Dhar Bhojshala: धार भोजशाला में बनी कमाल मौला दरगाह के निर्माण में मंदिर के हिस्से का उपयोग
98 दिन तक धार भोजशाला में चले सर्वे में मिले पुरातत्व महत्व के अवशेषों के अनुसार भोजशाला का निर्माण परमारकाल में हुआ था। रिपोर्ट में सर्वे के दौरान एकत्रित किए डेढ़ हजार से ज्यादा प्रमाणों व अवशेषों का विश्लेषण किया गया है।
विस्तार
भोजशाला को लेकर एएसआई ने कोर्ट में दो हजार पेज की रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों, सिक्कों और अन्य अवशेषों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार परमारकालीन भवन की नींव के पत्थरों पर बाद में निर्माण किया गया। सर्वे में पाए गए स्तंभों और उनकी वास्तुकला के आधार पर कहा गया है कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिर का हिस्सा थे, जिन्हें बाद में मस्जिद निर्माण के दौरान फिर से उपयोग में लिया गया।
ये खबर भी पढ़ें: भोजशाला पर एएसआई रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश: 12वीं सदी में हुआ था निर्माण, 1265 में आए थे कमाल मौला
रिपोर्ट के अनुसार चारों दिशाओं में खड़े 106 तथा आड़े 82, इस प्रकार कुल 188 स्तंभ मिले हैं। इन सभी की वास्तुकला से यह संकेत मिलता है कि वे मूल रूप से मंदिरों का हिस्सा थे। स्तंभों पर उकेरी गई देवताओं और मनुष्यों की आकृतियों को औजारों से खंडित किया गया है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य हैं जो दर्शाते हैं कि मंदिर के हिस्सों का उपयोग दरगाह निर्माण में किया गया।
भोजशाला की दीवारों पर देवताओं की आकृतियां भी मिली हैं। सर्वे में पूर्व में परिसर से निकालकर मांडू के संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई मूर्तियों को भी शामिल किया गया है। इन्हें संरक्षण की दृष्टि से वहां रखा गया था। खुदाई में प्राप्त कलाकृतियां संगमरमर, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से निर्मित हैं।
इन कलाकृतियों में गणेश, नृसिंह, भैरव, अन्य देवी-देवताओं तथा पशु आकृतियों के चिह्न पाए गए हैं। सर्वे में दो ऐसे स्तंभ भी मिले हैं जिन पर ‘ऊँ सरस्वतै नमः’ अंकित है। रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 148 पर उल्लेख है कि भोजशाला में मौजूद स्तंभों की वास्तुकला यह दर्शाती है कि वे पहले मंदिर का हिस्सा थे और मस्जिद निर्माण के दौरान उन्हें बेसाल्ट के ऊंचे चबूतरों पर फिर से स्थापित किया गया। इस हिस्से में एक स्तंभ पर देवी-देवता की छवि भी है।
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी भाग में स्तंभों की कतार में लगे एक बड़े शिलालेख में प्राकृत भाषा में दो कविताएं अंकित हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 छंद हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पश्चिम दिशा में स्थित मेहराब की दीवारें बेसाल्ट से बने चबूतरे से सटी हुई हैं, जिसके नीचे नक्काशी मौजूद है। चबूतरे और मेहराब की दीवारों की निर्माण शैली अलग-अलग बताई गई है।
यह पहली बार नहीं है जब भोजशाला का सर्वे हुआ है। अंग्रेज शासन काल में भी इसका सर्वे किया गया था। इसके अतिरिक्त वर्ष 1987 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए उत्खनन में भोजशाला से हिंदू धर्म से संबंधित 32 मूर्तियां प्राप्त हुई थीं। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि कमाल मौलाना दरगाह के निर्माण में पहले से मौजूद मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया था।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

कमेंट
कमेंट X