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Chhindwara News: स्कूटी की डिक्की में 15 लीटर की केन नहीं आ सकती; कोर्ट ने माना मामला फर्जी, TI पर FIR के आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो Updated Thu, 12 Feb 2026 03:58 PM IST
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सार

परासिया में 2020 के अवैध शराब प्रकरण में न्यायालय ने पुलिस की कहानी को झूठा मानते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया। जांच अधिकारी की स्वीकारोक्ति के बाद अदालत ने झूठा अभियोग पत्र पाए जाने पर जांच अधिकारी और तत्कालीन टीआई के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। 

15-litre can't come in Scooty's Dicky: Court admits case fake, FIR ordered against TI
टीआई जगेत
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विस्तार

वर्ष 2020 में दर्ज अवैध शराब परिवहन के एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल डोंगरे ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच अधिकारी और तत्कालीन थाना प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान पूरे प्रकरण को झूठा करार देते हुए दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

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मामले के अनुसार, 8 जुलाई 2020 को परासिया पुलिस ने मैग्जीन लाइन निवासी संतोष पिता पूरनलाल डेहरिया (30) और रंजीत पिता पूरनलाल डेहरिया (34) के खिलाफ 54 लीटर अवैध शराब परिवहन का मामला दर्ज किया था। पुलिस का आरोप था कि स्कूटी (जुपिटर) के आगे 22-22 लीटर की केन और डिक्की में 15 लीटर की कुप्पी रखकर शराब ले जाई जा रही थी। इसी आधार पर दोनों के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत कार्रवाई की गई।
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सुनवाई के दौरान मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब स्वयं जांच अधिकारी ने न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि स्कूटी की डिक्की में 15 लीटर की कुप्पी समाना संभव नहीं है। इस स्वीकारोक्ति को आधार बनाते हुए न्यायालय ने अभियोजन की कहानी पर संदेह जताया और पूरे मामले को मनगढ़ंत माना। अदालत ने संतोष और रंजीत डेहरिया को बरी करते हुए टिप्पणी की कि न्यायालय सच्चाई सामने आने के बाद मूकदर्शक नहीं रह सकता। उल्लेखनीय है कि इस कथित झूठे प्रकरण में संतोष डेहरिया को 51 दिन और रंजीत डेहरिया को 41 दिन जेल में बिताने पड़े।

न्यायालय ने पाया कि पुलिस द्वारा झूठा अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह राजपूत और तत्कालीन टीआई सुमेर सिंह जगेत के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 166, 167, 193, 196, 197, 198, 199, 200, 209 और 219 के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश कोतवाली टीआई को दिए हैं। इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की चर्चा क्षेत्र में तेज हो गई है।

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