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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Gwalior News ›   Minor addicted to 'Free Fire' goes missing from home; had been playing the game for 8 years.

Gwalior News: फ्री फायर प्रो-प्लेयर छात्र लापता, साइबर सेल ने संदिग्धों की लोकेशन कोलकाता में ट्रेस की

Tue, 07 Jul 2026 09:29 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: ग्वालियर ब्यूरो Updated Tue, 07 Jul 2026 09:29 PM IST
सार

ग्वालियर का 15 वर्षीय छात्र प्रिंस पिछले सात दिनों से लापता है। परिजनों ने ऑनलाइन गेम फ्री फायर के जरिए साइबर गिरोह के संपर्क में आने का आरोप लगाया है। साइबर सेल ने संदिग्धों की लोकेशन कोलकाता में ट्रेस की है और पुलिस तलाश में जुटी है।

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Minor addicted to 'Free Fire' goes missing from home; had been playing the game for 8 years.
लापता होने के बाद परिजन पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्वालियर में ऑनलाइन गेम फ्री फायर की लत का शिकार 15 वर्षीय छात्र पिछले सात दिनों से लापता है। परिजनों का आरोप है कि उनका बेटा अंतरराज्यीय साइबर ठगों और ऑनलाइन गेमिंग नेटवर्क के चंगुल में फंस गया है। छात्र आखिरी बार केरल से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में सवार होता दिखाई दिया था। फिलहाल थाटीपुर थाना पुलिस और साइबर सेल उसकी तलाश में जुटी हैं, जबकि परिवार भी अपने स्तर पर खोजबीन कर रहा है।

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मेहरा कॉलोनी निवासी जनवेद सिंह दोहरे ने बताया कि उनका बेटा प्रिंस 30 जून 2026 की सुबह करीब 8 बजे बिना किसी को बताए घर से निकल गया था। प्रिंस का रंग सांवला, कद करीब पांच फीट है। घर से निकलते समय उसने हरे रंग की शर्ट और काले रंग की पैंट पहन रखी थी। जनवेद के अनुसार, प्रिंस आखिरी बार एक ऐसे युवक के साथ देखा गया था, जिसे परिवार नहीं जानता। दोनों की दोस्ती फ्री फायर गेम के माध्यम से हुई थी।
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परिजनों का कहना है कि प्रिंस ऑनलाइन गेमिंग सिंडिकेट के ऐसे नेटवर्क के संपर्क में था, जिसके तार बिहार, झारखंड और कोलकाता से जुड़े बताए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने संदिग्धों की लोकेशन कोलकाता में ट्रेस होने के बावजूद अब तक पर्याप्त गंभीरता से कार्रवाई नहीं की है, जिससे उनके बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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प्रिंस की मां सीमा देवी दोहरे ने बताया कि परिवार ने उसके दोस्तों और छोटे भाई अनुज से जानकारी जुटाई। पता चला कि प्रिंस पिछले आठ वर्षों से फ्री फायर खेल रहा था और वह गेम का प्रो-प्लेयर माना जाता था। उसकी गेमिंग आईडी की अच्छी कीमत बताई जाती थी। दोस्तों के मुताबिक, गेमिंग आईडी खरीदने-बेचने के बहाने बाहरी राज्यों के कुछ लोग प्रिंस के संपर्क में आए थे और वे उससे व्हाट्सऐप मैसेज, कॉल तथा ग्रुप कॉल के जरिए लगातार जुड़े रहते थे।


परिजनों के अनुसार, प्रिंस के मोबाइल से कई फर्जी नामों वाली आईडी, व्हाट्सऐप ग्रुप, कॉल रिकॉर्डिंग और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। दोस्तों का कहना है कि बच्चों का भरोसा जीतकर उन्हें अपने जाल में फंसाने वाला यह नेटवर्क मध्य प्रदेश से बाहर संचालित होता है और इसके तार बिहार, झारखंड तथा कोलकाता से जुड़े हो सकते हैं। शुरुआती जांच में साइबर सेल ने भी कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन कोलकाता में ट्रेस की है।

थाटीपुर थाना प्रभारी विपेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि परिजनों द्वारा उपलब्ध कराए गए फोन नंबर और अन्य तकनीकी जानकारियां साइबर सेल को भेज दी गई हैं। तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन के आधार पर संदिग्धों की तलाश की जा रही है। जल्द ही एक विशेष टीम कोलकाता भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रिंस को सकुशल तलाशना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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