Mahashivratri 2026: धार के जामदा-भूतिया में पांडवकालीन सिदेश्वर महादेव, शिवरात्रि से शुरू होता है भगोरिया
Mahashivratri: आदिवासी बाहुल्य धार जिले के जामदा-भूतिया क्षेत्र में घने जंगलों के बीच स्थित पांडवकालीन माने जाने वाले सिदेश्वर महादेव शिवालय का जनसहयोग से जीर्णोद्धार हुआ। शिवरात्रि पर यहां भगोरिया की शुरुआत होती है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
विस्तार
आदिवासी बाहुल्य जिला धार के कुख्यात रहे जामदा-भूतिया क्षेत्र में स्थित चमत्कारिक सिदेश्वर महादेव शिवालय आज आस्था, प्रकृति और जनसहयोग का जीवंत प्रतीक बन चुका है। घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच बसे इस शिवालय तक कभी पहुंचना अत्यंत दुर्गम था, लेकिन आज यह वनवासी समुदाय सहित दूर-दराज के श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था केंद्र है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह शिवालय पांडवकालीन माना जाता है। मंदिर के पुजारी राकेश शर्मा बताते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां विश्राम कर भगवान भोलेनाथ की आराधना की थी। वर्षों पहले यहां शिवलिंग एक पहाड़ी के नीचे बने छोटे से मंदिर में स्थापित था। चारों ओर घना जंगल, पथरीली जमीन और कठिन रास्ता होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कभी कम नहीं हुई।
जनसहयोग से बदली तस्वीर
स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने मिलकर मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया। मंदिर के पूर्व पुजारी 108 रामलाल महाराज की इसमें अहम भूमिका रही। सामूहिक प्रयासों से आज यहां भव्य मंदिर, सुव्यवस्थित परिसर और हजारों फलदार एवं फूलदार वृक्षों की हरियाली विकसित की गई है। मंदिर परिसर में लगाए गए वृक्षों को आज भी कुओं के पानी से सींचा जाता है, जो सामूहिक श्रम और संरक्षण की मिसाल पेश करता है।
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पहले मंदिर तक पहुंचने के लिए कोई समुचित मार्ग नहीं था। स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के सहयोग से पहाड़ काटकर रास्ता बनाया गया। सरपंच बबलू चौहान बताते हैं कि पहले यहां आने के लिए कोई सीधा मार्ग नहीं था। ग्रामीणों ने श्रमदान कर पहाड़ काटे, तब जाकर श्रद्धालुओं के लिए रास्ता सुगम हो सका।
शिवरात्रि से भगोरिया का आगाज
महाशिवरात्रि के दिन से यहां आदिवासी लोकपर्व भगोरिया का शुभारंभ माना जाता है। आसपास के कई वन ग्रामों से मादल (ढोल) दल यहां पहुंचते हैं और मादल की थाप पर घंटों पारंपरिक नृत्य होता है। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी आयोजन को विशेष रंग देती है। आस्था, लोकसंस्कृति और उत्सव का अद्भुत संगम यहां एक साथ देखने को मिलता है।
एक समय जिस क्षेत्र को भय और बदनामी से जोड़ा जाता था, आज वही स्थान श्रद्धा का केंद्र बन गया है। घने जंगलों में बसे वनवासी, दूरस्थ गांवों के श्रद्धालु और आसपास के अंचलों से लोग शिवरात्रि पर पैदल चलकर भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन सिदेश्वर महादेव के दर्शन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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