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MP Politics: दिग्विजय के भाई का अपनी ही पार्टी पर निशाना, बोले- निर्णय नहीं ले पाना कांग्रेस की कमजोरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना Published by: रवींद्र भजनी Updated Wed, 28 Feb 2024 11:56 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने ही पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निर्णय नहीं ले पाना पार्टी की कमजोरी है। 

Digvijaya's brother targets his own party, says - Congress's weakness is not being able to take decisions
कांग्रेस के पूर्व विधायक लक्ष्मण सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने देशभर में ईडी और आयकर विभाग की कार्रवाई का समर्थन किया। साथ ही कांग्रेस में निर्णय न लेने पाने को बड़ी कमजोरी बताया। उन्होंने दावा किया कि यदि जल्दी टिकट घोषित होते हैं तो प्रदेश की 29 में से आठ-दस सीटों पर कांग्रेस आसानी से जीत सकती है।  

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गुना जिले की चाचौड़ा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक लक्ष्मण सिंह ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी को नसीहत दे दी। लक्ष्मण सिंह ने कहा कि हमारी एक कमजोरी है कि हम निर्णय नही ले पाते। प्रत्याशियों को चुनने में देर करते हैं जो हम पर भारी पड़ता है। वहीं, भाजपा पहले ही अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर देती है। गुप्त कमरे में लिए गए निर्णय सही नहीं होते, जबकि सामूहिक तौर पर लिए गए निर्णय हमेशा सही होते हैं। लक्ष्मण सिंह ने दावा किया कि यदि समय रहते पार्टी लोकसभा के उमकीदवारों की घोषणा करती है और सभी मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो मध्य प्रदेश में हम आठ से दस सीटें आसानी से जीत सकते हैं।
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भितरघात की वजह से हार रहे हैं हम
लक्ष्मण सिंह ने कांग्रेस को ही घेरते हुए कहा कि हम भितरघात की वजह से हार रहे हैं। भितरघात होता है क्योंकि हम कार्यकर्ताओं से बात नहीं करते हैं। उनसे पूछकर सामूहिकता से निर्णय लेने चाहिए। मैं पहले भी कह चुका हूं और आगे भी कहूंगा कि बंद कमरे के फैसले हमेशा गलत होते हैं। खुले मंच के फैसले हमेशा सही होते हैं। यह नहीं हो रहा है। इसी वजह से चुनावों में जो परिणाम आने चाहिए, वह नहीं आ रहे हैं। पार्टी सबकी है। पार्टी हमारी बपौती नहीं है। हम जो कुछ है, वह निष्ठावान कार्यकर्ताओं की वजह से है। पिछले चुनावों में हमने देखा कि किसी से पूछा नहीं, किसी की सुनी नहीं। एक नेता को टिकट दिया। वह पांच लाख से हारी और फिर भाजपा में चली गई। हमारी तो बात खराब हुई। हमारे कार्यकर्ता का मनोबल गिरा है। इस तरह के फैसले हमें नुकसान देते हैं। सामूहिक फैसला होना चाहिए। 

चुनाव में राम मंदिर का प्रभाव नहीं रहेगा 
पूर्व विधायक ने कहा कि कांग्रेस के पास उम्मीदवार हैं। कांग्रेस को चाहिए कि जल्दी उम्मीदवारों की घोषणा करें। इन्होंने (भाजपा ने) विधानसभा में चार महीने पहले 45 सीटों पर उम्मीदवार पहले घोषित किए। उनमें से 36 सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा के कार्यकर्ता चार महीने पहले से सक्रिय हो गए थे। हमारे यहां की दिक्कत यह है कि लटकाकर रखना है। निर्णय लेना ही नहीं है। (लोकसभा की) 29 सीटों में क्या दिक्कत है? जल्दी फैसला लेकर टिकट घोषित करें। यदि उम्मीदवार पहले घोषित करते हैं और सब मिलकर लड़ते हैं तो परिणाम अच्छे आएंगे। ऐसा नहीं होना चाहिए कि यह जीत जाएगा तो मेरा क्या होगा? विधानसभा में यह चला था। मैं जहां-जहां गया हूं, वहां राम मंदिर निर्माण का प्रभाव नहीं है। राम जी का मंदिर बन गया, वह विराज गए। राम जी के नाम पर इतने साल से वोट भी तो ले रहे हो। महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा करना चाहिए। किसानों को फसलों के दाम मिलना चाहिए। ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन्हें कांग्रेस लेकर मैदान में उतरेगी तो अच्छे परिणाम आएंगे। 

ईडी, आईटी की कार्रवाई का समर्थन
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का भी लक्ष्मण सिंह ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि वे इमानदारी का दावा करते हैं तो इतने समन मिलने के बाद भी जाते क्यों नहीं है? उन्हें ईडी के सामने जाना चाहिए। जहां तक अन्य नेताओं का सवाल है, ईडी और आईटी की कार्रवाई में कुछ नहीं मिल रहा है, यह भी नहीं है। 300-400 करोड़ रुपये नगद निकल रहे हैं। यदि कुछ नहीं मिलता तो जरूर सवाल उठाया जा सकता था। नौबत क्यों आई कि ईडी के सामने यह करना पड़ रहा है। गोविंद सिंह जी के यहां ईडी वाले गए तो उन्होंने उनका स्वागत किया। उन्हें चाय-नाश्ता कराया। उन्होंने कागजों की जांच की और फिर लौटकर नहीं आए। ईडी-आईटी हमारे देश की संस्था है, इनका सम्मान करना चाहिए। 


 

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