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Indore News: संस्थाओं की व्हील चेयर पर मरीजों को लेकर भटक रहे परिजन, सबसे बड़ा अस्पताल, व्यवस्थाएं बदहाल
Tue, 07 Jul 2026 06:18 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 07 Jul 2026 06:18 AM IST
सार
Indore News: इंदौर के सबसे बड़े सरकारी एमवाय अस्पताल की ओपीडी में रोजाना चार हजार तक मरीज पहुंच रहे हैं, जहां बदहाल व्यवस्थाओं के चलते जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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मरीजों को लेकर भटकते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के सबसे बड़े सरकारी महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) में इलाज करवाने के लिए रोज हजारों मरीज आते हैं। इंदौर के आसपास के जिलों के मरीज भी इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। इन सबके बावजूद यहां पर व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। इन दिनों मौसम में बदलाव के कारण मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है और रोज 4 हजार से अधिक मरीज यहां पर आ रहे हैं। अस्पताल में ओपीडी पर्ची काउंटर से लेकर दवा वितरण खिड़की तक मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
अव्यवस्थाओं और मशीनों की खराबी का सबसे बड़ा खामियाजा हड्डी रोग विभाग के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग में मशीन खराब होने की वजह से घुटने और कमर के मरीजों को एक्सरे कराने के लिए एमवाय के मुख्य भवन में भेजा जा रहा है, जबकि ओपीडी में केवल सामान्य एक्सरे ही हो पा रहे हैं। मुख्य भवन में जांच के लिए मरीजों को सवा सौ रुपए की रसीद कटानी पड़ रही है। वहां भर्ती मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है, जिसके कारण ओपीडी के मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। स्थिति यह है कि कई गरीब मरीज पैसे न होने के कारण बिना एक्सरे कराए ही घर लौटने को मजबूर हैं।
स्ट्रेचर खींचने के लिए मजबूर परिजन
अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर और व्हील चेयर तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें ले जाने के लिए वार्ड बॉय या कर्मचारी तैनात नहीं हैं। इस वजह से गंभीर मरीजों के परिजनों को खुद ही स्ट्रेचर धक्का मारकर डॉक्टर के कमरों तक ले जाना पड़ रहा है। इसके अलावा मरीजों की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि ओपीडी में घंटों इंतजार के बाद जब उनका नंबर आता है, तब तक सीनियर डॉक्टर चले जाते हैं और उन्हें जूनियर डॉक्टरों से ही परामर्श लेकर संतोष करना पड़ता है। नियमों के मुताबिक सीनियर डॉक्टरों को दोपहर दो बजे तक ओपीडी में मौजूद रहना अनिवार्य है।
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मौसमी बदलाव से बढ़े मरीज
मौसमी बदलाव के कारण अस्पताल के विभिन्न विभागों में मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है। वर्तमान में सबसे अधिक करीब पंद्रह सौ मरीज मेडिसिन विभाग में आ रहे हैं, जिनमें अधिकांश वायरल बुखार से पीड़ित हैं। इसके साथ ही ईएनटी में चार सौ, सर्जरी में साढ़े तीन सौ, हड्डी रोग में साढ़े तीन सौ और न्यूरो सर्जरी विभाग में नब्बे से सौ मरीज रोजाना दर्ज किए जा रहे हैं।
जल्द सुधरेंगी व्यवस्थाएं
अस्पताल प्रबंधन ने इन तमाम अव्यवस्थाओं को जल्द दुरुस्त करने का भरोसा दिया है। एमवायएच के अधीक्षक डॉक्टर अशोक यादव ने कहा कि कोई भी सीनियर डॉक्टर बिना किसी ठोस वजह के दोपहर दो बजे से पहले ओपीडी छोड़कर नहीं जाएगा। हमने इसके निर्देश दिए हैं। व्हील चेयर व स्ट्रेचर प्रबंधन को भी सुधारा जा रहा है।
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अव्यवस्थाओं और मशीनों की खराबी का सबसे बड़ा खामियाजा हड्डी रोग विभाग के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग में मशीन खराब होने की वजह से घुटने और कमर के मरीजों को एक्सरे कराने के लिए एमवाय के मुख्य भवन में भेजा जा रहा है, जबकि ओपीडी में केवल सामान्य एक्सरे ही हो पा रहे हैं। मुख्य भवन में जांच के लिए मरीजों को सवा सौ रुपए की रसीद कटानी पड़ रही है। वहां भर्ती मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है, जिसके कारण ओपीडी के मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। स्थिति यह है कि कई गरीब मरीज पैसे न होने के कारण बिना एक्सरे कराए ही घर लौटने को मजबूर हैं।
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स्ट्रेचर खींचने के लिए मजबूर परिजन
अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर और व्हील चेयर तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें ले जाने के लिए वार्ड बॉय या कर्मचारी तैनात नहीं हैं। इस वजह से गंभीर मरीजों के परिजनों को खुद ही स्ट्रेचर धक्का मारकर डॉक्टर के कमरों तक ले जाना पड़ रहा है। इसके अलावा मरीजों की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि ओपीडी में घंटों इंतजार के बाद जब उनका नंबर आता है, तब तक सीनियर डॉक्टर चले जाते हैं और उन्हें जूनियर डॉक्टरों से ही परामर्श लेकर संतोष करना पड़ता है। नियमों के मुताबिक सीनियर डॉक्टरों को दोपहर दो बजे तक ओपीडी में मौजूद रहना अनिवार्य है।
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मौसमी बदलाव से बढ़े मरीज
मौसमी बदलाव के कारण अस्पताल के विभिन्न विभागों में मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है। वर्तमान में सबसे अधिक करीब पंद्रह सौ मरीज मेडिसिन विभाग में आ रहे हैं, जिनमें अधिकांश वायरल बुखार से पीड़ित हैं। इसके साथ ही ईएनटी में चार सौ, सर्जरी में साढ़े तीन सौ, हड्डी रोग में साढ़े तीन सौ और न्यूरो सर्जरी विभाग में नब्बे से सौ मरीज रोजाना दर्ज किए जा रहे हैं।
जल्द सुधरेंगी व्यवस्थाएं
अस्पताल प्रबंधन ने इन तमाम अव्यवस्थाओं को जल्द दुरुस्त करने का भरोसा दिया है। एमवायएच के अधीक्षक डॉक्टर अशोक यादव ने कहा कि कोई भी सीनियर डॉक्टर बिना किसी ठोस वजह के दोपहर दो बजे से पहले ओपीडी छोड़कर नहीं जाएगा। हमने इसके निर्देश दिए हैं। व्हील चेयर व स्ट्रेचर प्रबंधन को भी सुधारा जा रहा है।
