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MP: भाजपा नेता देवेंद्र केस में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, यहां किया घेराव; कौन दे रहा आरोपियों को संरक्षण?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2026 04:07 PM IST
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सार
दमोह में भाजपा नेता देवेंद्र सिंह राजपूत हत्याकांड को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद ग्रामीणों ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और बुलडोजर कार्रवाई की मांग उठाई।
देवेंद्र राजपूत केस में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दमोह में भाजपा नेता देवेंद्र सिंह राजपूत हत्याकांड अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस द्वारा मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी किए जाने के बाद भी ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हो रहा है। एक आरोपी अब भी फरार बताया जा रहा है, जबकि घटना में अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर नए आरोप सामने आने लगे हैं। इसी को लेकर गुरुवार दोपहर ग्राम बरवासा के ग्रामीण बड़ी संख्या में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे, जहां जमकर हंगामे जैसे हालात बन गए।
ग्रामीणों ने एसपी आनंद कलादगी के नाम सीएसपी एचआर पांडे को ज्ञापन सौंपते हुए कथित षड्यंत्रकारियों को आरोपी बनाए जाने, फरार अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी और आरोपियों के अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि देवेंद्र राजपूत की मौत कोई सड़क हादसा नहीं बल्कि पहले से रची गई साजिश थी। ज्ञापन में रमेश, दुर्गेश, नरेश, धर्मवीर, रणवीर समेत कई लोगों के नाम लेते हुए कहा गया कि सभी ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से कार से कुचलकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। ग्रामीणों ने दावा किया कि आरोपी लंबे समय से मृतक की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और मौका मिलते ही वारदात को अंजाम दिया गया।
पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज
यह भी आरोप लगाया कि आरोपी क्षेत्र में वर्चस्व कायम करने के लिए लोगों को रास्ते में रोककर जान से मारने की धमकियां देते थे। गांव में दहशत का माहौल बनाकर कई घटनाओं को अंजाम दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन प्रभाव के चलते उन पर कठोर कार्रवाई नहीं हो सकी।
अधिवक्ता मनीष नगाइच ने कहा कि मृतक देवेंद्र राजपूत के भाई प्रवेंद्र राजपूत पेशे से अधिवक्ता हैं। अधिवक्ता संघ की ओर से पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपियों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जानी चाहिए, ताकि हत्या के पीछे की पूरी साजिश और कथित मास्टरमाइंड की भूमिका सामने आ सके।
'फरार आरोपियों को आर्थिक और रसूख का संरक्षण मिल रहा'
वहीं, अधिवक्ता मुकेश पांडे ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी पहले भी हत्या समेत कई गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि फरार आरोपियों को आर्थिक और रसूख का संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते गिरफ्तारी में देरी हो रही है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी पक्ष ने गांव और आसपास की शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जा कर मकान बना रखे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे कब्जों पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई करने और अवैध निर्माण हटाने की मांग की।
ये भी पढ़ें- देवास फैक्टरी हादसा: गंभीर रूप से झुलसे कई मरीज इंदौर रेफर, पांच की हालत नाजुक; 9 घायल देवास में इलाजरत
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है। लोग स्वयं अवैध कब्जों और मकानों को ध्वस्त करने पर विवश होने। उनका कहना था कि आरोपी पक्ष के भय से लोग खुलकर सामने आने से भी डर रहे हैं।
मौके पर ज्ञापन लेते हुए सीएसपी एचआर पांडे ने कहा कि पुलिस आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। अवैध कब्जों के संबंध में राजस्व विभाग को अवगत कराया जाएगा। साथ ही आदतन अपराधियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बुलडोजर कार्रवाई प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही संभव होगी। जांच के बाद अवैध कब्जों को हटाने की कार्यवाही की जाएगी।
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ग्रामीणों ने एसपी आनंद कलादगी के नाम सीएसपी एचआर पांडे को ज्ञापन सौंपते हुए कथित षड्यंत्रकारियों को आरोपी बनाए जाने, फरार अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी और आरोपियों के अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग की।
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ग्रामीणों का आरोप है कि देवेंद्र राजपूत की मौत कोई सड़क हादसा नहीं बल्कि पहले से रची गई साजिश थी। ज्ञापन में रमेश, दुर्गेश, नरेश, धर्मवीर, रणवीर समेत कई लोगों के नाम लेते हुए कहा गया कि सभी ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से कार से कुचलकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। ग्रामीणों ने दावा किया कि आरोपी लंबे समय से मृतक की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और मौका मिलते ही वारदात को अंजाम दिया गया।
पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज
यह भी आरोप लगाया कि आरोपी क्षेत्र में वर्चस्व कायम करने के लिए लोगों को रास्ते में रोककर जान से मारने की धमकियां देते थे। गांव में दहशत का माहौल बनाकर कई घटनाओं को अंजाम दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन प्रभाव के चलते उन पर कठोर कार्रवाई नहीं हो सकी।
अधिवक्ता मनीष नगाइच ने कहा कि मृतक देवेंद्र राजपूत के भाई प्रवेंद्र राजपूत पेशे से अधिवक्ता हैं। अधिवक्ता संघ की ओर से पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपियों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जानी चाहिए, ताकि हत्या के पीछे की पूरी साजिश और कथित मास्टरमाइंड की भूमिका सामने आ सके।
'फरार आरोपियों को आर्थिक और रसूख का संरक्षण मिल रहा'
वहीं, अधिवक्ता मुकेश पांडे ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी पहले भी हत्या समेत कई गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि फरार आरोपियों को आर्थिक और रसूख का संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते गिरफ्तारी में देरी हो रही है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी पक्ष ने गांव और आसपास की शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जा कर मकान बना रखे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे कब्जों पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई करने और अवैध निर्माण हटाने की मांग की।
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उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है। लोग स्वयं अवैध कब्जों और मकानों को ध्वस्त करने पर विवश होने। उनका कहना था कि आरोपी पक्ष के भय से लोग खुलकर सामने आने से भी डर रहे हैं।
मौके पर ज्ञापन लेते हुए सीएसपी एचआर पांडे ने कहा कि पुलिस आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। अवैध कब्जों के संबंध में राजस्व विभाग को अवगत कराया जाएगा। साथ ही आदतन अपराधियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बुलडोजर कार्रवाई प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही संभव होगी। जांच के बाद अवैध कब्जों को हटाने की कार्यवाही की जाएगी।

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