सरकारी लापरवाही का अजूबा: छिंदवाड़ा में घर के बीचों-बीच खड़ा है बिजली का पोल, जान हथेली पर रखकर जी रहा परिवार
छिंदवाड़ा के पालाखेड़ में एक गरीब परिवार 28 वर्षों से घर के बीच लगे हाई-टेंशन बिजली के खंभे के साये में रहने को मजबूर है। पीड़ित का आरोप है कि निर्माण के दौरान विभाग ने नींव में पोल गाड़ दिया। अब बिजली कंपनी खंभा हटाने के लिए 40 हजार रुपये मांग रही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से सरकारी विभागों की घोर लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मोहखेड़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पालाखेड़ वार्ड क्रमांक 8 में बिजली कंपनी की मनमानी के कारण एक गरीब परिवार पिछले 28 साल से मौत के साए में रहने को मजबूर है। यहां रहने वाले राजू कुसनेकर के मकान के ठीक बीचों-बीच हाई-टेंशन बिजली का खंभा खड़ा है।
अनुपस्थिति का उठाया फायदा, नींव में गाड़ दिया पोल
पीड़ित राजू कुसनेकर (स्वच्छता साथी) को साल 1998 में शासन से पट्टे की जमीन और इंदिरा आवास योजना के तहत 24 हजार रुपये की सहायता राशि मिली थी। मकान की नींव तैयार होने के बाद राजू किसी पारिवारिक काम से 15 दिनों के लिए गांव से बाहर गए थे। इसी दौरान बिजली कंपनी ने उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर मकान की नींव के अंदर ही बिजली का खंभा गाड़ दिया। वापस लौटने पर अधिकारियों ने खंभा हटाने का झूठा आश्वासन दिया, जिसके भरोसे राजू ने मकान का निर्माण पूरा कर लिया।
ये भी पढ़ें- मोहन सरकार का बड़ा फेरबदल, लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस, आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी
24 हजार का मकान, पोल हटाने का खर्च 40 हजार
आज स्थिति यह है कि विभाग अपनी गलती सुधारने के बजाय पीड़ित से ही खंभा शिफ्ट करने के लिए 40 हजार रुपये मांग रहा है, जो कि मकान की मूल लागत से दोगुनी है। राजू की पत्नी का निधन हो चुका है और वे आर्थिक तंगी के कारण अपने तीन बच्चों के साथ इसी खतरनाक घर में रहने को मजबूर हैं। मकान की छत टीन की है, जिससे बारिश और तेज हवा के दौरान खंभे से होने वाली स्पार्किंग से पूरे घर में करंट उतरने और आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।
अधिकारी बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई
पीड़ित ने कई बार बिजली और राजस्व विभाग के चक्कर काटे, लेकिन हर बार अधिकारी यह कहकर मामला टाल देते हैं कि 'पहले घर बना था या पोल'। इस मामले में सवारी बाजार बिजली सब स्टेशन के जूनियर इंजीनियर कृष्णा ऊइके का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। किन परिस्थितियों में घर के अंदर पोल लगा, इसकी जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया है। उनके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या इस गरीब परिवार को न्याय देता है।

मकान के बीच में खड़ा हाई टेंशन लाइन का खंभा।

मकान के बीच में खड़ा हाई टेंशन लाइन का खंभा।
