सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Chambal Gharial Conservation Centre Welcomes 54 New Gharial Hatchlings news in Hindi

चंबल से आई खुशखबरी: 95 अंडों में से 54 घड़ियाल शावकों का जन्म, गुलजार हुआ संरक्षण केंद्र; बड़ी सफलता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना Published by: Sabahat Husain Updated Thu, 04 Jun 2026 05:21 PM IST
विज्ञापन
सार

मुरैना के देवरी घड़ियाल संरक्षण केंद्र में 95 अंडों में से 54 घड़ियाल शावकों का सफल जन्म हुआ है। नवजात शावकों को विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया है। इस उपलब्धि से केंद्र में कुल 153 शावक हो गए हैं, जिससे घड़ियाल संरक्षण अभियान को बड़ी मजबूती मिली है।

Chambal Gharial Conservation Centre Welcomes 54 New Gharial Hatchlings news in Hindi
घड़ियाल संरक्षण में ऐतिहासिक उपलब्धि - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

चंबल की पहचान सिर्फ बीहड़ों और डकैतों से नहीं, बल्कि दुर्लभ घड़ियालों से भी है और अब चंबल से एक अच्छी खबर सामने आई है। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके घड़ियालों के संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है। मुरैना के देवरी घड़ियाल संरक्षण केंद्र में 95 अंडों में से 54 घड़ियाल शावकों ने जन्म लिया है। इसे चंबल में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।



राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में घड़ियाल संरक्षण अभियान लगातार नए कीर्तिमान बना रहा है। इस बार देवरी घड़ियाल संरक्षण केंद्र में 54 नए घड़ियाल शावकों के जन्म ने वन विभाग की मेहनत को नई सफलता दिलाई है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि घड़ियाल दुनिया की सबसे संकटग्रस्त मगरमच्छ प्रजातियों में शामिल हैं। वन विभाग की टीम ने बाबू सिंह घेर क्षेत्र से घड़ियाल के 95 अंडों को सुरक्षित तरीके से एकत्रित कर देवरी स्थित हैचरी में शिफ्ट किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


वैज्ञानिक पद्धति से उनकी निगरानी और संरक्षण किया गया। इसी का परिणाम है कि अब तक 54 स्वस्थ घड़ियाल शावक अंडों से बाहर आ चुके हैं। नवजात घड़ियाल शावकों को फिलहाल क्वारेंटाइन में रखा गया है। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में उनके स्वास्थ्य, खानपान और विकास पर लगातार नजर रखी जा रही है। ताकि उन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने से पहले पूरी तरह सुरक्षित और सक्षम बनाया जा सके। इन नए शावकों के जन्म के बाद देवरी घड़ियाल केंद्र में कुल घड़ियाल शावकों की संख्या बढ़कर 153 हो गई है। यह संख्या बताती है कि चंबल में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम लगातार सकारात्मक परिणाम दे रहा है।
विज्ञापन
Trending Videos


पढ़ें: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम पर सियासी संग्राम: कांग्रेस, भाजपा, छात्र संगठन और हिंदू संगठन आमने-सामने

वन विभाग का कहना है कि अंडों का संरक्षण, हैचिंग और शावकों की वैज्ञानिक देखभाल भविष्य में चंबल नदी में घड़ियालों की आबादी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। यह सफलता न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण अभियान के लिए उत्साहजनक संकेत मानी जा रही है। चंबल की लहरों में अब 54 नई जिंदगियां जुड़ गई हैं। ये नन्हे घड़ियाल आने वाले समय में चंबल की जैव विविधता को और समृद्ध करेंगे। संरक्षण की यह सफलता बताती है कि अगर प्रयास लगातार हों, तो विलुप्ति की कगार पर खड़ी प्रजातियों को भी नया जीवन दिया जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed