गुना हवाला कांड: कैश से भरी गाड़ी पकड़ी, फिर छोड़ी...फोन आया और पलट गई पूरी कहानी; जांच में खुल रहे राज
Guna News: गुना में संदिग्ध हवाला प्रकरण में स्कॉर्पियो से करोड़ों नकदी मिलने के बाद पुलिस पर 20 लाख लेकर छोड़ने के आरोप लगे हैं। फोन आने पर रकम लौटाई गई। बार-बार एक ही रूट पर आवाजाही से मामला और गंभीर बन गया है।
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मध्य प्रदेश के गुना जिला में सामने आए कथित हवाला प्रकरण ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुजरात नंबर की एक संदिग्ध स्कॉर्पियो गाड़ी के गुना और शिवपुरी जिला के बीच बार-बार आवागमन और भारी नकदी के लेन-देन ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मार्च महीने में यह गाड़ी तीन बार इसी रूट से गुजरी और हर बार शिवपुरी से बड़ी रकम लेकर वापस लौटी।
मामला तब तूल पकड़ गया जब 19 मार्च की रात करीब 9:30 बजे धरनावदा थाना क्षेत्र की रूठियाई चौकी पर वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने इस गाड़ी को रोका। तलाशी के दौरान करीब एक करोड़ रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई। आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय व्यापारी अनिल पटेल से कथित सौदेबाजी की और 20 लाख रुपये लेकर वाहन को छोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि अगले ही दिन गुजरात से खुद को आईपीएस अधिकारी बताने वाले एक व्यक्ति का फोन आने के बाद पुलिसकर्मियों ने ली गई रकम वापस कर दी। इसके बाद यह गाड़ी दोबारा गुना पहुंची और करीब पांच घंटे रुकने के बाद गुजरात के लिए रवाना हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की भूमिका को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
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टोल प्लाजा के रिकॉर्ड खंगालने पर गाड़ी की गतिविधियों का एक तय पैटर्न सामने आया है। जानकारी के अनुसार, 12-13 मार्च और 15-16 मार्च को भी गाड़ी का शिवपुरी आना-जाना दर्ज हुआ। तीसरी बार 19 मार्च को यह गाड़ी फिर उसी मार्ग से गुजरते हुए पकड़ी गई। खास बात यह रही कि पकड़े जाने के बाद गाड़ी ने वापसी के लिए अपना रास्ता बदल लिया और पगारा टोल से निकलने के बजाय वैकल्पिक मार्ग से राजस्थान की ओर चली गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना ने जांच की जिम्मेदारी ट्रेनी आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ को सौंपी है। जाखड़ पिछले तीन दिनों से गुना में डेरा डालकर मामले की गहन जांच कर रहे हैं। गुजरात के संबंधित व्यापारी को नोटिस जारी किया गया है और घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित पुलिसकर्मियों ने गाड़ी रोकने और उसमें नकदी होने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन उनका दावा है कि दस्तावेजों की जांच के बाद वाहन को छोड़ दिया गया। हालांकि, नियमों के अनुसार ऐसी कार्रवाई की रोजनामचे में एंट्री अनिवार्य होती है, जो इस मामले में नहीं मिली। यही तथ्य अब जांच का अहम बिंदु बन गया है। फिलहाल, यह मामला न केवल संभावित हवाला नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है, बल्कि पुलिस तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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