दमोह में माइक्रो फाइनेंस कंपनी की कलेक्शन राशि लूटने के मामले में पुलिस ने मंगलवार शाम सनसनीखेज खुलासा किया। जिस युवक ने खुद को लूट का फरियादी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जांच में वही पूरी वारदात का मास्टरमाइंड निकला। उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर लूट की साजिश रची और पुलिस को गुमराह करने के लिए खुद ही लूट की कहानी बताई।
मामले का खुलासा एएसपी सुजीत सिंह भदौरिया ने मंगलवार शाम करीब चार बजे पुलिस कंट्रोल रूम में पत्रकारवार्ता के दौरान किया। इस दौरान सीएसपी एचआर पांडे और देहात थाना प्रभारी धर्मेंद्र उपाध्याय मौजूद रहे। पुलिस ने मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की निशानदेही पर लूटी गई रकम में से 1 लाख 5 हजार रुपये नकद, वारदात में इस्तेमाल बाइक और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस को बताई थी बदमाशों की कहानी
पुलिस के मुताबिक, 8 अगस्त को दमोह देहात थाना क्षेत्र की जबलपुर नाका चौकी में माइक्रो फाइनेंस कंपनी की कलेक्शन राशि लूटे जाने की सूचना मिली थी। शिकायतकर्ता घनश्याम अहिरवार (21) निवासी ग्राम पिपरिया, थाना सुरखी, जिला सागर, हाल निवासी दमोह ने पुलिस को बताया था कि वह माइक्रो फाइनेंस कंपनी की कलेक्शन राशि लेकर जा रहा था। उसके साथ कंपनी की ट्रेनी कर्मचारी जूही चंदेल भी थी। इसी दौरान दमोह बायपास के पास दो अज्ञात बाइक सवार बदमाश पहुंचे और जूही चंदेल के हाथ से कलेक्शन राशि से भरा बैग जबरन छीनकर फरार हो गए। शिकायत में बैग में करीब 1 लाख 23 हजार 800 रुपये होने की बात बताई गई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामला गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी।
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50 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे खंगाले, कॉल डिटेल से खुलने लगा राज
लूट की वारदात को चुनौती मानते हुए पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल और आसपास के रास्तों पर लगे करीब 50 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस को खुद फरियादी घनश्याम अहिरवार की गतिविधियां संदिग्ध नजर आने लगीं। इसके बाद पुलिस ने घनश्याम से पूछताछ की। शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के सामने आने के बाद पूछताछ में पूरे मामले की परतें खुलती चली गईं।
पूछताछ में कबूला गुनाह, दो साथियों के नाम भी बताए
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में घनश्याम अहिरवार ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर लूट की साजिश रचने की बात स्वीकार की। आरोपियों की पहचान संजय सौर (22) और सोहित उर्फ वीरेंद्र रजक (18) के रूप में हुई है। दोनों ग्राम पिपरिया, थाना सुरखी, जिला सागर के रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपियों ने पहले कलेक्शन की रकम के बारे में जानकारी जुटाई और इसके बाद लूट की योजना बनाई। वारदात के दौरान बाइक से पहुंचे आरोपियों ने कलेक्शन राशि वाला बैग छीन लिया। इसके बाद फरियादी ने खुद को पीड़ित बताते हुए पुलिस में लूट की शिकायत दर्ज करा दी। यानी जिस व्यक्ति से पुलिस को लूट की शिकायत मिली थी, जांच में वही वारदात की योजना बनाने और उसे अंजाम दिलाने वालों में मुख्य भूमिका में सामने आया।
लूटी गई रकम आपस में बांट ली
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों के कब्जे से कलेक्शन राशि में से 1 लाख 17 हजार 335 रुपये मिले थे। इसमें से करीब 12 हजार 335 रुपये खर्च कर दिए गए थे। इसके बाद बची हुई 1 लाख 5 हजार रुपये की राशि आरोपियों ने आपस में बांट ली थी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर यह रकम बरामद कर ली है। इसके अलावा पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल और तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार बरामद सामग्री की कुल कीमत करीब 1 लाख 83 हजार रुपये है।
तीनों आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने जेल भेजा
मामले में पुलिस ने घनश्याम अहिरवार, संजय सौर और सोहित उर्फ वीरेंद्र रजक को गिरफ्तार किया। तीनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस अब मामले में आरोपियों से जुड़ी अन्य जानकारियों और वारदात में इस्तेमाल संसाधनों की भी जांच कर रही है।
पुलिस की जांच ने पलट दी पूरी कहानी
शुरुआत में मामला दो अज्ञात बाइक सवार बदमाशों द्वारा माइक्रो फाइनेंस कंपनी की कलेक्शन राशि लूटने का दिखाई दे रहा था। लेकिन करीब 50 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल के बाद पुलिस को फरियादी की भूमिका पर संदेह हुआ। पूछताछ के बाद सामने आई कहानी ने पुलिस को भी चौंका दिया—लूट की शिकायत करने वाला ही इस पूरी वारदात की साजिश का मुख्य आरोपी निकला।