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MP: नागपंचमी पर दमोह में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, सपेरों से 20 से अधिक सांप रेस्क्यू; जंगल में छोड़े
Tue, 18 Aug 2026 10:05 AM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2026 10:05 AM IST
सार
नागपंचमी के अवसर पर दमोह में वन विभाग ने काल भैरव एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से अभियान चलाकर सपेरों के कब्जे से 20 से अधिक सांपों को रेस्क्यू किया। सांपों का चिकित्सकीय परीक्षण कराने के बाद उन्हें प्राकृतिक वातावरण में जंगल में छोड़ दिया गया। वन विभाग ने सपेरों को सांपों को पकड़कर रखने और प्रदर्शन करने से चेताया।
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रेस्क्यू किए सांपों को जंगल में छोड़ते वनकर्मी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
नागपंचमी पर्व के अवसर पर वन विभाग ने सोमवार को दमोह शहर में बड़ी कार्रवाई करते हुए सपेरों के कब्जे से 20 से अधिक सांपों को रेस्क्यू किया। वन विभाग की टीम ने काल भैरव एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर सपेरों को चिन्हित किया और उनके पास मौजूद सांपों को सुरक्षित रूप से मुक्त कराया।
कार्रवाई डीएफओ ईश्वर जरांडे और वन परिक्षेत्र अधिकारी के निर्देशन में की गई। दमोह रेंजर विक्रम चौधरी ने बताया कि नागपंचमी के दौरान कुछ सपेरे सांपों को टोकरी में रखकर लोगों के बीच प्रदर्शन के लिए लेकर पहुंचते हैं। वन्यजीवों को पकड़कर रखना और उनका प्रदर्शन करना वन्यजीव संरक्षण नियमों के दायरे में गंभीर मामला है। इसी को देखते हुए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया गया।
वन विभाग कार्यालय लाकर ली गई जानकारी
रेस्क्यू किए गए सांपों को पहले जबलपुर नाका स्थित वन विभाग कार्यालय लाया गया। यहां सपेरों से सांपों के संबंध में जानकारी ली गई और यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि उन्हें कहां से पकड़ा गया था। इसके बाद सांपों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। वन विभाग की टीम ने सभी सर्पों को सुरक्षित तरीके से जंगल में ले जाकर सोमवार शाम करीब पांच बजे प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया। अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य सर्पों को नुकसान से बचाने के साथ ही मानव-सर्प संघर्ष को कम करना है।
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सपेरों को दी गई चेतावनी
कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने सपेरों को सांपों को पकड़कर रखने, उनके साथ छेड़छाड़ करने और सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन नहीं करने की चेतावनी दी। टीम ने बताया कि सांपों को लंबे समय तक कैद में रखना उनके लिए नुकसानदायक होता है। कई बार प्रदर्शन के दौरान सर्पों के साथ क्रूरता भी की जाती है।वन विभाग ने लोगों से भी अपील की कि नागपंचमी पर सर्पों को खरीदकर घर में न रखें और न ही सपेरों से सांपों का प्रदर्शन करवाएं। घर, खेत, दुकान या अन्य स्थान पर सांप दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय वन विभाग अथवा प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
ये भी पढ़ें- एमपी के भिंड में दर्दनाक हादसा: यूपी के लखीमपुर लौटते वक्त पिकअप डंपर से टकराई, आठ मजदूरों की मौत और 25 घायल
दूध पिलाने और छेड़छाड़ से बचने की अपील
रेस्क्यू टीम ने लोगों को समझाया कि धार्मिक आस्था के चलते सांपों को दूध पिलाने या उनके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ करने से बचना चाहिए। टीम के अनुसार, ऐसी गतिविधियां सर्पों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। सपेरों द्वारा सांपों को कैद में रखकर प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए जाने से भी उनके प्राकृतिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अभियान में काल भैरव एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन के संस्थापक प्रांशुल पारोचे, विनय अहिरवार, राज असाटी, ध्रुव चौरसिया, ओम सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। टीम ने रेस्क्यू किए गए सभी सांपों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर जंगल में छोड़ दिया।
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कार्रवाई डीएफओ ईश्वर जरांडे और वन परिक्षेत्र अधिकारी के निर्देशन में की गई। दमोह रेंजर विक्रम चौधरी ने बताया कि नागपंचमी के दौरान कुछ सपेरे सांपों को टोकरी में रखकर लोगों के बीच प्रदर्शन के लिए लेकर पहुंचते हैं। वन्यजीवों को पकड़कर रखना और उनका प्रदर्शन करना वन्यजीव संरक्षण नियमों के दायरे में गंभीर मामला है। इसी को देखते हुए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया गया।
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वन विभाग कार्यालय लाकर ली गई जानकारी
रेस्क्यू किए गए सांपों को पहले जबलपुर नाका स्थित वन विभाग कार्यालय लाया गया। यहां सपेरों से सांपों के संबंध में जानकारी ली गई और यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि उन्हें कहां से पकड़ा गया था। इसके बाद सांपों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। वन विभाग की टीम ने सभी सर्पों को सुरक्षित तरीके से जंगल में ले जाकर सोमवार शाम करीब पांच बजे प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया। अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य सर्पों को नुकसान से बचाने के साथ ही मानव-सर्प संघर्ष को कम करना है।
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सपेरों को दी गई चेतावनी
कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने सपेरों को सांपों को पकड़कर रखने, उनके साथ छेड़छाड़ करने और सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन नहीं करने की चेतावनी दी। टीम ने बताया कि सांपों को लंबे समय तक कैद में रखना उनके लिए नुकसानदायक होता है। कई बार प्रदर्शन के दौरान सर्पों के साथ क्रूरता भी की जाती है।वन विभाग ने लोगों से भी अपील की कि नागपंचमी पर सर्पों को खरीदकर घर में न रखें और न ही सपेरों से सांपों का प्रदर्शन करवाएं। घर, खेत, दुकान या अन्य स्थान पर सांप दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय वन विभाग अथवा प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
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दूध पिलाने और छेड़छाड़ से बचने की अपील
रेस्क्यू टीम ने लोगों को समझाया कि धार्मिक आस्था के चलते सांपों को दूध पिलाने या उनके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ करने से बचना चाहिए। टीम के अनुसार, ऐसी गतिविधियां सर्पों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। सपेरों द्वारा सांपों को कैद में रखकर प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए जाने से भी उनके प्राकृतिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अभियान में काल भैरव एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन के संस्थापक प्रांशुल पारोचे, विनय अहिरवार, राज असाटी, ध्रुव चौरसिया, ओम सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। टीम ने रेस्क्यू किए गए सभी सांपों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर जंगल में छोड़ दिया।
