Guna: इलाज के दौरान अस्पताल से गायब हुआ मरीज, चार दिन बाद कुएं में मिला शव; परिजनों ने बताया घोर लापरवाही
गुना जिला अस्पताल से इलाज के दौरान लापता हुए 45 वर्षीय रूपसिंह बंजारा का चार दिन बाद गांव के कुएं में शव मिला। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। पुलिस ने मर्ग कायम कर सीसीटीवी फुटेज और अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।
गुना जिला अस्पताल से इलाज के दौरान लापता हुए 45 वर्षीय रूपसिंह बंजारा का चार दिन बाद गांव के कुएं में शव मिला। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। पुलिस ने मर्ग कायम कर सीसीटीवी फुटेज और अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।
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इलाज के लिए भर्ती हुए एक मरीज के जिला अस्पताल परिसर से रहस्यमय ढंग से लापता होने और चार दिन बाद गांव के एक कुएं में उसका शव मिलने की घटना ने गुना जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामला गुना जिले के ग्राम छिपोन का है। यहां रहने वाले 45 वर्षीय रूपसिंह बंजारा की आंख में रेत चली गई थी। परिजन उन्हें 29 जून को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने भर्ती कर इलाज शुरू किया। परिजनों के अनुसार उनकी हालत सामान्य थी और परिवार के सदस्य बारी-बारी से उनकी देखभाल कर रहे थे।
3 जुलाई की दोपहर परिजन उनके लिए खाना लेने अस्पताल से बाहर गए थे। वापस लौटने पर रूपसिंह वार्ड में नहीं मिले। पहले उन्हें लगा कि वह वॉशरूम या अस्पताल परिसर में कहीं गए होंगे, लेकिन काफी तलाश के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला।
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने तत्काल अस्पताल प्रबंधन और सुरक्षा कर्मियों को सूचना दी, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका कहना है कि न तो तुरंत सीसीटीवी फुटेज देखे गए और न ही अस्पताल परिसर में प्रभावी तलाश की गई। इसके बाद परिजनों ने स्वयं गांव और आसपास के क्षेत्रों में उनकी तलाश शुरू कर दी।
इसी बीच मंगलवार को ग्राम छिपोन में एक कुएं में शव मिलने की सूचना मिली। ग्रामीणों की जानकारी पर परिजन मौके पर पहुंचे, जहां शव की पहचान रूपसिंह बंजारा के रूप में हुई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और प्रशासन की मदद से शव को कुएं से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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घटना के बाद परिजनों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल प्रबंधन समय रहते सक्रियता दिखाता और पुलिस को तुरंत सूचना देता, तो शायद रूपसिंह को बचाया जा सकता था। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि रूपसिंह अस्पताल के वार्ड से कब और कैसे बाहर निकले। पुलिस अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, गेट रजिस्टर और अस्पताल स्टाफ के बयान भी दर्ज करेगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के कारणों की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटना ने जिला अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा, वार्डों की निगरानी और अस्पताल परिसर में आने-जाने वालों पर नियंत्रण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
