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MPPSC: 43 डिग्री की गर्मी में 90 मिनट का इंतजार, जूते-मोजे उतरवाए और पर्स भी रखवाए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sun, 26 Apr 2026 08:25 PM IST
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सार
MPPSC: एमपीपीएससी की राज्य सेवा एवं राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 संपन्न हुई। 46 केंद्रों पर आयोजित परीक्षा में नकल रोकने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा, बायोमैट्रिक जांच और जूते-मोजे प्रतिबंधित करने जैसे कड़े नियम लागू किए गए।
केंद्रों पर जांच के दौरान लंबी लाइनें लगी रही।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा आयोजित राज्य सेवा एवं राज्य वन सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 आज इंदौर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इंदौर शहर में इस महत्वपूर्ण परीक्षा के संचालन के लिए कुल 46 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे। इन केंद्रों में होलकर साइंस कॉलेज, प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेज, एसजीएसआईटीएस कॉलेज और मालव कन्या स्कूल जैसे शहर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान शामिल रहे। प्रशासन ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक और सख्त प्रबंध किए थे।
त्रिस्तरीय सुरक्षा जांच प्रक्रिया से गुजरे अभ्यर्थी
MPPSC के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए इंदौर के सभी 46 केंद्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा जांच की व्यवस्था की गई थी। परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पूर्व प्रत्येक अभ्यर्थी का बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण किया गया और उनके प्रवेश पत्र की गहन स्कैनिंग की गई। तकनीकी माध्यमों से होने वाली नकल की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए इस बार भी जूते-मोजे पहनकर प्रवेश देने पर पूरी तरह पाबंदी रही। इस नियम के कारण अधिकांश परीक्षार्थी चप्पल या सैंडल पहनकर परीक्षा देने पहुंचे। इसके अतिरिक्त घड़ी, बेल्ट, बटुआ और चश्मा जैसी वस्तुओं को भी केंद्र के मुख्य द्वार पर ही जमा करा लिया गया।
भीषण गर्मी के बीच लगे समय ने बढ़ाई परीक्षार्थियों की मुश्किल
इंदौर में अप्रैल के महीने में पड़ रही प्रचंड गर्मी ने अभ्यर्थियों की चुनौती को और बढ़ा दिया। आयोग के नियमों के मुताबिक परीक्षा शुरू होने के निर्धारित समय से डेढ़ घंटा पहले केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य था। इस नियम के चलते सुबह साढ़े आठ बजे से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी लाइनें दिखाई देने लगीं। तेज धूप और तपिश को देखते हुए प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के भीतर पीने के पानी की उचित व्यवस्था की थी, हालांकि अभ्यर्थियों को केवल पारदर्शी बोतलों के साथ ही पानी अंदर ले जाने की अनुमति दी गई।
महिला अभ्यर्थियों की जांच के लिए विशेष संवेदनशीलता दिखी
परीक्षा के दौरान महिला अभ्यर्थियों की जांच के लिए विशेष प्रोटोकॉल का पालन किया गया। सुरक्षा और तलाशी के कार्य के लिए महिला वीक्षकों को तैनात किया गया था ताकि मानवीय गरिमा और संवेदनशीलता बनी रहे। जांच के दौरान दुपट्टों और आभूषणों की सूक्ष्मता से पड़ताल की गई और प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें वापस कर दिया गया। सुरक्षा नियमों के कारण कई अभ्यर्थी अपनी कीमती वस्तुएं और वर्जित सामग्री केंद्र के बाहर खड़े अपने परिजनों या मित्रों को सौंपते हुए दिखाई दिए।
चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रही
इंदौर के हर परीक्षा केंद्र पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो महिला और दो पुरुष पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई थी। पुलिस प्रशासन के साथ-साथ केंद्र प्रभारियों और पर्यवेक्षकों को भी विशेष हिदायत दी गई थी कि वे पूरी परीक्षा अवधि के दौरान सतर्क रहें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अनुशासनहीनता पाए जाने पर तत्काल कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे ताकि परीक्षा प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
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MPPSC के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए इंदौर के सभी 46 केंद्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा जांच की व्यवस्था की गई थी। परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पूर्व प्रत्येक अभ्यर्थी का बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण किया गया और उनके प्रवेश पत्र की गहन स्कैनिंग की गई। तकनीकी माध्यमों से होने वाली नकल की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए इस बार भी जूते-मोजे पहनकर प्रवेश देने पर पूरी तरह पाबंदी रही। इस नियम के कारण अधिकांश परीक्षार्थी चप्पल या सैंडल पहनकर परीक्षा देने पहुंचे। इसके अतिरिक्त घड़ी, बेल्ट, बटुआ और चश्मा जैसी वस्तुओं को भी केंद्र के मुख्य द्वार पर ही जमा करा लिया गया।
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भीषण गर्मी के बीच लगे समय ने बढ़ाई परीक्षार्थियों की मुश्किल
इंदौर में अप्रैल के महीने में पड़ रही प्रचंड गर्मी ने अभ्यर्थियों की चुनौती को और बढ़ा दिया। आयोग के नियमों के मुताबिक परीक्षा शुरू होने के निर्धारित समय से डेढ़ घंटा पहले केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य था। इस नियम के चलते सुबह साढ़े आठ बजे से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी लाइनें दिखाई देने लगीं। तेज धूप और तपिश को देखते हुए प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों के भीतर पीने के पानी की उचित व्यवस्था की थी, हालांकि अभ्यर्थियों को केवल पारदर्शी बोतलों के साथ ही पानी अंदर ले जाने की अनुमति दी गई।
महिला अभ्यर्थियों की जांच के लिए विशेष संवेदनशीलता दिखी
परीक्षा के दौरान महिला अभ्यर्थियों की जांच के लिए विशेष प्रोटोकॉल का पालन किया गया। सुरक्षा और तलाशी के कार्य के लिए महिला वीक्षकों को तैनात किया गया था ताकि मानवीय गरिमा और संवेदनशीलता बनी रहे। जांच के दौरान दुपट्टों और आभूषणों की सूक्ष्मता से पड़ताल की गई और प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें वापस कर दिया गया। सुरक्षा नियमों के कारण कई अभ्यर्थी अपनी कीमती वस्तुएं और वर्जित सामग्री केंद्र के बाहर खड़े अपने परिजनों या मित्रों को सौंपते हुए दिखाई दिए।
चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रही
इंदौर के हर परीक्षा केंद्र पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो महिला और दो पुरुष पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई थी। पुलिस प्रशासन के साथ-साथ केंद्र प्रभारियों और पर्यवेक्षकों को भी विशेष हिदायत दी गई थी कि वे पूरी परीक्षा अवधि के दौरान सतर्क रहें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अनुशासनहीनता पाए जाने पर तत्काल कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे ताकि परीक्षा प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।
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