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Indore News: इंदौर में दूषित पानी से कैसे फेल हो गए लिवर और किडनी? उल्टी दस्त बन गए जानलेवा
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 09 Jan 2026 06:21 PM IST
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सार
Indore News: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के पीछे डॉक्टरों ने मल्टी ऑर्गन फेल्योर और सेप्टिक शॉक को मुख्य कारण बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में मौजूद बैक्टीरिया ने मरीजों के लिवर, किडनी और हार्ट पर सीधा हमला किया।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से 20 लोगों की मौत हो गई
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में कई कारण सामने आए हैं। यहां पर इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि कोई लिवर फेल होने की वजह से तो कोई किडनी में नुकसान पहुंचने की वजह से नहीं बच पाया। इसके साथ लगातार उल्टी, दस्त और कमजोरी ने लोगों को कुछ मामलों में सेप्टिक शॉक और मल्टी ऑर्गन फेल्योर की स्थिति में भी पहुंचा दिया। प्रारंभिक लक्षणों को टालने के कारण संक्रमण खून में फैल गया और शरीर की रक्षा प्रणाली लगातार कमजोर होती गई इससे शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा और कई मरीज अचानक गंभीर हो गए। अच्छे इलाज के बावजूद उन्हें बचाना मुश्किल हो गया।
सामान्य लगने वाले उल्टी दस्त बन गए जानलेवा
भागीरथपुरा में इलाज कर रही स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मनीषा मिश्रा ने बताया कि मौतें केवल दस्त या उल्टी से नहीं हुई। यह एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया थी, जिसमें शरीर का पूरा सिस्टम धीरे-धीरे जवाब देता चला गया और आखिर में जान चली गई। दूषित पानी पीने के बाद सबसे पहले आंतों में संक्रमण हुआ और बाद में यह पूरे शरीर में फैलता गया। उल्टी दस्त की वजह से डिहाइड्रेशन बढ़ता गया और दूसरे अंगों ने भी काम करने बंद कर दिया। कई मरीजों में बीपी कम हुआ, मरीज को शॉक लगा और फिर उसका संभलना मुश्किल हो गया। डॉक्टर मनीषा ने कहा कि पानी में मौजूद बैक्टीरिया या अन्य पैथोजन आंतों की कार्यप्रणाली को बिगाड़ देते हैं, जिससे तेज दस्त और उल्टी शुरू हो जाती है। बाहर से यह बीमारी सामान्य लग सकती है, लेकिन भीतर शरीर तेजी से कमजोर होने लगता है।
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इस तरह से फेल होते गए लिवर और किडनी
एमजीएम के मेडिसिन विभाग अध्यक्ष डॉ. एडी भटनागर ने बताया कि लगातार दस्त और उल्टी से कई मामलों में जान चली जाती है। इसके कारण कुछ ही घंटों में शरीर से बड़ी मात्रा में पानी और जरूरी मिनरल बाहर निकल जाते हैं। उन्होंने कहा कि सोडियम (Na+), पोटेशियम (K+), कैल्शियम (Ca2+), मैग्नीशियम (Mg2+), क्लोराइड (Cl-), और बाइकार्बोनेट (HCO3-) शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं। लगातार उल्टी और दस्त की स्थिति में यह शरीर में कम होने लगते हैं। इसे मेडिकल भाषा में गंभीर इलेक्ट्रालाइट डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन कहा जाता है। यही वह मोड़ होता है, जहां शरीर का तापमान, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट असंतुलित होने लगते हैं और मरीज को संभालना मुश्किल होता जाता है। जब इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ता है, तो इसका सीधा असर किडनी और हार्ट पर पड़ता है। किडनी पर्याप्त मात्रा में खून को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं। वहीं हार्ट की धड़कन अनियमित हो सकती है। कई मामलों में यही स्थिति कर्डियक अरेस्ट या ऑर्गन फेल्योर तक पहुंच जाती है।
बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा
इस तरह के मामलों में सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार मरीजों को होता है। इनकी बॉडी रिजर्व क्षमता कम होती है, यानी शरीर लंबे समय तक डिहाइड्रेशन और इन्फेक्शन का दबाव नहीं झेल पाता। कई बार मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक अंदरूनी नुकसान जानलेवा स्तर तक पहुंच चुका होता है। इसके साथ जिन मरीजों को पहले से कई बीमारियां होती हैं वह भी इस तरह की स्थिति में जल्द गंभीर हो जाते हैं।
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भागीरथपुरा में इलाज कर रही स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर मनीषा मिश्रा ने बताया कि मौतें केवल दस्त या उल्टी से नहीं हुई। यह एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया थी, जिसमें शरीर का पूरा सिस्टम धीरे-धीरे जवाब देता चला गया और आखिर में जान चली गई। दूषित पानी पीने के बाद सबसे पहले आंतों में संक्रमण हुआ और बाद में यह पूरे शरीर में फैलता गया। उल्टी दस्त की वजह से डिहाइड्रेशन बढ़ता गया और दूसरे अंगों ने भी काम करने बंद कर दिया। कई मरीजों में बीपी कम हुआ, मरीज को शॉक लगा और फिर उसका संभलना मुश्किल हो गया। डॉक्टर मनीषा ने कहा कि पानी में मौजूद बैक्टीरिया या अन्य पैथोजन आंतों की कार्यप्रणाली को बिगाड़ देते हैं, जिससे तेज दस्त और उल्टी शुरू हो जाती है। बाहर से यह बीमारी सामान्य लग सकती है, लेकिन भीतर शरीर तेजी से कमजोर होने लगता है।
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बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा
इस तरह के मामलों में सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार मरीजों को होता है। इनकी बॉडी रिजर्व क्षमता कम होती है, यानी शरीर लंबे समय तक डिहाइड्रेशन और इन्फेक्शन का दबाव नहीं झेल पाता। कई बार मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक अंदरूनी नुकसान जानलेवा स्तर तक पहुंच चुका होता है। इसके साथ जिन मरीजों को पहले से कई बीमारियां होती हैं वह भी इस तरह की स्थिति में जल्द गंभीर हो जाते हैं।

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