विजयपुर के पास मालगाड़ी इंजन में लगी आग: 11 घंटे ठप रहा रेल यातायात, लोको पायलटों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
शनिवार रात मक्सी-रुठियाई खंड पर यूरिया मालगाड़ी के इंजन में आग लगने से 9 ओएचई खंभे जले। लोको पायलट कूदकर बचे। 11.30 घंटे रेल यातायात ठप रहा। डीजल इंजनों से फंसी ट्रेनें निकाली गईं। टीआरडी टीम ने रातभर काम कर शनिवार सुबह 8:20 बजे ट्रैक बहाल किया।
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शनिवार रात मक्सी-रुठियाई रेलखंड पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। एनएफएल विजयपुर प्लांट से यूरिया लेकर रुठियाई जा रही मालगाड़ी के डीजल इंजन में विजयपुर स्टेशन के पास अचानक आग लग गई। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप ले लिया और इंजन के साथ-साथ ट्रैक के ऊपर गुजर रही हाईटेंशन ओएचई लाइन को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में 9 खंभों के तार जलकर नष्ट हो गए, जिससे करीब 11 घंटे से अधिक समय तक रेल यातायात बाधित रहा।
घटना रात करीब 9:05 बजे की है। इंजन से उठती ऊंची लपटों और भीषण गर्मी को देख लोको पायलट जयपाल सिंह मीणा और सहायक लोको पायलट मुकेश कुमार मीणा ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए इंजन को बंद किया और जलती लपटों के बीच कूदकर अपनी जान बचाई। उनकी तत्परता से बड़ा हादसा टल गया।
आग इतनी भीषण थी कि ट्रैक के ऊपर लगी पूरी ओएचई लाइन पिघलकर नीचे गिर गई। इसके चलते पूरे रेलखंड में इलेक्ट्रिक इंजन ठप हो गए। रात 2:54 बजे तक ट्रैक पर फैले जले तारों को हटाया गया, जिसके बाद गुना से अतिरिक्त डीजल इंजन मंगवाकर फंसी ट्रेनों को निकाला गया। करीब 6 घंटे तक इस रूट पर ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद रहा।
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घटना की सूचना मिलते ही गुना और ब्यावरा से टावर वैगन और मेंटेनेंस मशीनें मौके पर पहुंचीं। टीआरडी और इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने रातभर कड़ी मशक्कत कर जले हुए 9 ओएचई खंभों की लाइन को हटाकर नई लाइन बिछाई। लगातार प्रयासों के बाद सुबह 8:20 बजे ट्रैक को क्लियर घोषित किया गया और बिजली आपूर्ति बहाल होने के साथ रेल यातायात सामान्य हो सका।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मालगाड़ी में यूरिया लदा था। यदि आग डिब्बों तक पहुंच जाती तो बड़ा रासायनिक हादसा हो सकता था। प्रारंभिक जांच में इंजन में तकनीकी खराबी से आग लगने की आशंका जताई गई है। मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
इस घटना के चलते भोपाल-कोटा-जयपुर रूट की कई ट्रेनें प्रभावित रहीं। कुछ ट्रेनों को डायवर्ट किया गया, जबकि कई अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से चलीं। रेलवे ने यात्रियों के लिए पानी और भोजन की व्यवस्था भी की। लोको पायलटों की सूझबूझ और रेल कर्मियों की मेहनत से एक बड़ा रेल हादसा टल गया।

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