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Indore News: 12वीं के होनहार छात्र की मौत पर कोर्ट का बड़ा फैसला, परिजनों को 30 लाख रुपये मुआवजा

Mon, 06 Jul 2026 04:50 PM IST
इंदौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: इंदौर ब्यूरो Updated Mon, 06 Jul 2026 04:50 PM IST
सार

इंदौर में 12वीं के छात्र सुजल पटेल की सड़क हादसे में मौत के मामले में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। 89% अंक और उज्ज्वल भविष्य को आधार मानते हुए बीमा कंपनी को परिजनों को ब्याज सहित करीब 30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

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Following the death of a minor in an accident, the court ordered the payment of lakhs of rupees
court

विस्तार

इंदौर के गांधीनगर थाना क्षेत्र में 24 अप्रैल 2024 को हुए एक सड़क हादसे में 12वीं कक्षा के छात्र सुजल पटेल की मौत हो गई थी। अब इस मामले में जिला न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संबंधित बीमा कंपनी को मृतक के परिजनों को 27 लाख रुपये मुआवजा और घटना की तारीख से आदेश की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करीब 30 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

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मृतक के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता दीपक गुर्जर ने बताया कि सुजल पटेल अपने दोस्त मयंक के साथ बाइक से 12वीं का रिजल्ट देखने स्कूल जा रहा था। घर से कुछ ही दूरी पर एक तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में सुजल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मयंक को मामूली चोटें आईं।

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घटना के बाद गांधीनगर थाना पुलिस ने कार चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। वहीं, सुजल के परिजनों ने मुआवजे के लिए जिला न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया।

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सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दीपक गुर्जर ने अदालत को बताया कि सुजल एक मेधावी छात्र था। हादसे के बाद घोषित हुए 12वीं के परीक्षा परिणाम में उसे 89 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। उन्होंने तर्क दिया कि इससे स्पष्ट होता है कि सुजल का भविष्य उज्ज्वल था और उसके माता-पिता को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। साथ ही वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने अदालत में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि मृतक नाबालिग था और उसकी कोई आय नहीं थी, इसलिए इतनी बड़ी मुआवजा राशि नहीं दी जानी चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने सुजल की शैक्षणिक उपलब्धियों और संभावित भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसकी अनुमानित मासिक आय 16 से 18 हजार रुपये के बीच मानते हुए मुआवजे की गणना की। इसके आधार पर अदालत ने बीमा कंपनी को ब्याज सहित करीब 30 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।

अधिवक्ता दीपक गुर्जर का दावा है कि नाबालिग छात्र की शैक्षणिक योग्यता और संभावित आय को आधार बनाकर इस प्रकार का मुआवजा निर्धारित करने का यह अपने तरह का पहला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

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