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Indore News: बाबा महाकाल के द्वार पर छलका भक्त का दर्द, शिखर दर्शन कर रहे थे, सुरक्षाकर्मियों ने दिया धक्का

Thu, 06 Aug 2026 04:26 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Thu, 06 Aug 2026 04:26 PM IST
सार

श्रद्धालुओं का कहना है कि 150 किमी की कठिन यात्रा के बाद जब वे बाहर से शिखर दर्शन कर रहे थे, तब सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर अपमानित किया। पीड़ित भक्तों ने मंदिर में जारी VIP व्यवस्था, टोकन सिस्टम की मनमानी पर सवाल खड़े किए हैं। 

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शिखर दर्शन कर रहे कांवड़ियों को सुरक्षाकर्मियों ने दिया धक्का। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

महेश्वर से मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर लगभग 150 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे एक श्रद्धालु ने मंदिर परिसर की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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दर्शन न मिलने का दुख नहीं, दुर्व्यवहार से हुए आहत
श्रद्धालु नीरज याग्निक ने कहा कि उन्होंने महेश्वर से बेहद कम समय में यह कठिन पदयात्रा पूरी की थी, लेकिन महाकाल मंदिर पहुंचने के बाद उन्हें दर्शन का अवसर नहीं मिल सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि दर्शन न हो पाने का उन्हें कोई दुख नहीं है, क्योंकि इतनी लंबी यात्रा का निर्विघ्न पूरा होना बाबा महाकाल की ही कृपा थी। हालांकि, उनका दर्द तब छलक पड़ा जब मंदिर के बाहर शिखर दर्शन के दौरान उन्हें सुरक्षाकर्मियों के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।
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शिखर दर्शन के दौरान धक्का देने का आरोप
उनके अनुसार, दर्शन न मिलने पर वे मंदिर प्रांगण के बाहर से ही बाबा महाकाल के शिखर दर्शन कर रहे थे। उसी समय उनके परिवार के लोग पदयात्रा पूरी होने की खुशी में उन्हें माला पहनाकर सम्मानित कर रहे थे। आरोप है कि तभी मंदिर की निजी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक कर्मचारी ने उन्हें और उनके साथ वहां खड़े श्रद्धालुओं को धक्का देकर वहां से हटा दिया। इस अभद्र व्यवहार से व्यथित होकर उन्होंने गहरा दुःख जताया है।


VIP व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर खड़े किए सवाल
नीरज याग्निक ने मंदिर में प्रभाव, सिफारिश, टोकन और पैसे के आधार पर अलग-अलग लाइनों तथा प्रवेश द्वारों की व्यवस्था पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि धर्मस्थल पर श्रद्धालुओं को पैसों या रसूख के आधार पर बांटने की व्यवस्था की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जब मंदिर धर्म का है, सेवा पुजारियों की है और आस्था आम भक्तों की, तो फिर निजी सुरक्षा एजेंसियों के पास आम श्रद्धालुओं से ऐसा व्यवहार करने का अधिकार कैसे है?

प्रभु के द्वार पर मिला अपमान
नीरज याग्निक ने कहा कि वे किसी विशेष सुविधा, पास या VIP व्यवस्था के सहारे नहीं, बल्कि हाथ में कांवड़ लेकर पैदल चलकर अपने आराध्य के द्वार पहुंचे थे लेकिन बाबा महाकाल के पावन द्वार पर इस तरह के दुर्व्यवहार और अपमान ने उनके मन को गहरा आघात पहुंचाया है।
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