बाद में लड़कियों की राय और मानसिक स्थिति को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई लड़कियां समाज और परिवार की प्रतिक्रिया के डर से खुलकर अपनी बात नहीं कह पातीं। फरीन के मुताबिक, अगर बेटी किसी रिश्ते में असहज है तो परिवार को बिना झिझक उसका साथ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पढ़ी-लिखी महिलाओं को भी कई बार अपनी आवाज उठाने में डर लगता है, क्योंकि उन्हें यह भरोसा नहीं होता कि परिवार और समाज उनका समर्थन करेंगे।
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सीबीआई जांच की उठने लगी मांग
ट्विशा शर्मा के परिजन अब इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई सवाल हैं और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम और अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
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क्या है पूरा मामला?
नोएडा निवासी 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा ने दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी अधिवक्ता समर्थ सिंह से विवाह किया था। समर्थ सिंह पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। ट्विशा मॉडलिंग की दुनिया से जुड़ी थीं और मिस पुणे का खिताब भी जीत चुकी थीं। 12 मई को बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित ससुराल में ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज किया है।फिलहाल पति समर्थ सिंह फरार हैं और पुलिस ने उन पर 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। वहीं गिरिबाला सिंह को जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। मामला अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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