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आत्माराम पारदी हत्याकांड: तत्कालीन RTO पर जालसाजी का केस दर्ज, कई और भी शिकंजे में; फरार थानेदार पर इनाम बढ़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Wed, 03 Jan 2024 05:26 PM IST
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सार
Atmaram Pardi Murder Case: गुना के हाई प्रोफाइल मामले आत्माराम पारदी हत्याकांड में तत्कालीन आरटीओ और वर्तमान परिवहन उपायुक्त पर जालसाजी का मामला दर्ज किया गया है। वहीं, मामले में बर्खास्त और फरार चल रहे थानेदार पर इनाम राशि को बढ़ा दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर...।
गुना की तत्कालीन आरटीओ मधु सिंह पर जालसाजी का केस दर्ज, फरार आरोपी थानेदार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के गुना जिले में आठ साल पहले पुलिस द्वारा आदिवासी की हत्या के हाई प्रोफाइल मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। गुना की तत्कालीन आरटीओ मधु सिंह के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। मधु सिंह वर्तमान में परिवहन उपायुक्त हैं। उन पर हत्या के समय लाश को ठिकाने लगाने में प्रयोग की गई कार के फर्जी तौर पर किए गए रजिट्रेशन के मामले में विभिन्न धाराओं में आपराधिक केस दर्ज किया गया है। इस मामले में फरार चल रहे हत्या के आरोपी बर्खास्त थानेदार की गिरफ्तारी पर इनाम की राशि बढ़ाकर 30 हजार कर दी गई है।
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प्रदेश का बहुचर्चित यह पूरा मामला गुना जिले का है। यहां की धरनावदा पुलिस चौकी का प्रभारी सब इंस्पेक्टर पास के गांव से आत्माराम पारदी को पूछताछ के लिए पकड़कर लाया था। आरोप है कि पुलिस प्रताड़ना के चलते उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों द्वारा उसकी लाश को बहाने के लिए कार से एक नदी में ले जाया गया। पुलिस पहले आत्माराम को हिरासत में लेने से ही इनकार करती रही। बाद में परिजनों ने इस मामले में एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दर्ज की। उस की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी।
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सीआईडी ने प्रथमदृष्टया जांच के बाद इसे हत्या का केस माना। सीआईडी ने पाया कि रामवीर ने कुछ अन्य पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर लाश को कार से ले जाकर ठिकाने लगाया। इसमें रामवीर सहित बाकी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और लाश को ठिकाने लगाने जैसी संगीन धाराओं में आपराधिक केस दर्ज किया गया और ग्वालियर आईजी ने थानेदार को नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
आठ साल से फरार चल रहा आरोपी थानेदार
इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस बहुचर्चित हत्याकांड में मुख्य आरोपी और बर्खास्त थानेदार को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पहले एसपी गुना ने दस हजार तो फिर एडीजी ग्वालियर ने 20 हजार का इनाम घोषित किया है। अब मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 30 हजार का इनाम घोषित किया है।
तत्कालीन आरटीओ पर भी केस दर्ज
2015 में हुए गुना के इस बहुचर्चित आत्माराम पारदी की हत्या से जुड़े एक मामले में सरकार ने बीती रात एक और बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी थानेदार ने जिस कार का आत्माराम पारदी की लाश को ठिकाने लगाने में प्रयोग किया, उसे आरटीओ विभाग के लोगों ने गलत तरीके से ट्रांसफर किया था। गुना बस हादसे के बाद जब वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर जांच-पड़ताल शुरू हुई तो वहां फाइलों में दबाकर रखा गया यह मामला भी सामने आ गया। इसके चलते वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गुना की तत्कालीन RTO मधु सिंह और आरटीओ के बाबू पर 420, 467, 471, 197, 198, 463, 465 के तहत केस दर्ज किया गया। यह कार्रवाई हत्या के मामले में फरार थानेदार की गाड़ी को फर्जी तौर पर ट्रांसफर करने के लिए किया गया है।
मधु सिंह वर्तमान में परिवहन उपायुक्त हैं। गुना के बाद, शिवपुरी, मुरैना में भी वह विवादित अधिकारी रही हैं। उन पर रिश्वतखोरी और अवैध रजिस्ट्रेशन सहित गंभीर आरोप लगते रहे हैं, जिसकी CM तक शिकायतें भी पहुंचीं थी।
परिवहन विभाग में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई की खबर मिलते ही परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि वहां अगर यह जांच-पड़ताल आगे बढ़ी तो उसके हजारों ऐसे मामले सामने आ जाएंगे। परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार के मामले तो खूब सामने आते हैं, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती थी। वहीं, अब बड़े अफसर पर कार्रवाई से उनमें हड़कंप मच गया है।
परिवहन विभाग पर दूसरी बड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पदभार ग्रहण करने के बाद परिवहन विभाग पर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले गुना में हुए बस हादसे में जिसमें 13 यात्रियों की जान गई थी, के बाद सीएम ने गुना आरटीओ को सस्पेंड करने के बाद प्रदेश के परिवहन आयुक्त को भी हटा दिया था।

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