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Guna Incident: शादी नहीं होने की वजह से शिवभक्त ने ही की थी मंदिर में तोड़फोड़, पांच लोगों को बेवजह जेल भेजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sun, 11 Feb 2024 04:05 PM IST
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सार
मध्य प्रदेश के गुना में 31 जनवरी को शिव मंदिर में हुई तोड़फोड़ का आरोपी एक शिवभक्त ही निकला है। इस मामले में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया था। उसके बाद एक धर्म विशेष के पांच लोगों को जेल भेजा गया था।
गुना में 31 जनवरी की रात मंदिर में तोड़फोड़ करने वाला गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के गुना जिले के बमोरी में शिव मंदिर में 31 जनवरी और एक फरवरी की दरम्यानी रात को अज्ञात आरोपियों ने शिव मंदिर में तोड़फोड़ की थी। शिवलिंग को उखाड़कर मंदिर के बाहर फेंक दिया गया था। नंदी की मूर्ति भी क्षतिग्रस्त कर दी गई थी। उक्त घटना के बाद बवाल मचा। हिंदू संगठनों के लोग सड़कों पर उतर आए थे। हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के बाद इस मामले में एक धर्म विशेष के सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हालांकि, दो लोग उस समय शहर में नहीं थे। इस वजह से पांच लोगों को धारा 151 के तहत जेल भेज दिया गया था। पुलिस की जांच पूरी हुई तो पता चला कि शिव मंदिर में तोड़फोड़ एक शिवभक्त ने ही की थी। पुलिस इसके कारणों का पता लगा रही है कि उसने ऐसा क्यों किया।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार 31 जनवरी को घटना होने के बाद सात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। गुना एसपी संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि उक्त घटना की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई थी। जांच में पता चला कि शिवलिंग और मूर्तियों को क्षतिग्रस्त ग्यारसा पुत्र स्वर्गीय भूरा प्रजापति, उम्र 40 वर्ष, निवासी मरघटशाला के पास बमोरी, जिला गुना, ने किया था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
एसपी ने बताया कि पूछताछ में ग्यारसा ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उसने पुलिस को बताया कि भगवान से कई बार मांग करने के बाद भी उसकी शादी नहीं हो रही थी। 31 जनवरी की रात उसने बहुत अधिक शराब पी ली थी। उसे नशे में भगवान पर गुस्सा आ गया। रात लगभग दो बजे मंदिर के बाहर पड़े पत्थर उठाकर मंदिर में भगवान शिवजी एवं नंदी की मूर्तियों पर पटक दिए थे। इससे मूर्तियों को नुकसान पहुंचा था।
बेवजह पकड़ लाए थे धर्म विशेष के लोगों को
इस मामले में संदेह के आधार पर अनवर खान को भी आरोपी बनाया गया था। अनवर ने कहा कि इस घटना में हम सात लोगों के नाम लिए गए थे। फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य जांच में पता चला कि इन सात में से पांच लोग अपने घर पर थे। फिर दो लोग तो बाहर थे। इसके बाद भी हम पांच लोगों को तीन फरवरी तक जेल में रखा गया। हम लोग बेगुनाह थे। इसके बाद भी पुलिस ने हमें जेल भेजा था। हालांकि, बमोरी थाना प्रभारी अरविंद सिंह गौड़ का कहना है कि संदेह के आधार पर पकड़ा था। स्थिति स्पष्ट हो गई है तो फाइनल चालान पेश होगा। उसमें आरोपियों का नाम खुद-ब-खुद हट जाएगा। जो असली गुनहगार है, सिर्फ उसका ही नाम होगा। एएसपी मान सिंह ठाकुर ने कहा कि कार्रवाई बॉन्ड ओऴर के तहत की गई थी। ताकि इलाके में झगड़े न बढ़े। प्रकरण दर्ज नहीं किया गया था। इस वजह से जो हुआ, उस पर कोई खेद पुलिस नहीं जताएगी।
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पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार 31 जनवरी को घटना होने के बाद सात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। गुना एसपी संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि उक्त घटना की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई थी। जांच में पता चला कि शिवलिंग और मूर्तियों को क्षतिग्रस्त ग्यारसा पुत्र स्वर्गीय भूरा प्रजापति, उम्र 40 वर्ष, निवासी मरघटशाला के पास बमोरी, जिला गुना, ने किया था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
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एसपी ने बताया कि पूछताछ में ग्यारसा ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उसने पुलिस को बताया कि भगवान से कई बार मांग करने के बाद भी उसकी शादी नहीं हो रही थी। 31 जनवरी की रात उसने बहुत अधिक शराब पी ली थी। उसे नशे में भगवान पर गुस्सा आ गया। रात लगभग दो बजे मंदिर के बाहर पड़े पत्थर उठाकर मंदिर में भगवान शिवजी एवं नंदी की मूर्तियों पर पटक दिए थे। इससे मूर्तियों को नुकसान पहुंचा था।
बेवजह पकड़ लाए थे धर्म विशेष के लोगों को
इस मामले में संदेह के आधार पर अनवर खान को भी आरोपी बनाया गया था। अनवर ने कहा कि इस घटना में हम सात लोगों के नाम लिए गए थे। फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य जांच में पता चला कि इन सात में से पांच लोग अपने घर पर थे। फिर दो लोग तो बाहर थे। इसके बाद भी हम पांच लोगों को तीन फरवरी तक जेल में रखा गया। हम लोग बेगुनाह थे। इसके बाद भी पुलिस ने हमें जेल भेजा था। हालांकि, बमोरी थाना प्रभारी अरविंद सिंह गौड़ का कहना है कि संदेह के आधार पर पकड़ा था। स्थिति स्पष्ट हो गई है तो फाइनल चालान पेश होगा। उसमें आरोपियों का नाम खुद-ब-खुद हट जाएगा। जो असली गुनहगार है, सिर्फ उसका ही नाम होगा। एएसपी मान सिंह ठाकुर ने कहा कि कार्रवाई बॉन्ड ओऴर के तहत की गई थी। ताकि इलाके में झगड़े न बढ़े। प्रकरण दर्ज नहीं किया गया था। इस वजह से जो हुआ, उस पर कोई खेद पुलिस नहीं जताएगी।

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