ममलेश्वर मंदिर दान विवाद: कलेक्टर बोले- वीडियोग्राफी के बीच होती है गिनती, पूरी राशि बैंक खाते में होती है जमा
ममलेश्वर मंदिर की दान राशि के सार्वजनिक लेखा-जोखा को लेकर सवाल उठने पर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने स्पष्ट किया कि हर 15 दिन में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी और वीडियोग्राफी के साथ गणना होती है। राशि बैंक खाते में जमा कर विकास कार्यों व सिंहस्थ-2028 तैयारियों पर खर्च की जा रही है।
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विस्तार
देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में चौथा ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में स्थित है। मां नर्मदा के दक्षिणी तट पर विराजमान भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन, पूजन और नर्मदा स्नान के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से करीब एक वर्ष पहले जिला प्रशासन ने ममलेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति (ट्रस्ट) का गठन किया था तथा मंदिर परिसर में दान पेटियां स्थापित की गई थीं।
हालांकि, ट्रस्ट के गठन के बाद से दान पेटियों में प्राप्त राशि और उसके उपयोग का विस्तृत सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी नहीं होने पर स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हाल के दिनों में देश के अन्य धार्मिक संस्थानों में चंदे को लेकर हुई चर्चाओं के बीच ममलेश्वर मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा तेज हुई है।
ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व
ओंकारेश्वर स्थित भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर दोनों ज्योतिर्लिंगों का धार्मिक महत्व समान माना जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में भी दोनों का समान रूप से उल्लेख मिलता है। ममलेश्वर मंदिर का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जाता है। देवी अहिल्याबाई होलकर की परंपरा के अनुसार करीब 300 वर्षों से यहां नियमित रूप से तीनों समय पूजा-अर्चना और आरती की परंपरा आज भी निभाई जा रही है।
ट्रस्ट गठन के बाद उठे पारदर्शिता के सवाल
तत्कालीन पुनासा एसडीएम शिवम प्रजापति के कार्यकाल में जिला प्रशासन के निर्देश पर मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया गया था। प्रशासन ने उस समय बताया था कि श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि का उपयोग मंदिर परिसर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
स्थानीय लोगों, मंदिर प्रबंधन समिति के कुछ सदस्यों, संत समाज और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि दान पेटियां प्रत्येक माह खोली जाती हैं, लेकिन अब तक कुल प्राप्त राशि, बैंक खाते में जमा राशि और खर्च का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उनका मानना है कि समय-समय पर आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण जारी होने से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।
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मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य दूल्हे सिंह दरबार का कहना है कि दान पेटियां नियमित रूप से खोली जाती हैं और राशि की जानकारी मौखिक रूप से दी जाती है। बैंक खाते में राशि जमा होने के एसएमएस भी प्राप्त होते हैं, लेकिन विस्तृत वित्तीय विवरण समिति के सभी सदस्यों को उपलब्ध नहीं कराया जाता।
कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने दिया स्पष्टीकरण
खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने इन सवालों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि ममलेश्वर मंदिर की दान पेटियों की गणना प्रत्येक 15 दिन में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के साथ कराई जाती है। इसके बाद पूरी राशि मंदिर प्रबंधन समिति के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि इस राशि का उपयोग मंदिर कर्मचारियों के वेतन, मंदिर परिसर के विकास कार्यों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार तथा सिंहस्थ-2028 की तैयारियों से जुड़े कार्यों में किया जा रहा है।
कलेक्टर के अनुसार, सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर के विकास के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जा चुका है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, जूता घर, प्रशासनिक भवन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े अन्य विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है और समिति की नियमित बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं।
गौरतलब है कि ओंकारेश्वर के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की दान पेटियों में पिछले एक वर्ष से जमा हो रही राशि के आय-व्यय को सार्वजनिक नहीं किए जाने पर अमर उजाला ने इस मामले को लेकर खबर भी प्रकाशित की थी।
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