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MP Elections: गुना में हुए सत्ता का संग्राम में महिला मतदाताओं ने रखी अपनी राय; बताया इन मुद्दों पर देंगी वोट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Mon, 30 Oct 2023 03:53 PM IST
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सार
MP Election 2023: मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 का विधानसभा क्षेत्रों का चुनावी माहौल जानने के लिए अमर उजाला का चुनावी रथ सोमवार को गुना पहुंचा। गुना में हो रहे 'सत्ता का संग्राम' कार्यक्रम में महिला मतदाताओं ने अपने मुद्दे बताए, जिनपर वे मतदान करेंगी।
सत्ता का संग्राम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में आगामी 17 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। राज्य के चुनावी माहौल का जायजा लेने और मतदाताओं से जरूरी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' सोमवार को गुना पहुंचा। जहां महिला वोटर्स ने रोजगार, भुखमरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
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स्थानीय महिला मतदाता गीता पाठक ने कहा कि विधवाओं को छह सौ रुपये मिलते थे, उसे बंद कर नई योजान लाडली बहना शुरू की गई। उसमें एक हजार रुपये दिए जाने लगे। इसमें हमारा छह सौ का नुकसान क्यों हुआ है। मेरी जैसी जो सक्षम महिलाएं हैं वे तो अपना गुजारा कर सकती हैं। लेकिन अन्य महिलाएं केवल छह सौ या हजार रुपये में अपना घर नहीं चला सकती हैं। इसलिए छह सौ रुपये के साथ-साथ ही अलग हजार रुपये दिए जाएं।
एक अन्य महिला निष्ठा मिश्रा ने कहा कि परीक्षा केंद्र अलग-अलग संभाग में दिए जाते हैं। फॉर्म होता है सात सौ-आठ सौ रुपये का। परीक्षा केंद्र तक जाने-आने का खर्चा हो जाता है डेढ़ हजार रुपये तक। इस तरह फॉर्म दो हजार रुपये का पड़ता है। मैं ये चाहती हूं कि हमारे गृह जिले में परीक्षा केंद्र दिए जाएं। परीक्षा केंद्र के लिए हमें ग्वालियर, इंदौर और भोपाल ही भरना पड़ता है। परीक्षा केंद्र दूर होने की वजह से कई बार मेरी परीक्षा छूट गई।
वहीं, एक अन्य महिला ने कहा कि गुना में परीक्षा केंद्र हैं ही नहीं। ये समस्या सभी के साथ हैं। सबसे ज्यादा परेशानी शादीशुदा महिलाओं को होती है। उन्हें अन्य काम भी करने होते हैं, ऐसे में दूर जाकर परीक्षा देना बहुत मुश्किल भरा होता है। ऐसा तो है नहीं कि सुबह जाकर शाम को लौट आएंगे।
एक छात्रा ने बताया कि हमारा रिजल्ट भी समय पर नहीं आता है। परीक्षा देने तो हम समय पर चले जाते हैं, पर रिजल्ट समय पर मुहैया नहीं करवाते। नई वैकेंसी आ जाती हैं लेकिन पिछली परीक्षा का रिजल्ट नहीं आता। कई बार परीक्षा देने समय पर नहीं पहुंच पाते तो सेंटर में एंट्री नहीं मिलती और परीक्षा छूट जाती है। उन्होंने आगे कहा कि एजुकेशन सिस्टम की हालत बहुत खराब है। मैंने नर्सिंग भी की थी तो उसका रिजल्ट भी नहीं दिया था। कई बार फर्स्ट ईयर तीन साल में कंप्लीट होती है। कभी-कभी तो परीक्षा भी कंडक्ट नहीं करवाते। अभी जो फर्स्ट ईयर वाले हैं उनकी परीक्षा अभी तक नहीं हुई। मतलब हड़ताल भी की, सबकुछ किया। लेकिन परीक्षा आयोजित नहीं करवाई गई।

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