कर्तव्य के दौरान अपना बायां हाथ गंवाने के बावजूद पुलिस सेवा में लौटकर जिम्मेदारी निभाने वाले दमोह जिले के बांदकपुर चौकी प्रभारी एएसआई राजेंद्र मिश्रा को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मानित किया। उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें ‘जीवन रक्षा पदक’ प्रदान किया गया।
राजेंद्र मिश्रा नवंबर 2024 में रेलवे ट्रैक पर हुए हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दो युवकों के ट्रेन से गिरने की सूचना मिलने पर वह पुलिस टीम के साथ करैया भदौली रेलवे स्टेशन के पास घटनास्थल पर पहुंचे थे। बचाव और राहत कार्य के दौरान पीछे से आई दूसरी ट्रेन की चपेट में आने से उनका बायां हाथ शरीर से अलग हो गया। हादसे में डायल-100 वाहन का पायलट भी घायल हुआ था।
गंभीर रूप से घायल मिश्रा को तत्काल अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर उपचार के लिए जबलपुर रेफर किया गया। डॉक्टरों ने कटे हुए हाथ को दोबारा जोड़ने का प्रयास किया, लेकिन संक्रमण के कारण यह संभव नहीं हो सका।
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इस गंभीर हादसे के बावजूद मिश्रा ने हौसला नहीं खोया। उपचार और स्वास्थ्य लाभ के बाद उन्होंने दोबारा पुलिस सेवा में लौटने का फैसला किया। हादसे के करीब तीन महीने बाद जनवरी 2025 में उन्हें फिर बांदकपुर चौकी की जिम्मेदारी सौंपी गई। चौकी लौटने पर स्थानीय लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया।
दमोह पुलिस अधीक्षक श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने उन्हें दोबारा बांदकपुर चौकी की जिम्मेदारी दी। शारीरिक रूप से बड़ी क्षति के बावजूद ड्यूटी पर लौटने और उसी क्षेत्र में जिम्मेदारी संभालने के उनके फैसले की पुलिस विभाग और स्थानीय लोगों ने सराहना की।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राजेंद्र मिश्रा के साहस और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की थी। उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर सब-इंस्पेक्टर बनाए जाने का निर्णय भी लिया गया। यह पदोन्नति ‘जीवन रक्षा पदक’ से अलग है।
स्वतंत्रता दिवस 2026 के राज्य स्तरीय समारोह में उन्हें गृह मंत्रालय से संबंधित ‘जीवन रक्षा पदक’ से सम्मानित किया गया। नवंबर 2024 के दर्दनाक हादसे से लेकर ड्यूटी पर वापसी और अब राज्य स्तरीय सम्मान तक राजेंद्र मिश्रा की पूरी यात्रा साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण की मिसाल बन गई है।
उन्होंने साबित किया कि मुश्किल हालात और शारीरिक क्षति भी मजबूत इच्छाशक्ति और कर्तव्य के प्रति समर्पण को नहीं रोक सकती। उनका सम्मान दमोह जिले के साथ-साथ मध्यप्रदेश पुलिस के लिए भी गौरव का विषय है।