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छिंदवाड़ा कप सिरप कांड: SIT ने दाखिल किया पूरक व अंतिम चालान, दो और डॉक्टर गिरफ्तार; अब जानें किस पर टिकी नजर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 10:53 AM IST
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सार
छिंदवाड़ा के कोल्ड्रिफ कफ सिरप कांड में 23 बच्चों की मौत के मामले में एसआईटी ने पूरक और अंतिम चालान न्यायालय में पेश कर दिया है, जांच पूरी होने की पुष्टि की गई।
जहरीले कफ सिरप कांड में अंतिम चालान पेश।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छिंदवाड़ा के कोयलांचल क्षेत्र में 23 बच्चों की मौत से जुड़े कोल्ड्रिफ जहरीले कफ सिरप कांड में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को पूरक और अंतिम चालान न्यायालय में पेश कर दिया। इस चालान में पहले आरोप पत्र के बाद हुई दो और शिशु रोग विशेषज्ञों डॉ. एस.एस. ठाकुर और अमन सिद्दीकी की गिरफ्तारी के साथ जब्त दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का विवरण शामिल है। पुलिस ने इसे जांच की अंतिम कड़ी बताया है।
चार अक्तूब 2025 को दर्ज हुआ था मामला
मामले की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब परासिया के बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत पर थाना परासिया में प्रकरण दर्ज किया गया। शुरुआती जांच में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद तमिलनाडु से जुड़े तीन आरोपियों सहित कुल नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई। इन आधारों पर एसआईटी ने पहला चालान न्यायालय में पेश किया था।
दो और डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद अंतिम चालान
जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने डॉ. एस.एस. ठाकुर और अमन सिद्दीकी को भी गिरफ्तार किया। इन गिरफ्तारियों के बाद पूरक और अंतिम चालान न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है। इससे जांच प्रक्रिया को पूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट में कफ सिरप को जिम्मेदार ठहराया
जिन बच्चों की मौत हुई और जिनका पोस्टमार्टम कराया गया, उनमें समान लक्षण पाए गए। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में सामने आया कि सभी मामलों में क्लीनिकल पैटर्न एक जैसा था, जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि मौत का कारण जहरीला कफ सिरप ही रहा। इस रिपोर्ट ने जांच को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
पीड़ित पक्ष ने लगाए लापरवाही के आरोप
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि स्टेशन रोड परासिया के एक अन्य डॉक्टर ने भी बीमार बच्चों को यही कफ सिरप लेने की सलाह दी थी, जिससे कई बच्चों की हालत बिगड़ी और किडनी फेल होने तक की नौबत आ गई। आरोप है कि एसआईटी ने उक्त डॉक्टर के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि उसके क्लीनिक के सामने स्थित दो मेडिकल स्टोर सील किए जा चुके हैं। पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि न्यायालय के निर्देश पर इस मामले में आरोपियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उनका दावा है कि जांच के कुछ पहलुओं पर अभी और कार्रवाई की जरूरत है।
ये भी पढ़ें- MP Board 5th 8th Result 2026: आज आएगा 5वीं-8वीं बोर्ड का परिणाम, दोपहर एक बजे शिक्षा मंत्री करेंगे जारी
एसआईटी प्रमुख का बयान
एसआईटी प्रमुख एवं डीएसपी जितेंद्र जाट ने कहा कि पुलिस विवेचना पूरी कर ली गई है। सभी साक्ष्यों, बयानों और जांच के आधार पर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।
इस बहुचर्चित मामले में अब आगे की कार्रवाई न्यायालय में होगी। 23 बच्चों की मौत से जुड़े इस प्रकरण में पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद है, वहीं यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और दवा वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।
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चार अक्तूब 2025 को दर्ज हुआ था मामला
मामले की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब परासिया के बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम की शिकायत पर थाना परासिया में प्रकरण दर्ज किया गया। शुरुआती जांच में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद तमिलनाडु से जुड़े तीन आरोपियों सहित कुल नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई। इन आधारों पर एसआईटी ने पहला चालान न्यायालय में पेश किया था।
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दो और डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद अंतिम चालान
जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने डॉ. एस.एस. ठाकुर और अमन सिद्दीकी को भी गिरफ्तार किया। इन गिरफ्तारियों के बाद पूरक और अंतिम चालान न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है। इससे जांच प्रक्रिया को पूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट में कफ सिरप को जिम्मेदार ठहराया
जिन बच्चों की मौत हुई और जिनका पोस्टमार्टम कराया गया, उनमें समान लक्षण पाए गए। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में सामने आया कि सभी मामलों में क्लीनिकल पैटर्न एक जैसा था, जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि मौत का कारण जहरीला कफ सिरप ही रहा। इस रिपोर्ट ने जांच को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
पीड़ित पक्ष ने लगाए लापरवाही के आरोप
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि स्टेशन रोड परासिया के एक अन्य डॉक्टर ने भी बीमार बच्चों को यही कफ सिरप लेने की सलाह दी थी, जिससे कई बच्चों की हालत बिगड़ी और किडनी फेल होने तक की नौबत आ गई। आरोप है कि एसआईटी ने उक्त डॉक्टर के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि उसके क्लीनिक के सामने स्थित दो मेडिकल स्टोर सील किए जा चुके हैं। पीड़ित पक्ष के वकील संजय पटोरिया का कहना है कि न्यायालय के निर्देश पर इस मामले में आरोपियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। उनका दावा है कि जांच के कुछ पहलुओं पर अभी और कार्रवाई की जरूरत है।
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एसआईटी प्रमुख का बयान
एसआईटी प्रमुख एवं डीएसपी जितेंद्र जाट ने कहा कि पुलिस विवेचना पूरी कर ली गई है। सभी साक्ष्यों, बयानों और जांच के आधार पर चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है।
इस बहुचर्चित मामले में अब आगे की कार्रवाई न्यायालय में होगी। 23 बच्चों की मौत से जुड़े इस प्रकरण में पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद है, वहीं यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और दवा वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।
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